G RAM G Bill Controversy: संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया G RAM G Bill 2025 अब एक प्रशासनिक बदलाव से आगे बढ़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) का नाम बदलने के प्रस्ताव ने विपक्ष को आक्रामक कर दिया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस कदम को महात्मा गांधी के विचारों और गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। सोशल मीडिया से लेकर संसद के भीतर तक सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं। राहुल गांधी का आरोप है कि यह बदलाव केवल नाम का नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिश है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में टकराव और बढ़ने के संकेत हैं। तो चलिए जानते हैं…
मनरेगा से G RAM G तक, विवाद की/G RAM G Bill Controversy
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, जिसे आमतौर पर मनरेगा कहा जाता है, ग्रामीण भारत की सबसे प्रभावशाली कल्याणकारी योजनाओं में से एक रही है। इस योजना का उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करना है। कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने करोड़ों मजदूरों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का काम किया। अब केंद्र सरकार ने इस योजना में बदलाव करते हुए G RAM G Bill 2025 संसद में पेश किया है, जिसमें नाम परिवर्तन के साथ संरचनात्मक सुधार की बात कही जा रही है। सरकार इसे विकासोन्मुख कदम बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि यह महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज की मूल भावना से हटने जैसा है। इसी वैचारिक टकराव ने इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक विवाद बना दिया है।

दो चीजों से पक्की नफरत
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्हें “महात्मा गांधी के विचारों और गरीबों के अधिकारों से पक्की नफरत है।” उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज के सपने का जीवंत उदाहरण है, लेकिन सरकार पिछले 10 वर्षों से इसे कमजोर करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के अनुसार, अब सरकार इस योजना का नामो-निशान मिटाने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि गरीबों की आवाज और अधिकारों को दबाने की कोशिश है। इस बयान ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।
मनरेगा की बुनियाद बनाम नया बिल
राहुल गांधी ने मनरेगा की मूल अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तीन स्तंभों पर आधारित थी—रोजगार का अधिकार, गांवों को विकास कार्य तय करने की स्वतंत्रता और केंद्र सरकार द्वारा मजदूरी का पूरा खर्च व सामग्री लागत का 75 प्रतिशत वहन। उनका आरोप है कि G RAM G Bill के जरिए सरकार सारी ताकत केंद्र में समेटना चाहती है। नए प्रस्ताव के तहत बजट और नियम केंद्र तय करेगा, जबकि राज्यों को 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जाएगा। विपक्ष का कहना है कि इससे फसल कटाई के समय या बजट खत्म होते ही काम रुक सकता है। वहीं, सरकार समर्थक इसे सुधार और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
संसद से सड़क तक संघर्ष के संकेत
इस विधेयक को लेकर राजनीतिक संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। राहुल गांधी ने साफ कहा है कि कांग्रेस इस “जनविरोधी बिल” का विरोध गांव की गलियों से लेकर संसद तक करेगी। उनका आरोप है कि पहले ही बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के बाद अब ग्रामीण गरीबों की सुरक्षित रोजी-रोटी पर हमला किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा ग्रामीण मतदाताओं के बीच बड़ा असर डाल सकता है। यदि सरकार बिना संशोधन के इस बिल को आगे बढ़ाती है, तो विपक्षी दल संयुक्त आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। साफ है कि G RAM G Bill 2025 आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुद्दा बन सकता है।










