Uncle Grabs Nephew Land In Raebareli: चाचा की दबंगई ,भतीजे की पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा, प्रशासन मौन

Uncle Grabs Nephew Land in Raebareli: अपनों का ही दुश्मन,चाचा ने भतीजे को जमीन से बेदखल किया, प्रशासन तमाशाई

Uncle Grabs Nephew Land In Raebareli: योगी सरकार दिन-रात ये दावा करती है कि उत्तर प्रदेश में अब गुंडे-माफिया और दबंगों का राज खत्म हो गया है, कानून का राज चल रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। सरेनी थाना क्षेत्र के गांव बघेलन मजरे पहुरी में एक भतीजा पिछले कई सालों से अपने ही चाचा की दबंगई का शिकार है। चाचा ने भतीजे की हिस्सेदारी वाली पुश्तैनी जमीन पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया है और उसे जोत-बो भी नहीं करने दे रहा। ऊपर से धमकी दे रहा है कि “जमीन पर मैंने लोन ले रखा है,

पहले कर्ज चुकता करो, फिर हिस्सा मांगना/Uncle Grabs Nephew Land in Raebareli

पीड़ित भतीजा जितेंद्र बहादुर सिंह (उम्र करीब 35 साल) ने बताया कि उनका पूरा परिवार पहले एक साथ रहता था। उनके पिता स्व. नरेंद्र बहादुर सिंह और चाचा स्व. राम सिंह के पुत्र वीरेंद्र बहादुर सिंह सगे भाई थे। पुरानी खतौनी में दोनों भाइयों के नाम दर्ज थे। बंटवारा नहीं हुआ था, इसलिए अब जितेंद्र और उनके चाचा वीरेंद्र सिंह सहखातेदार (co-sharer) हैं। यानी जमीन का आधा-आधा हक दोनों का है।

जितेंद्र कहते हैं, चाचाजी ने कभी बंटवारा करने की बात पर गौर नहीं किया।सालों से मेरे हिस्से की जमीन पर खुद फसल उगा रहे हैं। जब मैं खेत में फसल बोने जाता हूं तो गाली-गलौज करके, धमकाकर भगा देते हैं। कई बार तो हाथापाई की नौबत आ चुकी है।

लोन भी चाचा ने लिया, भुगतान भतीजे से मांगा जा रहा

सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि वीरेंद्र सिंह ने इसी जमीन को गिरवी रखकर बैंक से मोटा कर्ज (लोन) ले रखा है। लोन की सारी रकम चाचा ने खुद खर्च की, लेकिन अब जितेंद्र पर दबाव डाल रहे हैं कि “आधा लोन तू भरेगा, तभी जमीन का हिस्सा दूंगा।” जितेंद्र पूछता है, “जब लोन आपने लिया, पैसा आपने खाया, तो मुझे क्यों ब्लैकमेल कर रहे हैं?”

पुलिस-प्रशासन के चक्कर, न्याय नहीं मिला

परेशान होकर जितेंद्र बहादुर सिंह ने सबसे पहले सरेनी थाने में शिकायत की। वहां तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की। फिर वो लालगंज तहसील पहुंचे और एसडीएम लालगंज को लिखित प्रार्थना-पत्र दिया। उसमें सारी बातें लिखीं – सहखातेदार होने का सबूत, चाचा द्वारा मारपीट-धमकी, जबरन कब्जा और लोन का पूरा ब्यौरा।

जितेंद्र बताते हैं, एसडीएम साहब ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों को जांच के लिए भेजा था। लेखपाल और नायब तहसीलदार गांव आए भी, नाप-जोख की, लेकिन रिपोर्ट आज तक नहीं आई। कई महीने बीत गए, कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गांव में चर्चा, लोग प्रशासन पर उठा रहे सवाल

बघेलन मजरे पहुरी गांव में इस मामले की खूब चर्चा है। ग्रामीण बताते हैं कि वीरेंद्र सिंह इलाके में दबंग माने जाते हैं। उनके रसूख की वजह से कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं, लेकिन चुपके-चुपके सब यही कहते हैं कि “योगी जी का बुलडोजर तो बड़े-बड़े माफियाओं पर चलता है, छोटे-छोटे गांव के दबंगों पर क्यों नहीं चलता?”

एक बुजुर्ग ग्रामीण (नाम नहीं छापने की शर्त पर) बोले, “ये तो अपने घर का मामला है, लेकिन जब चाचा ही भतीजे की जमीन हड़प रहा हो और प्रशासन मूकदर्शक बना हो, तो आम आदमी कहां जाए? कानून-व्यवस्था का ढोल तो बहुत पीटा जाता है, पर यहां तो सन्नाटा है।”

भतीजा अब भी उम्मीद लगाए बैठा है

जितेंद्र बहादुर सिंह आज भी अपने कागजों का फाइल लेकर इधर-उधर चक्कर काट रहा है। उसका कहना है, “मेरे पास कोई और जमीन नहीं है। खेती ही से घर चलता है। चाचा ने सब छीन लिया। मैं सिर्फ अपना हक मांग रहा हूं। अगर प्रशासन ने भी साथ नहीं दिया तो हम जैसे गरीब कहां जाएं?”

आज की तारीख तक न तो जमीन का बंटवारा हुआ, न चाचा पर कोई कानूनी कार्रवाई। सरेनी पुलिस और लालगंज तहसील के अफसरान मौन हैं। इधर एक परिवार बंट गया, एक नौजवान अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते थक चुका है।

सरेनी जैसे छोटे थाना क्षेत्र से निकली ये खबर एक बार फिर सवाल उठाती है कि क्या यूपी में सचमुच “कानून का राज” आ गया है या सिर्फ बड़े-बड़े दावे और विज्ञापन हैं

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