Ramgarh Air Pollution Protest: झारखंड के रामगढ़ जिले में वायु प्रदूषण से तंग आ चुके लोगों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। रविवार को सैकड़ों की संख्या में उग्र महिलाएं और पुरुष रांची रोड से नई सराय तक पैदल मार्च निकालकर अपना विरोध जताया। मार्च के दौरान लोगों ने जोर-जोर से नारे लगाए – “हमें जीने की चाहिए आजादी, आजादी!”
यह प्रदर्शन कोई अचानक नहीं था। रामगढ़ के रांची रोड इलाके में घनी आबादी के बीच स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड (BFCL) प्लांट लंबे समय से लोगों की परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से प्लांट ने प्रदूषण नियंत्रण की मशीनें बंद कर दी हैं, जिससे जहरीली गैस और धुआं सीधे हवा में फैल रहा है। इससे सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।

प्रदूषण से रोजमर्रा की जिंदगी हुई मुश्किल/Ramgarh Air Pollution Protest
लोगों ने बताया कि प्लांट से निकलने वाला जहरीला धुआं पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले चुका है। घरों में कपड़े धोकर छत या आंगन में सुखाने पर वे काले पड़ जाते हैं। हर रोज फर्श पर काली परत जमा हो जाती है, जिसे झाड़ना पड़ता है। सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य की है। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी इस प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। सांस की बीमारियां, हृदय रोग और त्वचा की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई परिवारों में लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुके हैं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम खुलकर सांस लेना चाहते हैं। जीना मुश्किल हो गया है। प्लांट वाले प्रदूषण रोकें, ताकि हमारा इलाका फिर से रहने लायक बने।” महिलाओं ने खास तौर पर बच्चों की सेहत का हवाला देकर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि स्कूल जाने वाले बच्चे रोज धुएं में सांस लेते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और खेलकूद प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन को कई शिकायतें, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सिर्फ प्लांट पर ही नहीं, जिला प्रशासन पर भी है। उन्होंने बताया कि कई बार लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है कि प्लांट पर सख्त कार्रवाई की जाए और प्रदूषण नियंत्रण मशीनें चालू कराई जाएं। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि अगर इस प्रदर्शन के बाद भी कोई एक्शन नहीं हुआ तो वे और बड़ा आंदोलन करेंगे। आगे उग्र प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई है।
यह मुद्दा नया नहीं है। रामगढ़ में BFCL प्लांट लंबे समय से प्रदूषण का कारण बना हुआ है। पहले भी राजनीतिक दल और स्थानीय संगठन इसकी शिकायत कर चुके हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी सूचित किया गया है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि यह पैदल मार्च और नारेबाजी प्रशासन की नींद तोड़ेगी।
आगे क्या? लोगों की मांग और उम्मीद
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि प्लांट प्रदूषण नियंत्रण के सभी नियमों का पालन करे। मशीनें ठीक कराई जाएं और जहरीला धुआं रोका जाए। वे चाहते हैं कि जिला प्रशासन तुरंत जांच करे और जरूरी कार्रवाई करे। अगर प्लांट बंद करना पड़े तो वह भी मंजूर है, लेकिन लोगों की जान से बढ़कर कुछ नहीं।










