End of the World Prediction: खुद को ‘पैगंबर’ बताकर शख्स ने फैलाया कयामत का डर, हजारों लोग समंदर की ओर दौड़े

End of the World Prediction: घाना में दिसंबर को कयामत का ऐलान, ‘Noah’ बनने का दावा कर लोगों से की ठगी

End of the World Prediction: दुनिया खत्म होने की भविष्यवाणियां समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन जब ऐसी बातों पर लोग आंख मूंदकर भरोसा कर लें, तब नतीजे खतरनाक हो सकते हैं। अफ्रीकी देश घाना (Ghana) से सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। यहां एक शख्स ने खुद को पैगंबर बताकर दावा किया कि 25 दिसंबर को कयामत आने वाली है, जिसका जिक्र बाइबिल (Bible) में भी है। उसने लोगों को डराया कि सिर्फ वही बच पाएंगे, जो उसकी बनाई कश्तियों में बैठेंगे। हैरानी की बात यह रही कि हजारों श्रद्धालु अपना घर-बार छोड़कर समंदर किनारे पहुंच गए। आखिर यह शख्स कौन था, उसने कैसे लोगों को ठगा और प्रशासन ने क्या कदम उठाए—तो चलिए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से…

घाना में अंधविश्वास की जमीन और अजीब घटना/End of the World Prediction

घाना (Ghana) के अकरा (Accra) शहर से शुरू हुई यह कहानी अंधविश्वास और डर की उस मानसिकता को उजागर करती है, जहां धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर लोगों को गुमराह किया गया। खुद को पैगंबर बताने वाले शख्स ने दावा किया कि उसे ईसा मसीह (Jesus Christ) सपनों में संदेश देते हैं। उसने कहा कि 25 दिसंबर को कयामत तय है और सिर्फ वही लोग बचेंगे, जो समय रहते समंदर किनारे पहुंच जाएंगे। इस दावे को उसने बाइबिल से जोड़कर और मजबूत बनाने की कोशिश की। स्थानीय स्तर पर पहले से मौजूद धार्मिक भावनाएं और डर का माहौल इस अफवाह के लिए उर्वर जमीन साबित हुआ। देखते ही देखते सोशल मीडिया और मौखिक प्रचार के जरिए यह संदेश फैल गया और हजारों लोग इसे सच मान बैठे।

कश्ती, कयामत और सुनियोजित धोखे का खुलासा

इस पूरे मामले का मुख्य चेहरा Ebo Noah (एबो नोआ) नाम का शख्स है, जिसने खुद को बाइबिल के प्रसिद्ध पात्र नोआ (Noah) का अवतार बताया। उसने समंदर किनारे लकड़ी से पुरानी शैली की कई नावें बनाईं और दावा किया कि यही कश्तियां मानवता को कयामत से बचाएंगी। जैसे ही तय तारीख नजदीक आई, लोग अपने परिवार और सामान के साथ नावों में बैठने पहुंच गए। तभी Ebo Noah ने नया दावा कर दिया कि सभी के लिए जगह नहीं है। इसके बाद उसने कहा कि उसकी प्रार्थना पर भगवान ने कयामत को कुछ दिनों के लिए टाल दिया है। यहीं से उसके झूठ और चालाकी की परतें खुलने लगीं।

जांच, आरोप और जनता

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि Ebo Noah ने पैगंबर होने का दावा कर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए। श्रद्धालुओं से दान, चढ़ावा और सुरक्षा के नाम पर पैसा लिया गया। जब कयामत नहीं आई, तब कई लोगों को ठगे जाने का एहसास हुआ। हालांकि, डर और शर्म के कारण कई पीड़ित खुलकर सामने नहीं आए। घाना (Ghana) के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, जब धर्म के नाम पर लोगों को डराकर आर्थिक शोषण किया गया हो। पुलिस और प्रशासन पर भी सवाल उठे कि समय रहते ऐसी अफवाहों को क्यों नहीं रोका गया। यह मामला अब अंधविश्वास के खिलाफ चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

शक्स की तलाश में पूरा प्रशासन

फिलहाल Ebo Noah (एबो नोआ) के गायब होने की खबरें सामने आ रही हैं और प्रशासन उसकी तलाश में जुटा है। यह घटना घाना ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सबक है कि अंधविश्वास किस हद तक लोगों को गुमराह कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से निपटने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। धार्मिक आस्था और तर्क के बीच संतुलन बनाए बिना ऐसे धोखेबाज बार-बार सामने आते रहेंगे। सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि लोगों को डर की राजनीति से बचाया जाए। यह घटना साफ संकेत देती है कि जब डर बिकने लगे, तब सच्चाई सबसे पहले कुचली जाती है।

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