Tarique Rahman Return In Bangladesh Politics: बांग्लादेश (Bangladesh) की राजनीति इस समय ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। देश में जारी हिंसा, सत्ता परिवर्तन और अवामी लीग (Awami League) पर प्रतिबंध के बीच 25 दिसंबर की तारीख बेहद अहम बन गई, जब पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया (Khaleda Zia) के बेटे तारिक रहमान (Tarique Rahman) 17 साल के निर्वासन के बाद लंदन (London) से ढाका (Dhaka) लौटे। उनकी वापसी को बांग्लादेश की राजनीति में “गेमचेंजर” माना जा रहा है। बीएनपी (BNP) के कार्यकर्ताओं में उत्साह चरम पर है और राजनीतिक विश्लेषक उन्हें देश का अगला “क्राउन प्रिंस” कह रहे हैं। आखिर तारिक रहमान कौन हैं, उनकी राजनीतिक यात्रा कैसी रही है और भारत (India) को लेकर उनकी सोच क्या संकेत देती है चलिए जानते हैं विस्तार से…
विरासत से सत्ता की दहलीज तक/Tarique Rahman Return In Bangladesh Politics
तारिक रहमान (Tarique Rahman) बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान (Ziaur Rahman) और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया (Khaleda Zia) के बड़े बेटे हैं। जियाउर रहमान 1971 के मुक्ति संग्राम के नायकों में शामिल रहे और बाद में देश के राष्ट्रपति बने, लेकिन 1981 में उनकी हत्या कर दी गई। उस वक्त तारिक महज 15 साल के थे। पिता की हत्या के बाद खालिदा जिया ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) की कमान संभाली और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इसी राजनीतिक विरासत ने तारिक को सत्ता के केंद्र तक पहुंचाया। उन्हें शुरू से ही पार्टी का उत्तराधिकारी माना जाता रहा है, जिस वजह से वे बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रभावशाली नाम बनकर उभरे।

17 साल का निर्वासन और अचानक वापसी
तारिक रहमान (Tarique Rahman) का जन्म 20 नवंबर 1965 को हुआ। उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय (University of Dhaka) से अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की और 23 वर्ष की उम्र में राजनीति में कदम रखा। 2000 के दशक में वे बीएनपी के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाने लगे और पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने। हालांकि, 2008 के बाद राजनीतिक उथल-पुथल के बीच उन्हें लंदन (London) में निर्वासन झेलना पड़ा। उन पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले समेत कुल 84 मामले दर्ज थे। लेकिन 2024–2025 के दौरान अदालतों ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया। अवामी लीग पर प्रतिबंध और खालिदा जिया की खराब सेहत के बीच उनकी 25 दिसंबर को ढाका वापसी ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।
बीएनपी को मिला नया चेहरा
अवामी लीग (Awami League) पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगने के बाद बीएनपी देश की सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी है। खालिदा जिया (Khaleda Zia) की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के चलते तारिक रहमान को पार्टी का कार्यवाहक चेयरमैन बनाया गया है। 2018 से वे इसी भूमिका में पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन अब उनकी मौजूदगी जमीनी राजनीति में नई ऊर्जा भर रही है। बीएनपी का दावा है कि लाखों समर्थक उनकी वापसी पर सड़कों पर उतरे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा और अपेक्षाकृत उदार छवि के कारण तारिक रहमान आगामी चुनावों में बीएनपी को बहुमत दिला सकते हैं। उनकी वापसी को पार्टी के लिए निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
भारत को लेकर तारिक रहमान की सोच
भारत (India) और बांग्लादेश (Bangladesh) के रिश्ते लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। शेख हसीना (Sheikh Hasina) और उनकी अवामी लीग को भारत समर्थक माना जाता रहा, जबकि बीएनपी के साथ संबंधों में अक्सर तनाव दिखा। तारिक रहमान ने हालिया इंटरव्यू में साफ कहा है कि उनकी विदेश नीति “बांग्लादेश फर्स्ट” पर आधारित होगी। उनका नारा—“न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सबसे पहले”—काफी चर्चा में है। उन्होंने तीस्ता जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर बांग्लादेश के अधिकारों की बात की है। हालांकि, हाल के संकेत सकारात्मक भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा खालिदा जिया के स्वास्थ्य को लेकर मदद की पेशकश पर बीएनपी ने आभार जताया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर तारिक रहमान सत्ता में आते हैं, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों में व्यावहारिक संतुलन देखने को मिल सकता है।










