Scholarship Movement : आजसू छात्र संघ (AJSU Student Union) ने छात्रवृति आंदोलन (Scholarship Movement) को धार देने के लिए हर जिले मिस्टर आंदोलन का कार्यक्रम तय किया है। इसी कड़ी में 09 दिसम्बर को छात्र सड़क पर उतरेंगे। छात्र उपायुक्त से स्कॉलरशिप की माँग करेंगे।
छात्र नेताओं ने छात्रों को कॉलेजों में संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड के लाखों गरीब छात्र पिछले कई महीनों से पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के भुगतान से वंचित हैं। यह केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि उनके शिक्षा के अधिकार और भविष्य पर सीधा हमला है।

राज्य सरकार और कल्याण विभाग की घोर लापरवाही के कारण लाखों मेधावी छात्र पढ़ाई छोड़ने की कगार पर पहुँच गए हैं और उनके परिवार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। यह अन्याय बर्दाश्त से बाहर है। छात्रवृत्ति कोई दान या उपकार नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त हक है।
छात्र नेताओं ने “शिक्षा के लिए भिक्षा – जन आक्रोश मार्च” के संबंध में सभी विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी साझा की। यह आंदोलन गाँधी मैदान से उपायुक्त कार्यालय हजारीबाग तक पैदल जाएगी। जिसमें शांतिपूर्ण मार्च किया जाएगा।
झारखंड राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लाखों विद्यार्थी सत्र 2024–25 की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के भुगतान के लिए कई महीनों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह देरी केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सरकार की गंभीर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाती है, जिसके कारण उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है।
राज्य सरकार के अनुसार 11.34 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलनी थी, लेकिन अब तक केवल 7.45 लाख छात्रों को आंशिक भुगतान किया गया है। 3.5 लाख से अधिक OBC विद्यार्थी आज भी पहली किस्त की प्रतीक्षा में हैं।
रांची, लोहरदगा, गुमला, हज़ारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो सहित विभिन्न जिलों में विद्यार्थी पिछले एक महीने से लगातार धरना–प्रदर्शन कर रहे हैं, परंतु सरकार मौन है।
आजसू छात्र संघ ने राज्य सरकार की असंवेदनशीलता के खिलाफ 9 दिसंबर 2025 को एक शांतिपूर्ण जन-जागरण एवं जन-आक्रोश मार्च आयोजित करने की घोषणा की। हजारीबाग के सभी कॉलेज एवं कोचिंग के छात्र सम्मिलित होंगे।
यह मार्च 9 दिसंबर 2025 को समय प्रात 10:00 बजे से गांधी मैदान मटवारी से उपायुक्त कार्यालय हजारीबाग तक किया जाएगा। मार्च के माध्यम से छात्रवृत्ति भुगतान में हो रही देरी पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना और लंबित समस्याओं के समाधान हेतु सरकार को चेताया जाएगा।
छात्र संघ ने स्पष्ट किया कि यह मार्च पूर्णतः शांतिपूर्ण एवं विधिसम्मत होगा और सभी प्रतिभागियों को प्रशासनिक नियमों के पालन हेतु निर्देशित किया गया है।
आंदोलन को मिला संजय मेहता का समर्थन
छात्र आंदोलन को हज़ारीबाग लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी संजय मेहता ने अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा है की छात्रों की माँग जायज है। इन्हें स्कॉलरशिप दिया जाना चाहिए। छात्रों की पढ़ाई छात्रवृति नहीं मिलने से बाधित हो रही है। सरकार जल्द से जल्द छात्रों को छात्रवृत्ति दे।
उपायुक्त महोदय से प्रमुख मांगें :
छात्र संघ उपायुक्त महोदय से आग्रह करेगा कि, लंबित 2024–25 की छात्रवृत्ति वितरण करें।
छात्र संघ के अध्यक्ष ओम वर्मा एवं कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने स्पष्ट कहा कि जब तक राज्य की वर्तमान सरकार हर अंतिम छात्र को उसकी पूर्ण छात्रवृत्ति उपलब्ध नहीं कराती, तब तक यह आंदोलन एक क्षण के लिए भी थमेगा नहीं। न एक छात्र छूटेगा और न एक भी माँग अधूरी रहने दी जाएगी। आज की सत्ता यदि विद्यार्थियों के अधिकारों पर चुप्पी साधे रहती है, तो यह संघर्ष और तेज होगा क्योंकि यह लड़ाई केवल छात्रवृत्ति की नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और जवाबदेही की है।
प्रदेश उपाध्यक्ष ऋतुराज शहदेव ने सरकार पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा छात्रवृत्ति कोई दया नहीं, यह हमारा अधिकार है। लेकिन सरकार की चुप्पी ने लाखों विद्यार्थियों का अकादमिक वर्ष जोखिम में डाल दिया है। यदि सरकार तुरंत समाधान नहीं देती, तो छात्र अपनी आवाज़ और बुलंद करेंगे। यह लड़ाई शिक्षा बचाने की है, और इसे पूरे दमखम के साथ लड़ा जाएगा।
छात्र जिला अध्यक्ष सत्यम सिंह ने कहा, यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों का है जो बेहतर शिक्षा, समान अवसर और सम्मानजनक भविष्य की उम्मीद रखते हैं। झारखंड सरकार को समझना होगा कि शिक्षा के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
युवा आजसू प्रदेश संयोजक विकास सिंह, छात्र प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, प्रताप सिंह, शिवम मिश्रा, सत्यम सिंह, विकाश साव, संदीव वर्मा, शिव यादव, गिरीश पाण्डेय, ऋतिक यादव, राहुल यादव, दीपक शर्मा, अंकित कुमार, अभिमन्यु सिंह, रंजन, सुमन यादव, अंकित, आदित्य, प्रियांशु राज, कुणाल मेहता, अरविंद उरांव, चंदन यादव, आदि आंदोलन को सफल बनाने में मेहनत कर रहे हैं।










