Nitish Kumar Masterstroke For Bihar win: बिहार चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की राजनीतिक समझ और रणनीति को हराना आसान नहीं है। जिन नेताओं ने उन्हें “कमजोर” और “असहाय” बताने की कोशिश की, उन्हीं नीतीश ने ऐसा दांव चला कि पूरा सत्ता समीकरण बदल गया। बीजेपी (BJP) के साथ उनकी जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया—89 सीटें बीजेपी को और 85 सीटें जेडीयू (JDU) को मिलीं। दूसरी ओर तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की आरजेडी (RJD) चारों खाने चित हो गई और कांग्रेस (Congress) तो सिर्फ छह सीटों पर सिमट गई। लेकिन आखिर वो कौन-सा दांव था जिसने नीतीश की वापसी को “ऐतिहासिक जीत” में बदला? कैसे ‘Double M’ ने चुनावी मैदान में गेम-चेंजर की भूमिका निभाई?
नीतीश का राजनीतिक सफर और ‘Double M’ रणनीति/Nitish Kumar Masterstroke For Bihar win
नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की चुनावी रणनीति कोई एक दिन की योजना नहीं थी। इसकी जड़ें लगभग 20 साल पहले तक जाती हैं, जब वे 2005 में पहली बार बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री बने। तभी से उन्होंने आरजेडी (RJD) के ‘M’—मुस्लिम (Muslim) फैक्टर की काट के लिए अपना ‘M’—महिलाओं (Women) का वोटबैंक तैयार करना शुरू कर दिया था। इसी सोच के तहत उन्होंने लड़कियों को साइकिल योजना दी, फिर छात्राओं के लिए स्कॉलरशिप और बाद में पंचायतों व नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया। 2016 में शराबबंदी लागू कर उन्होंने ग्रामीण महिलाओं का एक बड़ा भरोसा अपने पक्ष में कर लिया। यह योजना विवादित जरूर रही, लेकिन महिलाओं के बीच इसकी लोकप्रियता कायम रही। धीरे-धीरे नीतीश का महिला समर्थन इतना मजबूत हो गया कि यह एक स्थायी वोटबैंक बन गया—जो 2025 के चुनाव में “गोल्डन कार्ड” साबित हुआ। ‘Double M’—महिलाएं और मुस्लिम वोटरों—पर नीतीश की यह लंबी रणनीति अंततः उनकी सबसे बड़ी चुनावी ताकत बनी।

चुनाव से पहले महिलाओं को 10,000 रुपये
चुनाव प्रचार के बीच नीतीश कुमार का सबसे निर्णायक कदम था—महिला रोजगार योजना के तहत परिवार की एक महिला के खाते में 10,000 रुपये भेजना। बीजेपी (BJP) ने कई राज्यों में प्रति माह या प्रति चरण ट्रांसफर किए थे, लेकिन नीतीश ने एक साथ 10,000 रुपये देकर एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव पैदा किया। यह रकम सिर्फ एक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए “आर्थिक सम्मान” के रूप में देखी गई। जब तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) महिलाओं को 30,000 रुपये देने का वादा कर रहे थे, तब भी महिलाओं ने नीतीश पर ज्यादा भरोसा किया। इसका कारण था नीतीश की वर्षों की महिला-केंद्रित नीतियां। नतीजा यह हुआ कि महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया और आरजेडी के पारंपरिक मुस्लिम व महिला वोटरों का बड़ा हिस्सा जेडीयू (JDU) के पक्ष में आ गया। ‘Double M’ में पहला M—Women—पूरी तरह नीतीश के साथ खड़ा हो गया।
आरजेडी को डबल झटका, मुस्लिम वोट भी फिसले
पहले माना जा रहा था कि आरजेडी (RJD) का मुस्लिम (Muslim) वोटबैंक स्थिर है, लेकिन 2025 का चुनाव इस धारणा को तोड़ गया। कई सीटों पर देखा गया कि आरजेडी का पारंपरिक M वोट (Muslim) टूटकर जेडीयू (JDU) की तरफ गया। वजह थीं- स्थानीय उम्मीदवारों की नाराजगी, महागठबंधन की कमजोर संगठन क्षमता और नीतीश की जमीनी कार्यशैली। मुसलमानों के बीच नीतीश कुमार की सॉफ्ट छवि और भाजपा (BJP) के साथ भी उनकी “मॉडरेट भूमिका” को लेकर कुछ क्षेत्रों में रुझान बदला। इस तरह आरजेडी को दोहरा झटका लगा—महिलाएं भी खिसकती गईं और मुसलमानों का एक हिस्सा भी उधर खिंच गया। कांग्रेस (Congress) की हालत तो और खराब रही—सिर्फ छह सीटें। महागठबंधन का पूरा वोट समीकरण नीतीश के ‘Double M’ दांव के आगे धराशायी हो गया। तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की रणनीति इस बदलाव को पकड़ नहीं पाई।
NDA की सीटों का गणित और विपक्ष की ऐतिहासिक हार
नतीजों में एनडीए (NDA) ने शानदार बढ़त हासिल की—बीजेपी (BJP) 89 और जेडीयू (JDU) 85 सीटों पर जीती। उधर आरजेडी (RJD) मात्र 25 सीटों पर सिमट गई। चिराग पासवान (Chirag Paswan) की पार्टी एलजेपी (LJP) ने 19 सीटें जीतीं, जबकि जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की पार्टी ने 5 और उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की पार्टी ने 4 सीटें जीतीं। कांग्रेस (Congress) का सबसे बुरा प्रदर्शन रहा—सिर्फ 6 सीटें। लेफ्ट पार्टियों का लगभग सफाया हो गया। एआईएमआईएम (AIMIM) ने अपना पिछला प्रदर्शन दोहराया। यह परिणाम साफ दिखाते हैं कि नीतीश कुमार की रणनीति वोटरों तक स्पष्ट संदेश दे पाने में सफल रही और तेजस्वी यादव की “युवा सीएम” की छवि चुनावी जमीन पर असर नहीं छोड़ सकी। NDA की यह जीत महज गठबंधन की ताकत नहीं, बल्कि नीतीश की लंबे समय की राजनीतिक इंजीनियरिंग का नतीजा है।










