USA Reaction On Putin India Visit: पुतिन की भारत यात्रा पर अमेरिका नाराज, जयशंकर ने भी दिया है दो टूक संदेश

USA Reaction On Putin India Visit: ‘भारत-रूस रिश्तों पर किसी को वीटो का हक नहीं’, जयशंकर का बड़ा बयान

USA Reaction On Putin India Visit: रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) की हालिया भारत (India) यात्रा ने वैश्विक कूटनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। दो दिवसीय इस दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन इसी के साथ यह संकेत भी मिले कि अमेरिका (United States) इस बढ़ती नजदीकी से संतुष्ट नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। ऐसे माहौल में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) का बयान सामने आया, जिसने पूरी बहस की दिशा ही बदल दी। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि भारत के रिश्तों पर किसी बाहरी देश का वीटो नहीं चल सकता। आखिर यह बयान कितना बड़ा संदेश है और इसके क्या मायने हैं? तो चलिए जानते हैं…

पुतिन की भारत यात्रा और वैश्विक सियासी हलचल/USA Reaction On Putin India Visit

रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) गुरुवार और शुक्रवार को भारत (India) की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक दबावों के बावजूद उनकी दोस्ती और सहयोग पहले से अधिक मजबूत है। हालांकि, इस दौरे के बाद पश्चिमी देशों, खासतौर पर अमेरिका (United States), में बेचैनी देखी गई। यूक्रेन युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंधों के चलते अमेरिका पहले से ही वैश्विक मोर्चे पर रूस को अलग-थलग करने की कोशिश में है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश के साथ रूस की नजदीकी अमेरिका को असहज कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में पुतिन की यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनते दिखे।

जयशंकर का अमेरिका को सीधा संदेश

एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि “किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह दूसरे देश के साथ भारत के रिश्तों पर वीटो लगाए।” उनका यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका (United States) की नाराजगी की ओर इशारा माना जा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि जियोपॉलिटिक्स में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन भारत और रूस के रिश्ते बीते 70-80 वर्षों से सबसे बड़े और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों में रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस के रिश्तों में चीन, यूरोप और अन्य देशों के साथ भी समय-समय पर बदलाव आते रहे हैं, वैसे ही भारत के भी अन्य देशों से रिश्तों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं। यह बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की स्पष्ट झलक माना जा रहा है।

अमेरिका की नाराजगी पर जयशंकर की प्रतिक्रिया

जब जयशंकर से यह पूछा गया कि क्या पुतिन के इस हाई-लेवल दौरे से अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों में तनाव आएगा, तो उन्होंने बेहद संतुलित लेकिन सख्त जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे पुतिन या भारत-रूस संबंधों के “निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए पश्चिमी प्रेस के पास नहीं जाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि विश्व राजनीति केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों से संचालित होती है। भारत अपने फैसले किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने सामरिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लेता है। जयशंकर के इस बयान को कूटनीतिक भाषा में अमेरिका को यह संदेश माना जा रहा है कि भारत किसी भी गुट की राजनीति में बंधकर नहीं चलेगा और अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखेगा।

भारत अपने हितों पर रहेगा अडिग

विदेश मंत्री जयशंकर (S. Jaishankar) ने दो टूक कहा कि भारत को अपने फायदे के लिए खड़ा रहना होगा और किसी भी देश की कूटनीति का मकसद किसी और को खुश करना नहीं होता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका (United States) के साथ बातचीत में कोई कमी नहीं है और भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी जल्द पूरी होने की संभावना है। इस बयान से साफ है कि भारत एक तरफ रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी भी जारी रखना उसकी प्राथमिकता है। मौजूदा हालात में भारत संतुलन की कूटनीति पर आगे बढ़ता दिख रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह त्रिकोण भारत, रूस और अमेरिका- वैश्विक राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

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