Dhanbad SNMCH Child Theft Case: SNMCH बच्चा चोरी मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर आजसू महिला प्रकोष्ठ ने अधिकारियों को सम्मानित किया

Dhanbad SNMCH Child Theft Case: 24 घंटे में बच्चा बरामद, सरायढेला थाना प्रभारी समेत अधिकारियों को आजसू का विशेष सम्मान

Dhanbad SNMCH Child Theft Case: झारखंड के धनबाद जिले में शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMCH) से नवजात बच्चे की चोरी का मामला कुछ दिनों पहले सुर्खियों में रहा था। यह घटना 27 दिसंबर 2025 की रात की है, जब अस्पताल के प्रसूति वार्ड से एक नवजात शिशु को चोरी कर लिया गया था। लेकिन पुलिस की तेज़ी और मेहनत से मात्र 24 घंटे के अंदर बच्चा बरामद कर लिया गया और अपराधियों को पकड़ लिया गया। इस सराहनीय काम के लिए आजसू पार्टी की महिला प्रकोष्ठ ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया। यह कार्यक्रम नए साल की शुरुआत में हुआ, जो अधिकारियों के मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हुआ।

बच्चा चोरी की घटना कैसे हुई/Dhanbad SNMCH Child Theft Case

यह मामला धनबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SNMCH का है। अस्पताल में टुंडी ब्लॉक के मनियाडीह थाना क्षेत्र के भेलवे गांव की रहने वाली सरिता देवी नाम की एक महिला भर्ती थीं। उन्होंने 25 दिसंबर को एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन 27 दिसंबर की रात करीब 8 बजे एक महिला नर्स की ड्रेस पहनकर वार्ड में आई। उसने बच्चे की जांच कराने का बहाना बनाया और दादी से बच्चा गोद में ले लिया। फिर कहा कि जांच के बाद बच्चा वापस कर देगी। लेकिन वह बच्चा लेकर अस्पताल से बाहर निकल गई और गायब हो गई।

परिजनों ने जब बच्चा नहीं मिला तो अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर सुरक्षा की लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना मिलते ही सरायढेला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। सीसीटीवी फुटेज देखी गई, जिसमें महिला बच्चे को लेकर जाते दिख रही थी। यह फुटेज पुलिस के लिए बड़ा सुराग साबित हुई। परिजन पूरी रात रोते-बिलखते रहे और अगले दिन भी धरना दिया। अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए।

पुलिस ने कैसे सुलझाया मामला

धनबाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रभात कुमार के निर्देश पर तुरंत एक विशेष टीम बनाई गई। सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव और डीएसपी (विधि व्यवस्था) की अगुवाई में छापेमारी शुरू हुई। सीसीटीवी से मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने भूली और बलियापुर इलाके में दबिश दी।

जांच में पता चला कि यह चोरी पहले से प्लान की गई थी। मुख्य आरोपी अभिलाशा सिंह अपनी निःसंतान मामी राजकुमारी देवी के लिए बच्चा चाहती थी। उसने अस्पताल के कुछ कर्मचारियों और दलालों से संपर्क किया था। पैसों के लालच में अस्पताल कर्मी इश्तियाक अंसारी और हाशिमुद्दीन अंसारी ने मदद की। बच्चे को तीन लाख रुपये में बेचने की साजिश थी। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया – अभिलाशा सिंह, उसके पति कौशल कुमार सिंह, इश्तियाक अंसारी और हाशिमुद्दीन अंसारी। बच्चे को सुरक्षित बरामद कर माता-पिता को सौंप दिया गया। एक सफेद स्विफ्ट कार और कुछ पैसे भी बरामद हुए।

सरायढेला थाना प्रभारी मंजीत कुमार की टीम ने दिन-रात मेहनत की। मात्र 24 घंटे में मामला सुलझ जाना पुलिस की कार्यकुशलता का बड़ा उदाहरण है। इस कार्रवाई से न सिर्फ परिवार को राहत मिली, बल्कि समाज में सुरक्षा का संदेश भी गया।

आजसू महिला प्रकोष्ठ ने दिया सम्मान

इस त्वरित और सफल कार्रवाई के लिए आजसू पार्टी की महिला प्रकोष्ठ ने अधिकारियों को सम्मानित करने का फैसला किया। महिला प्रकोष्ठ की नेता सुप्रिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल धनबाद के उपायुक्त (DC) आदित्य रंजन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रभात कुमार और सरायढेला थाना प्रभारी मंजीत कुमार से मिला।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को ‘अभिनंदन एवं प्रोत्साहन सम्मान’ प्रदान किया। साथ ही फूलों का गुलदस्ता भेंट कर नए साल की शुभकामनाएं दीं। सुप्रिया ने कहा कि बच्चा चोरी जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस और प्रशासन की तेज़ कार्रवाई सराहनीय है। खासकर सरायढेला थाना प्रभारी मंजीत कुमार और उनकी टीम की सक्रियता से ही इतनी जल्दी बच्चा मिल सका।

आजसू कार्यकर्ताओं का कहना था कि ऐसे सम्मान से ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का हौसला बढ़ता है। इससे समाज में अपराधियों के खिलाफ लड़ाई मजबूत होती है और लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा होती है। यह कार्यक्रम नए साल के पहले दिनों में हुआ, जो सकारात्मक संदेश देता है।

इस मौके पर महिला प्रकोष्ठ की मीना सिंह, रीना देवी, सिद्धार्थ कुमार और अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने प्रशासन और पुलिस के प्रति आभार जताया।

निष्कर्ष

यह मामला अस्पतालों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाता है। SNMCH जैसे बड़े अस्पताल में इतनी आसानी से चोरी होना चिंता की बात है। स्वास्थ्य मंत्री ने भी सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दिए हैं। लेकिन पुलिस की तेज़ कार्रवाई ने दिखाया कि अगर सिस्टम सतर्क रहे तो अपराधियों को कोई मौका नहीं मिलता।

आजसू महिला प्रकोष्ठ का यह कदम अच्छा है क्योंकि इससे अधिकारियों को प्रोत्साहन मिलता है। ऐसे मामलों में समाज का साथ पुलिस को और मजबूत बनाता है। उम्मीद है कि आगे ऐसे अपराध न हों और अस्पताल सुरक्षित रहें।

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