उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में हाल ही में हुए बेल्ट कांड के बाद एक नई पहल ने लोगों का ध्यान खींचा है। इस पहल का नाम है “एक कदम गांधी के साथ”, जिसका उद्देश्य महात्मा गांधी के अहिंसा, सत्याग्रह, और स्वराज के विचारों को पुनर्जनन देकर समाज में व्याप्त तानाशाही प्रवृत्तियों और अघोषित आपातकाल जैसे हालात से देश को बचाना है। यह यात्रा न केवल गांधीवादी सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है, बल्कि हाल के विवादास्पद घटनाक्रम, जैसे सीतापुर के बेल्ट कांड, में उठे मुद्दों को भी उजागर करने का एक मंच है। नारा “कर सपथ, गांधी पथ” इस अभियान का प्रेरणास्रोत बन चुका है।
यात्रा का उद्देश्य

“एक कदम गांधी के साथ” यात्रा का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, और सविनय अवज्ञा के सिद्धांतों को पुनर्जनन देना है। आयोजकों का कहना है कि आज के समय में, जब देश में प्रशासनिक दबाव, भ्रष्टाचार, और तानाशाही प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं, गांधी के विचार ही समाज को एकजुट कर सकते हैं।
इस यात्रा के जरिए निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है:
- गांधीवादी विचारों का प्रचार : गांधी के अहिंसक प्रतिरोध और सत्याग्रह के तरीकों को अपनाकर सामाजिक और प्रशासनिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।
- तानाशाही का विरोध : कथित तौर पर बढ़ती तानाशाही प्रवृत्तियों, जैसे फर्जी हाजिरी और भ्रष्टाचार, के खिलाफ जागरूकता फैलाना, जैसा कि सीतापुर के बेल्ट कांड में देखा गया।
- अघोषित आपातकाल से बचाव : आयोजकों का मानना है कि देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बन रहे हैं, जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निष्पक्षता दबाई जा रही है। गांधी के विचारों को अपनाकर इन हालात से निपटा जा सकता है।
- सामुदायिक एकजुटता : ग्रामीण और शहरी समुदायों को एकजुट कर शिक्षा, स्वच्छता, और समानता जैसे गांधीवादी मूल्यों को बढ़ावा देना।
सीतापुर बेल्ट कांड और यात्रा की प्रासंगिकता
हाल ही में सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र में हुए बेल्ट कांड ने इस यात्रा को और प्रासंगिक बना दिया है। इस घटना में प्राथमिक विद्यालय नदवा के हेडमास्टर बृजेंद्र कुमार वर्मा ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अखिलेश प्रताप सिंह पर बेल्ट से हमला किया। इस घटना का कारण BSA द्वारा सहायक शिक्षिका अवंतिका की फर्जी हाजिरी दर्ज करने का दबाव बताया जा रहा है, जो कथित तौर पर स्कूल नहीं आ रही थीं। बृजेंद्र ने इस भ्रष्टाचार का विरोध किया, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया।
इस घटना ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और दबाव की संस्कृति को उजागर किया। “एक कदम गांधी के साथ” यात्रा के आयोजकों ने इस कांड को एक उदाहरण के रूप में लिया है, जहां गांधीवादी सविनय अवज्ञा के सिद्धांतों को अपनाकर अन्याय का विरोध किया जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि बृजेंद्र का हिंसक कदम गलत था, लेकिन उनके द्वारा उठाया गया फर्जी हाजिरी का मुद्दा समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रतीक है। इस यात्रा के जरिए वे लोगों को अहिंसक तरीके से ऐसे मुद्दों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।
यात्रा का स्वरूप और गतिविधियां
“एक कदम गांधी के साथ” यात्रा की शुरुआत सीतापुर के नदवा गांव से होने की योजना है, जहां यह कांड हुआ। यह यात्रा जिले के विभिन्न गांवों और कस्बों से होती हुई लखनऊ तक जाएगी। यात्रा का स्वरूप गांधी की दांडी नमक सत्याग्रह यात्रा से प्रेरित है, जिसमें लोग पैदल मार्च करेंगे और रास्ते में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। प्रमुख गतिविधियां निम्नलिखित हैं:
- जनजागरूकता सभाएं: गांवों में सभाएं आयोजित कर गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, फर्जी हाजिरी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
