ECCE Educator Recruitment 2025 : उत्तर प्रदेश के ‘वीवीआईपी’ जनपद रायबरेली में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा ECCE (Early Childhood Care and Education) कार्यक्रम के तहत बाल वाटिका (Bal Vatika) के लिए एजुकेटरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। जिला प्रशासन की कथित लापरवाही और अकर्मण्यता के कारण यहां भर्ती का विज्ञापन तक जारी नहीं किया गया है, जिससे सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी शिक्षा विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित हो रहे हैं। वहीं, पड़ोसी जनपद प्रयागराज में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत 287 ECCE (Early Childhood Care and Education) एजुकेटरों और एलबीडी (लर्निंग ब्रेकथ्रू डिजाइन) इंस्ट्रक्टरों के नियुक्ति पत्र वितरित कर दिए गए हैं। यह विरोधाभास न केवल स्थानीय स्तर पर असंतोष पैदा कर रहा है, बल्कि राज्य सरकार की ‘नई शिक्षा नीति’ (NEP 2020) के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
रायबरेली में भर्ती प्रक्रिया का ‘शून्य’ स्तर

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जुलाई 2025 में जारी की गई ECCE (Early Childhood Care and Education) एजुकेटर भर्ती अधिसूचना के तहत पूरे राज्य में 8,800 पदों पर भर्ती की घोषणा की गई थी। इसमें रायबरेली जिले के लिए 210 रिक्तियां निर्धारित हैं, जो प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं (बाल वाटिका) के लिए हैं। हालांकि, जिला रायबरेली की आधिकारिक वेबसाइट raebareli.nic.in पर भर्ती से संबंधित कोई भी नोटिस या विज्ञापन उपलब्ध नहीं है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने अभी तक सेवायोजन पोर्टल sewayojan.up.nic.in पर आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं की है, जबकि अन्य जिलों में मेरिट लिस्ट जारी हो चुकी हैं और दस्तावेज सत्यापन DV भी पूरा हो गया है।
स्थानीय अभ्यर्थी संगठनों ने इस देरी को ‘प्रशासनिक उदासीनता’ करार दिया है। रायबरेली TET/CTET क्वालीफाइड अभ्यर्थी संघ के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ने बताया, “यह जनपद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का कर्मभूमि रहा है, लेकिन यहां के अधिकारी इतने लापरवाह हैं कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा का मामला भी लटक गया। हमने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।” अभ्यर्थियों का कहना है कि देरी के कारण वे अन्य जिलों की भर्ती में आवेदन नहीं कर पा रहे, क्योंकि प्रत्येक जिला के लिए अलग-अलग आवेदन आवश्यक है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ECCE (Early Childhood Care and Education) कार्यक्रम का उद्देश्य 3-6 वर्ष के बच्चों को खेल-आधारित शिक्षा प्रदान करना है, जो आंगनबाड़ी केंद्रों को बाल वाटिका में परिवर्तित करने से जुड़ा है। रायबरेली जैसे ग्रामीण-प्रधान जिले में यह देरी गरीब परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित कर रही है। जिला प्रशासन ने जब इस पर टिप्पणी मांगी गई, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हालांकि, अनौपचारिक रूप से अधिकारियों ने ‘तकनीकी कारणों’ का हवाला दिया, लेकिन कोई समयसीमा नहीं बताई।
प्रयागराज में तेजी से चली भर्ती, 287 नियुक्ति पत्र वितरित
इसके विपरीत, प्रयागराज जिले में ECCE (Early Childhood Care and Education) भर्ती प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत यहां 287 ECCE (Early Childhood Care and Education) एजुकेटरों और एलबीडी इंस्ट्रक्टरों के चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित कर दिए जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी नवीनतम सूचना के अनुसार, यह वितरण आज (15 नवंबर) से शुरू हो गया है, और सभी चयनित अभ्यर्थियों को निर्देश दिया गया है कि वे नियुक्ति पत्र के नाम पर किसी भी प्रकार का भुगतान न करें।
प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अनुराग पटेल ने बताया, “हमने ऑनलाइन आवेदनों की मेरिट लिस्ट तैयार कर DV पूरा किया, और अब उम्मीदवार जल्द ही बाल वाटिकाओं में जॉइनिंग करेंगे। यह NEP के अनुरूप 3-6 वर्ष के बच्चों की शिक्षा को मजबूत करेगा।” जिले में कुल 300 से अधिक रिक्तियां थीं, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए हैं। चयनित अभ्यर्थियों में महिलाओं की संख्या अधिक है, जो कार्यक्रम की सफलता का संकेत है। एक चयनित एजुकेटर ने कहा, “प्रयागराज प्रशासन की सक्रियता से हमें जल्द नौकरी मिल गई, अब हम बच्चों को रचनात्मक शिक्षा दे सकेंगे।”
राज्य स्तर पर ECCE भर्ती का परिदृश्य
उत्तर प्रदेश में ECCE (Early Childhood Care and Education) एजुकेटर भर्ती 2025 की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चल रही है। अपर मुख्य सचिव के आदेश पर 41 जिलों में आवेदन प्रक्रिया चल रही है, जबकि 14 जिलों में DV और मेरिट लिस्ट जारी हो चुकी है। कुल 8,800 पदों में से कई जिलों (जैसे आजमगढ़, बहराइच) में भर्ती रद्द या स्थगित होने की खबरें भी आई हैं, लेकिन रायबरेली का मामला अलग है—यहां प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि राज्य स्तर पर 10,684 पदों की अतिरिक्त भर्ती भी प्रस्तावित है, लेकिन जिला स्तर की असमानता योजना को कमजोर कर रही है।
अभ्यर्थी संगठनों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि सभी जिलों में एकसमान प्रक्रिया हो। यदि रायबरेली में जल्द विज्ञापन जारी नहीं हुआ, तो कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह मुद्दा न केवल स्थानीय शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा रहा है।










