Saudi Arabia Yemen Crisis Update: यमन के अलगाववादियों को 2 प्रांत खाली करने का आदेश, हूती-विरोधी गठबंधन में बढ़ी अंदरूनी खींचतान

Saudi Arabia Yemen Crisis Update: सऊदी अरब का बड़ा कदम, यमन में अलगाववादी गुटों से प्रांत छोड़ने को कहा

Saudi Arabia Yemen Crisis Update: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी यमन संकट एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सऊदी अरब (Saudi Arabia) के एक ताजा बयान ने हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के खिलाफ बने नाजुक गठबंधन के भीतर तनाव को और गहरा कर दिया है। क्रिसमस की सुबह जारी इस बयान में सऊदी अरब ने यमन (Yemen) के अलगाववादी गुटों से दो अहम प्रांतों को खाली करने का आदेश दिया है, जहां फिलहाल उनका नियंत्रण बताया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब यमन में शांति प्रक्रिया पहले ही बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह आदेश हूती-विरोधी गठबंधन को कमजोर करेगा या फिर सऊदी अरब संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। इस फैसले के पीछे क्या रणनीति है और इसके क्षेत्रीय असर क्या हो सकते हैं चलिए पूरा मामला विस्तार से जानते हैं…

यमन संघर्ष और गठबंधन की जटिलता/Saudi Arabia Yemen Crisis Update

यमन (Yemen) पिछले एक दशक से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। वर्ष 2015 में सऊदी अरब (Saudi Arabia) के नेतृत्व में गठित गठबंधन ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इस गठबंधन में कई यमनी गुट शामिल हैं, जिनके अपने-अपने राजनीतिक और क्षेत्रीय हित हैं। इन्हीं में एक है दक्षिणी ट्रांजिशनल काउंसिल (Southern Transitional Council – STC), जिसे संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates – UAE) का समर्थन प्राप्त है। एसटीसी लंबे समय से दक्षिण यमन को अलग देश के रूप में स्थापित करने की मांग करता रहा है। हालांकि, हूतियों के खिलाफ लड़ाई में ये गुट एक साथ खड़े दिखते हैं, लेकिन अंदरूनी मतभेद अक्सर सतह पर आते रहे हैं। सऊदी अरब का ताजा बयान इसी नाजुक संतुलन को चुनौती देता नजर आ रहा है।

सऊदी अरब का आदेश और मुख्य घटनाक्रम

सऊदी अरब ने गुरुवार को स्पष्ट रूप से कहा कि यमन के अलगाववादी गुटों को हदरमौत (Hadramawt) और महरा (Al Mahrah) प्रांतों से अपनी सेनाएं वापस बुलानी होंगी। सऊदी विदेश मंत्रालय (Saudi Foreign Ministry) के अनुसार, इन क्षेत्रों में अलगाववादियों की सैन्य गतिविधियां सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं। बयान में यह भी संकेत दिया गया कि यह कदम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित एसटीसी पर सार्वजनिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है। सऊदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि सभी यमनी गुटों को संयम बरतना चाहिए और ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए, जिससे हालात और बिगड़ें। इस आदेश के बाद यह आशंका गहराने लगी है कि हूती-विरोधी मोर्चे में दरार और चौड़ी हो सकती है, जिससे युद्ध की दिशा प्रभावित हो सकती है।

जांच, बयान और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं

सऊदी बयान में कहा गया है कि मध्यस्थता के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि अलगाववादी गुटों की सेनाएं दोनों प्रांतों के बाहर अपनी पूर्व स्थितियों में लौटें। इसके तहत वहां मौजूद सैन्य शिविरों को नेशनल शील्ड फोर्सेस (National Shield Forces) को सौंपने की योजना बताई गई है। मंत्रालय ने दोहराया कि स्थिति को पूर्ववत बहाल करना प्राथमिकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल सैन्य आदेश नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी है—खासतौर पर यूएई (UAE) के लिए, जो एसटीसी का प्रमुख समर्थक रहा है। हाल के वर्षों में सऊदी अरब और यूएई के बीच रिश्ते सहयोग के साथ-साथ प्रभाव और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से भी प्रभावित रहे हैं। ऐसे में यमन का यह घटनाक्रम दोनों देशों के संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

अब संभावित कार्रवाई पर नज़र

फिलहाल, दक्षिणी ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने सऊदी आदेश पर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन हाल के दिनों में दक्षिण यमन का झंडा तेजी से फहराया जाना अलगाववादी मंशा को उजागर करता है। गौरतलब है कि दक्षिण यमन 1967 से 1990 तक एक अलग राष्ट्र रहा था। मौजूदा हालात में सऊदी अरब (Saudi Arabia) स्थिति को नियंत्रण में लाने और हूती-विरोधी मोर्चे को एकजुट रखने की कोशिश करता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि अलगाववादी गुट आदेश का पालन करते हैं या नहीं। यदि टकराव बढ़ता है, तो यमन संकट और जटिल हो सकता है, जिसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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