Operation Sagar Bandhu : चक्रवात ‘दितवाह’ ( Cyclone Ditvah ) ने श्रीलंका को भारी तबाही मचाई है, जहां बाढ़ और भूस्खलन से 410 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, 336 लोग लापता हैं और 14 लाख से ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इस संकट के बीच भारत ने ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ ( Operation Sagar Bandhu ) के तहत श्रीलंका को अब तक का सबसे बड़ा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) मिशन शुरू किया है। आगरा के एयर फोर्स स्टेशन से रवाना हुए सी-17 ग्लोबमास्टर विमान ने मंगलवार शाम कोलंबो पहुंचकर 73 मेडिकल स्टाफ के साथ पैराफील्ड हॉस्पिटल स्थापित की, जबकि एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने 8 टन से अधिक राहत सामग्री पहुंचाई और 65 से ज्यादा लोगों को एयरलिफ्ट कर बचाया। यह मिशन भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का जीता-जागता उदाहरण है।
चक्रवात ‘दितवाह’ की भयंकर तबाही: मौतें, बाढ़ और भूस्खलन का कहर

उत्तर हिंद महासागर चक्रवात मौसम के चौथे चक्रवात ‘दितवाह’ ( Cyclone Ditvah ) ने 26 नवंबर को श्रीलंका के दक्षिण-पूर्वी तट पर लैंडफॉल किया। यमन द्वारा नामित इस चक्रवात ने भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलनों का तांडव मचाया, जो 2000 के दशक के बाद श्रीलंका का सबसे बड़ा प्राकृतिक आपदा है। डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (डीएमसी) के अनुसार, मंगलवार तक मौतों की संख्या 410 पहुंच गई, जिसमें कैंडी (Kandy) जिले में 88 और बडुल्ला में 83 मौतें शामिल हैं। 336 लोग अभी भी लापता हैं, जबकि 25 जिलों में 14 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।
श्रीलंका के एक तिहाई हिस्से में बिजली और पीने का पानी आपूर्ति बाधित हो गई है। कोलंबो के बाहरी इलाकों में गंभीर बाढ़ ने हजारों घरों को पानी में डुबो दिया, जबकि मध्य प्रदेश के कैंडी (Kandy) और नुवारा एलिया जैसे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन ने सड़कें और पुल नष्ट कर दिए। सबसे प्रभावित क्षेत्र जैसे कोटमाले, पोरोमाडुल्ला और गंपाहा अभी भी जलमग्न हैं, जहां मुख्य सड़कें पानी से लबालब हैं। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिस्सनायके ने आपातकाल घोषित कर 25,000 से अधिक सैनिकों को राहत कार्यों में लगाया है, लेकिन स्थानीय संसाधनों की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई गई। संयुक्त राष्ट्र ने इसे ‘दशकों की सबसे खराब बाढ़ आपदा’ करार दिया है।
भारत की तत्परता: ऑपरेशन सागर बंधु के तहत तेज राहत अभियान

भारत ने 28 नवंबर को ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ ( Operation Sagar Bandhu ) शुरू कर श्रीलंका को तत्काल सहायता पहुंचानी शुरू कर दी। विदेश मंत्रालय ने इसे ‘हमारे सबसे करीबी समुद्री पड़ोसी’ के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ भूमिका बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को श्रीलंकाई राष्ट्रपति से फोन पर बात कर शोक व्यक्त किया और निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।
- आगरा से सी-17 का ऐतिहासिक सफर : मंगलवार को आगरा एयर फोर्स स्टेशन से रवाना हुए आईएएफ के भारी लिफ्ट वाले सी-17 ग्लोबमास्टर विमान ने शाम 5:45 बजे कोलंबो पहुंचकर एक पूर्ण पैराफील्ड हॉस्पिटल स्थापित किया। इसमें 73 मेडिकल प्रोफेशनल्स, चिकित्सा उपकरण और दवाएं शामिल हैं। यह हॉस्पिटल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान करेगा, खासकर गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए। भारतीय उच्चायोग ने इसे ‘क्रिटिकल रिलीफ’ का हिस्सा बताया।
- हेलीकॉप्टरों से 8 टन राहत सामग्री : आईएएफ के एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने कandy जिले के पोरोमाडुल्ला और नुवारा एलिया में 8 टन से अधिक राहत सामग्री पहुंचाई, जिसमें टेंट, तिरपाल, कंबल, स्वच्छता किट, रेडी-टू-ईट मील और दवाएं शामिल हैं। इन हेलीकॉप्टरों ने आइसोलेटेड क्षेत्रों में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए।
- 65 लोगों का नाटकीय बचाव : एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने 65 से अधिक लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इनमें विदेशी नागरिक, गंभीर हृदय रोगी और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। कोटमाले क्षेत्र में भूस्खलन से कटे हुए लोगों को बचाने के लिए विशेष ऑपरेशन चलाए गए। कुल मिलाकर, ऑपरेशन में 50 से ज्यादा लोगों को 10 विभिन्न राष्ट्रीयताओं से बचाया गया।

इसके अलावा, आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि जैसे नौसैनिक जहाजों ने अतिरिक्त राहत सामग्री पहुंचाई, जबकि सी-130जे विमानों ने 53 टन आपूर्ति भेजी। बीएचआईएसएचएम मेडिकल क्यूब्स ने घायलों को तत्काल उपचार दिया। भारतीय सेना ने ‘शत्रुजीत ब्रिगेड’ से एकीकृत टास्क फोर्स तैनात की, जिसमें इंजीनियरिंग, सिग्नल्स और मेडिकल टीमें शामिल हैं, जो आवश्यक सेवाओं को बहाल करने में जुटी हैं।
आगरा स्टेशन का महत्वपूर्ण योगदान: लगातार मदद का केंद्र

आगरा एयर फोर्स स्टेशन इस मिशन का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां से न केवल पैराफील्ड हॉस्पिटल रवाना हुआ, बल्कि लगातार उड़ानें भेजी जा रही हैं। एनडीआरएफ की भूस्खलन विशेषज्ञ टीमें भी आगरा से समन्वय में कोलंबो पहुंचीं, जो बडुल्ला जिले में काम कर रही हैं। भारतीय उच्चायोग के आयुक्त संतोष झा ने खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की।
श्रीलंका की प्रतिक्रिया: भारत का आभार
श्रीलंकाई उप-मंत्री रुवान रनासिंहे ने भारत और एनडीआरएफ का धन्यवाद दिया। राष्ट्रपति डिस्सनायके ने एक फंड की घोषणा की है, जिसमें भारत की सहायता महत्वपूर्ण होगी। ऑपरेशन सागर बंधु ने भारत-श्रीलंका संबंधों को मजबूत किया है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर आधारित है।
राहत कार्य तेज हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों में अभी भी चुनौतियां बाकी हैं। भारत प्रतिबद्ध है कि श्रीलंका का हर नागरिक सुरक्षित हो। यह मिशन न केवल मानवीय सहायता है, बल्कि क्षेत्रीय एकजुटता का प्रतीक भी।