- स्वच्छता और शिक्षा अभियान : गांधी के स्वच्छता और शिक्षा के प्रति विचारों को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों और गांवों में सफाई अभियान और मुफ्त शिक्षा शिविर आयोजित किए जाएंगे।
- सविनय अवज्ञा की कार्यशालाएं : युवाओं और शिक्षकों को गांधीवादी सविनय अवज्ञा के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे प्रशासनिक दबाव का अहिंसक तरीके से विरोध कर सकें।
- प्रदर्शन और नाटक : गांधी के जीवन और उनके आंदोलनों पर आधारित नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बच्चों और ग्रामीणों का समर्थन
सीतापुर बेल्ट कांड के बाद नदवा प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने अपने हेडमास्टर बृजेंद्र वर्मा के समर्थन में स्कूल गेट पर प्रदर्शन शुरू किया है। उनका कहना है कि वे अपने “सर” के बिना पढ़ाई नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने भी बृजेंद्र का समर्थन किया, यह दावा करते हुए कि वे समय पर स्कूल आते थे और बच्चों के बीच लोकप्रिय थे। इस समर्थन को देखते हुए यात्रा के आयोजकों ने बच्चों और ग्रामीणों को अपने अभियान में शामिल करने का फैसला किया है।
आयोजकों का कहना है कि यह समर्थन गांधीवादी विचारों की ताकत को दर्शाता है, जहां आम लोग अन्याय के खिलाफ एकजुट हो सकते हैं। वे बच्चों को गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित करते हुए उन्हें अहिंसक प्रतिरोध के महत्व को समझाने की योजना बना रहे हैं।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर “एक कदम गांधी के साथ” यात्रा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। X पर कई यूजर्स ने इस पहल की सराहना की है, इसे गांधीवादी विचारों को पुनर्जनन देने का एक सशक्त प्रयास बताया है। एक यूजर ने लिखा, “सीतापुर बेल्ट कांड ने दिखाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। गांधी का रास्ता ही हमें सही दिशा दे सकता है।”
हालांकि, कुछ यूजर्स ने बृजेंद्र की हिंसक प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि गांधीवादी तरीके हिंसा को कभी उचित नहीं ठहराते। एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “गांधी का रास्ता अहिंसा का है, लेकिन आज के समय में लोग इतने दबाव में हैं कि हिंसा की ओर बढ़ जाते हैं। यह यात्रा लोगों को सही रास्ता दिखा सकती है।”
गांधीवादी विचारों का आधुनिक संदर्भ
महात्मा गांधी ने अपने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों के जरिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी थी। उनकी दांडी नमक सत्याग्रह (12 मार्च 1930 – 6 अप्रैल 1930) ने नमक कानून जैसे अन्यायपूर्ण नियमों के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का उदाहरण प्रस्तुत किया था। इस यात्रा ने पूरे देश को एकजुट किया और ब्रिटिश शासन की नींव को हिलाकर रख दिया। “एक कदम गांधी के साथ” यात्रा भी उसी भावना को पुनर्जनन देने का प्रयास है, जहां लोग अहिंसक तरीके से भ्रष्टाचार और दबाव के खिलाफ लड़ सकते हैं।
आयोजकों का कहना है कि आज के समय में, जब प्रशासनिक भ्रष्टाचार और तानाशाही प्रवृत्तियां समाज को कमजोर कर रही हैं, गांधी के विचार ही लोगों को सशक्त बना सकते हैं। वे मानते हैं कि फर्जी हाजिरी जैसे मामले केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक समस्या है, जो पूरे सिस्टम में व्याप्त है।
चुनौतियां और भविष्य की दिशा
इस यात्रा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पहली चुनौती प्रशासनिक विरोध की है, क्योंकि बेल्ट कांड जैसे मामलों में प्रशासन ने कठोर कार्रवाई की है। दूसरी चुनौती जनता को अहिंसक प्रतिरोध के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि बृजेंद्र जैसे मामलों में हिंसा ने लोगों का ध्यान खींचा है। इसके बावजूद, आयोजक आशावादी हैं कि गांधी का रास्ता लोगों को एकजुट करेगा। आगे चलकर, इस यात्रा को पूरे उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में ले जाने की योजना है। आयोजक चाहते हैं कि यह अभियान एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले, जो गांधीवादी विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाए।










