BJP Bihar Speaker Post: बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्ता का खेल तेज हो गया है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद एनडीए गठबंधन ने सरकार तो बना ली, लेकिन अब अंदरूनी खींचतान ने सबको चौंका दिया है। बीजेपी ने न सिर्फ गृह विभाग पर कब्जा जमा लिया, जो पिछले 20 सालों से नीतीश कुमार के कब्जे में था, बल्कि विधानसभा स्पीकर का महत्वपूर्ण पद भी अपने नाम कर लिया। नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को यह फैसला भारी पड़ा है। सोमवार को विधानसभा का पहला सत्र शुरू होते ही बीजेपी के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार ने स्पीकर पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। यह खबर बिहार के सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्या यह गठबंधन की मजबूती का संकेत है या फिर नीतीश कुमार के लिए झटका? आइए, इसकी पूरी कहानी समझते हैं।
गृह विभाग का सफर,20 साल पुराना इतिहास पलटा/BJP Bihar Speaker Post
बिहार में गृह विभाग को हमेशा सत्ता का सबसे मजबूत हथियार माना जाता रहा है। 2005 से लेकर अब तक, जब-जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, उन्होंने इस विभाग को अपने पास ही रखा। चाहे सुशील कुमार मोदी जैसे मजबूत डिप्टी सीएम रहे हों या फिर तेजस्वी यादव के साथ गठबंधन, गृह विभाग नीतीश का निजी किला था। लेकिन 2025 के चुनावों में बीजेपी की जबरदस्त जीत ने सब कुछ बदल दिया। 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को 89 सीटें मिलीं, जो जेडीयू की 85 से ज्यादा हैं। इस ताकत के बल पर बीजेपी ने गृह विभाग की मांग की और नीतीश को मानना पड़ा।

अब इस विभाग की कमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी संभाल रहे हैं। सम्राट चौधरी, जो बिहार बीजेपी के संगठन महामंत्री रह चुके हैं, को यह जिम्मेदारी मिलना पार्टी के लिए बड़ी जीत है। गृह विभाग के तहत पुलिस, कानून-व्यवस्था, जेल और आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील क्षेत्र आते हैं। बीजेपी का दावा है कि इससे राज्य में कानून का राज मजबूत होगा। लेकिन जेडीयू के नेताओं का कहना है कि यह विभाग नीतीश की निजी पसंद था, और इसे छोड़ना उनके लिए भावनात्मक झटका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव गठबंधन में बीजेपी की बढ़ती ताकत को दिखाता है। चुनाव से पहले जहां नीतीश को ‘सबका मालिक’ कहा जाता था, अब सत्ता का संतुलन बीजेपी की तरफ झुक गया है।
स्पीकर पद की जंग,प्रेम कुमार का नामांकन और बीजेपी की रणनीति
गृह विभाग के बाद बीजेपी की नजर स्पीकर पद पर थी, और सोमवार को यह तय हो गया। गया सदर से नौ बार विधायक बने प्रेम कुमार ने नामांकन दाखिल किया। प्रेम कुमार पूर्व मंत्री रह चुके हैं और बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं। नामांकन के दौरान डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी भी मौजूद थे, जो बीजेपी की एकजुटता दिखाता है। एनडीए में पहले से सहमति थी कि स्पीकर पद बीजेपी को मिलेगा, जबकि डिप्टी स्पीकर जेडीयू के खाते में जाएगा। विपक्ष के पास महज 35 विधायक हैं, इसलिए प्रेम कुमार का चुना जाना लगभग तय है। मंगलवार को प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव के नेतृत्व में चुनाव होगा।
यह पद क्यों महत्वपूर्ण है? स्पीकर विधानसभा की कार्यवाही चलाता है, विधेयकों को मंजूरी देता है और सदन की गरिमा बनाए रखता है। पिछले कार्यकाल में 2020 और 2024 में भी स्पीकर बीजेपी के पास ही था – पहले विजय कुमार सिन्हा, फिर नंद किशोर यादव। लेकिन इस बार गृह विभाग के साथ स्पीकर मिलना बीजेपी के लिए डबल धमाका है। पार्टी इसे ‘ऐतिहासिक जीत’ बता रही है। प्रेम कुमार ने नामांकन के बाद कहा, “मैं पार्टी नेतृत्व और सहयोगी दलों के प्रति आभारी हूं। सदन को सुचारू रूप से चलाने का पूरा प्रयास करूंगा।” लेकिन सवाल यह है कि क्या यह फैसला गठबंधन को मजबूत करेगा या दरार पैदा करेगा?
