ईरान को पाकिस्तान पर क्यों नहीं भरोसा? सांसद के बयान से बढ़ा विवाद

मध्यस्थ बनने चला पाकिस्तान, लेकिन ईरान ने बताया ‘अविश्वसनीय’

भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इस समय अमेरिका-ईरान तनाव पर नजर बनाए हुए है। इसी बीच पाकिस्तान ने खुद को दोनों देशों के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की, लेकिन अब ईरान ने इस भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई के बयान ने इस पूरे मामले को और गरमा दिया है।

ईरान ने पाकिस्तान पर क्यों उठाए सवाल?

ईरान के सांसद इब्राहिम रेजाई ने साफ तौर पर कहा है कि पाकिस्तान एक अच्छा पड़ोसी जरूर है, लेकिन वह बातचीत के लिए भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं है। उनका कहना है कि पाकिस्तान अक्सर अमेरिका के हितों को ध्यान में रखता है और स्वतंत्र रूप से फैसला नहीं लेता। रेजाई के इस बयान से यह साफ हो गया कि ईरान को पाकिस्तान की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। यही वजह है कि वह उसे अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए सही विकल्प नहीं मानता।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका

दरअसल, 2026 में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश किया। उसने दोनों देशों के बीच बातचीत करवाने की कोशिश भी की और इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी करने की योजना बनाई। पाकिस्तान का मानना था कि उसके दोनों देशों से अच्छे संबंध हैं, इसलिए वह शांति वार्ता में अहम भूमिका निभा सकता है। लेकिन हालात इतने आसान नहीं दिख रहे हैं।

‘अमेरिका के करीब होने’ पर शक

ईरान का सबसे बड़ा आरोप यही है कि पाकिस्तान अमेरिका के ज्यादा करीब है। इसी वजह से वह निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं बन सकता। ईरानी सांसद ने कहा कि पाकिस्तान कई बार ऐसे फैसले लेता है जो अमेरिका के हितों के अनुसार होते हैं। ऐसे में वह ईरान के लिए भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि ईरान ने खुले तौर पर पाकिस्तान की मध्यस्थता को खारिज कर दिया।

पाकिस्तान ने क्यों बहाया ‘पानी की तरह पैसा’?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में अपनी भूमिका मजबूत दिखाने के लिए काफी संसाधन लगाए। उसने बातचीत की तैयारी, कूटनीतिक गतिविधियों और बैठकों पर भारी खर्च किया। लेकिन इसके बावजूद उसे वह भरोसा नहीं मिल पाया जिसकी उसे उम्मीद थी। ईरान के इस बयान से पाकिस्तान की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।

क्या है दोनों देशों के बीच असली तनाव?

हालांकि पाकिस्तान और ईरान के संबंध सामान्य तौर पर अच्छे माने जाते हैं, लेकिन हाल के समय में कुछ मुद्दों को लेकर तनाव भी देखने को मिला है। ईरान चाहता है कि जो भी देश मध्यस्थ बने, वह पूरी तरह निष्पक्ष हो। वहीं पाकिस्तान एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उसके अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देशों से भी रिश्ते हैं। इसी संतुलन की राजनीति ने पाकिस्तान की स्थिति को थोड़ा कमजोर कर दिया है।

क्या आगे बढ़ पाएगी शांति वार्ता?

अभी के हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कब और कैसे आगे बढ़ेगी। हालांकि पाकिस्तान कोशिश कर रहा है कि बातचीत जारी रहे, लेकिन ईरान के इस रुख के बाद उसकी भूमिका सीमित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच विश्वास नहीं बना, तो शांति वार्ता आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।

वैश्विक स्तर पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है, खासकर तेल बाजार और मध्य पूर्व की स्थिरता पर।

निष्कर्ष

पाकिस्तान ने भले ही अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश की हो, लेकिन ईरान के ताजा बयान ने उसकी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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