Bagpat Farmers Protest : भारतीय किसान संघ (भाकिसं) के सैकड़ों कार्यकर्ता और किसान सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठ गए। हाथों में झंडे, मुंह पर गुस्सा और नारे तेज़ थे – “योगी जी अब तो जाग जाओ, नहीं तो हम खुद अधिकारियों को ठीक कर देंगे!” किसानों का कहना है कि पिछले सीजन का गन्ना पैसा अभी तक नहीं मिला, तौल में भयंकर घटतौली हो रही है, ऊपर से किराया भी बढ़ा दिया गया। बस बहुत हो गया, अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है।
पिछले साल का बकाया ही नहीं मिला, परिवार कैसे चलाएं

किसानों ने बताया कि बागपत की मलकपुर शुगर मिल और हापुड़ की सिंभावली मिल सहित उत्तर प्रदेश की कई चीनी मिलों ने 2023-24 सीजन का पूरा भुगतान अभी तक नहीं किया है। लाखों-लाख रुपए बकाया पड़े हैं। एक किसान राम सिंह ने बताया, भाई, बेटी की शादी है, बैंक का कर्ज़ है, खेत में फिर से गन्ना बोना है, लेकिन जेब खाली है। मिल वाले कहते हैं पैसा नहीं है, तो फिर हम कहां से लाएं
कई किसानों ने तो अपना पुराना बिल निकाल कर दिखाया। उसमें साफ लिखा है कि 50-60 क्विंटल से लेकर 200-300 क्विंटल तक का अभी भी बकाया है। किसान बोले, “मिल मालिक मौज कर रहे हैं, नेता घूम रहे हैं, और हम भूखे मर रहे हैं।”
तौल केंद्रों पर खुली लूट – घटतौली का खेल
धरने में सबसे ज़्यादा गुस्सा तौल केंद्रों के लिपिकों और कर्मचारियों पर था। किसानों का आरोप है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर जैसे ही गन्ना लेकर जाते हैं, तौल में 8-10 क्विंटल तक अपने आप कम हो जाता है। एक किसान ने चिल्ला कर कहा, “हमारी ट्रॉली में 80 क्विंटल गन्ना होता है, मशीन पर 70-72 दिखाते हैं। बाकी 8-10 क्विंटल कहां जाता है? सीधे लिपिक की जेब में!”
किसान नेता ने नाम लेकर कई तौल लिपिकों के नाम बताए और मांग की कि ऐसे सभी लोगों को तुरंत बर्खास्त किया जाए। नहीं तो किसान खुद उनके घर जाकर हिसाब करेंगे।
गन्ने का रेट बढ़ाया, किराया भी बढ़ा दिया – ये कौन सी न्याय है
इस बार योगी सरकार ने गन्ने का राज्य सलाहकार मूल्य (SAP) 20 रुपए क्विंटल बढ़ाया था, जिससे किसानों को थोड़ी खुशी हुई थी। लेकिन खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। मिलों ने तुरंत गन्ने का किराया (ट्रांसपोर्ट चार्ज) बढ़ा दिया। पहले जहां 25-30 रुपए क्विंटल किराया था, अब 50-60 रुपए तक वसूल रहे हैं।
किसान बोले, “एक हाथ से 20 रुपए दिए, दूसरे हाथ से 40 रुपए छीन लिए। सरकार चुप है, अधिकारी चुप हैं। आखिर हमारी कमाई किसके लिए है?”
अधिकारियों पर भरोसा खत्म, अब सीधे मुख्यमंत्री से गुहार
धरने के बाद किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सभी मांगें साफ-साफ लिखी गईं
- सभी मिलों से पिछले सीजन का बकाया 15 दिन के अंदर दिलवाया जाए।
- घटतौली करने वाले सभी तौल लिपिक और कर्मचारी तुरंत बर्खास्त हों।
- गन्ने पर लगाया गया बढ़ा हुआ किराया तुरंत वापस लिया जाए।
- इस बार का भुगतान 14 दिन के अंदर हो, जैसा सरकार ने वादा किया था।
- गन्ना किसानों को बिजली बिल में राहत दी जाए।
ज्ञापन देते वक्त किसानों ने अधिकारियों से साफ कहा, “ये आखिरी चेतावनी है। अगर 15-20 दिन में कुछ नहीं हुआ तो हम फिर आएंगे, लेकिन उस दिन ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ पूरी ताकत लेकर आएंगे। सड़कें जाम होंगी, रेल रोकी जाएगी, जो करना होगा करेंगे।”
भारतीय किसान संघ की दो टूक – योगी जी अब तो सुधार दो, वरना हम ठीक कर देंगे
भाकिसं के प्रदेश महामंत्री हरीओम शर्मा और जिला अध्यक्ष चौधरी विरेंद्र सिंह ने साफ कहा, “हम योगी जी के बहुत बड़े समर्थक हैं, लेकिन अफसर उनकी बात नहीं मान रहे। अगर योगी जी इन अधिकारियों और मिल मालिकों को नहीं सुधारते, तो भारतीय किसान संघ खुद सुधारने का काम करेगा। किसान अब चुप नहीं बैठेगा।”
उन्होंने ये भी कहा कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना बेल्ट के सारे जिले एक साथ उठ खड़े होंगे। मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत – सब जगह एक साथ आंदोलन होगा।
निष्कर्ष
आज बागपत कलेक्ट्रेट के बाहर जो नजारा था, वो किसी को भी झकझोर देगा। बुजुर्ग किसान आंसू पोछ रहे थे, जवान किसान गुस्से में लाल-PIले हो रहे थे। सबकी एक ही पुकार थी – अब बहुत हुआ, अब और नहीं सहेंगे।