जेडीयू की प्रतिक्रिया, चुप्पी या रणनीतिक सफाई?
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने इस पूरे मामले पर क्या कहा? शुरुआत में खींचतान दिखी। गृह विभाग पर जेडीयू अड़ी रही, लेकिन आखिरकार सहमति बनी। स्पीकर पद को लेकर जेडीयू ने तर्क दिया कि विधान परिषद के स्पीकर अवधेश नारायण सिंह पहले से बीजेपी के हैं, इसलिए विधानसभा में भी बीजेपी का कब्जा होने से पावर बैलेंस बिगड़ेगा। जेडीयू का कहना था कि गठबंधन में संतुलन जरूरी है। लेकिन अंत में पार्टी ने चुप्पी साध ली। जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम गठबंधन धर्म निभाएंगे। स्पीकर बीजेपी को मिला, लेकिन डिप्टी स्पीकर पर हमारा हक है। नीतीश जी विकास पर फोकस करेंगे।”
नीतीश कुमार ने खुद कैबिनेट की पहली बैठक में कहा, “एनडीए की एकता बिहार के हित में है। हम सब मिलकर राज्य को आगे ले जाएंगे।” लेकिन अंदरखाने में असंतोष की खबरें हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेडीयू को लगता है कि बीजेपी ने शर्तों पर शर्तें थोप दी हैं। 2024 के चुनावों में नीतीश की तीसरी बार सरकार बनाने की भूमिका थी, लेकिन 2025 में बीजेपी की सीटें बढ़ने से समीकरण बदल गया। जेडीयू के समर्थक सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह ‘नीतीश का अपमान’ है? पार्टी ने आधिकारिक बयान में कहा, “सभी फैसले आपसी सहमति से हुए हैं। हम बीजेपी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।” लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जेडीयू अब डिप्टी स्पीकर और अन्य छोटे पदों पर फोकस करेगी।
सियासी निहितार्थ,गठबंधन की मजबूती या नई चुनौतियां?
यह घटनाक्रम बिहार की सियासत को कई सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया है। बीजेपी की बढ़ती ताकत से एनडीए मजबूत तो दिख रहा है, लेकिन जेडीयू की नाराजगी भविष्य में समस्या पैदा कर सकती है। विपक्ष, खासकर आरजेडी, इसे ‘बीजेपी का वर्चस्व’ बता रहा है। तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, “नीतीश जी अब नाममात्र के सीएम हैं। असली ताकत दिल्ली से आ रही है।” लेकिन एनडीए के छोटे सहयोगी जैसे लोजपा (राम विलास) और हम, जो अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं, चुप हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव बिहार में विकास को गति देगा। गृह विभाग बीजेपी के पास होने से कानून-व्यवस्था पर सख्ती बढ़ेगी, और स्पीकर प्रेम कुमार जैसे अनुभवी नेता सदन को बेहतर चला सकेंगे। लेकिन नीतीश की पार्टी के लिए यह सबक है कि गठबंधन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। भविष्य में अगर लोकसभा चुनाव आए, तो यह समीकरण फिर परीक्षा लेगा। फिलहाल, बिहार की जनता को उम्मीद है कि सियासत की इस जंग से विकास के रास्ते खुले रहें।
निष्कर्ष
बिहार में बीजेपी का गृह विभाग और स्पीकर पद पर कब्जा एक नई शुरुआत का संकेत है। नीतीश कुमार की पार्टी ने इसे स्वीकार कर गठबंधन को बचाया, लेकिन अंदरूनी असंतोष छिपा नहीं। जेडीयू ने कहा है कि एकता बरकरार रहेगी, लेकिन वक्त ही बताएगा कि यह सियासी दांव-पेंच कितना कामयाब होता है। बिहार जैसे राज्य में जहां जाति और गठबंधन की राजनीति हावी है, ऐसी घटनाएं सामान्य हैं। आखिरकार, जनता का फायदा ही असली मापदंड है। क्या यह कदम बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा? यह सवाल बिहारवासियों के मन में कौंध रहा है।










