Gurmeet Ram Rahim Parole: गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 40 दिन की पैरोल, 2017 के बाद 15वीं बार जेल से बाहर

Gurmeet Ram Rahim Parole: दुष्कर्म और हत्या के दोषी राम रहीम को मिली 40 दिन की पैरोल, विवाद फिर गर्माया

Gurmeet Ram Rahim Parole: हरियाणा की रोहतक जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 40 दिनों की पैरोल मिल गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह पैरोल 3 या 4 जनवरी 2026 को मंजूर हुई और राम रहीम जल्द ही जेल से बाहर आकर सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहेंगे। यह 2017 में उनकी सजा के बाद 15वीं बार है जब उन्हें पैरोल या फरलो पर रिहाई मिली है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली थी।

राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों से दुष्कर्म और एक पत्रकार की हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं। दुष्कर्म के मामले में उन्हें 20 साल की सजा हुई है, जबकि हत्या के मामले में उम्रकैद। पैरोल के दौरान वे सिरसा डेरे में ही रहेंगे और कड़ी सुरक्षा के बीच वहां कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

गुरमीत राम रहीम कौन हैं और क्यों हैं जेल में/Gurmeet Ram Rahim Parole

गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सौदा के मुखिया हैं, जो सिरसा में स्थित एक बड़ा धार्मिक संगठन है। इस डेरे के लाखों अनुयायी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य राज्यों में हैं। राम रहीम खुद को संत बताते हैं और फिल्में भी बनाते हैं, गाने गाते हैं। लेकिन 2017 में बड़ा फैसला आया जब सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें दो महिला अनुयायियों (साध्वियों) से बलात्कार के जुर्म में दोषी ठहराया। हर मामले में 10-10 साल की सजा हुई, जो एक साथ चल रही है।

इसके अलावा 2019 में उन्हें पत्रकार रामचंदर छत्रपति की हत्या के मामले में भी उम्रकैद की सजा मिली। छत्रपति ने डेरे के खिलाफ खबरें छापी थीं, जिसके बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। राम रहीम पर आरोप लगा कि उन्होंने यह साजिश रची। एक अन्य मामले में डेरे के मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या में भी वे दोषी थे, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।

2017 में सजा सुनाए जाने के बाद पंचकूला और आसपास हिंसा हुई, जिसमें कई लोग मारे गए। तब से राम रहीम जेल में हैं, लेकिन बार-बार पैरोल पर बाहर आते रहे हैं।

पैरोल क्यों मिलती रही है? बार-बार रिहाई का सिलसिला

2017 से अब तक राम रहीम को 15 बार जेल से बाहर आने की इजाजत मिल चुकी है। इनमें पैरोल और फरलो दोनों शामिल हैं। पैरोल मतलब अस्थायी रिहाई, जो अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को मिलती है। हरियाणा के कानून के मुताबिक, अच्छे चाल-चलन वाले कैदी को साल में कुछ दिन पैरोल मिल सकती है। सरकार का कहना है कि राम रहीम जेल में नियम मानते हैं, इसलिए उन्हें यह राहत दी जाती है।

पिछले कुछ उदाहरण देखें:

  • अगस्त 2025: 40 दिन की पैरोल, अपना जन्मदिन मनाने के लिए।
  • अप्रैल 2025: 21 दिन की फरलो।
  • जनवरी 2025: 30 दिन की पैरोल।
  • 2024 में भी कई बार पैरोल मिली, जैसे अक्टूबर में हरियाणा चुनाव से पहले 20 दिन की।

कुल मिलाकर 2020 से अब तक वे जेल के बाहर 300 से ज्यादा दिन गुजार चुके हैं। पैरोल पर बाहर आने पर वे ज्यादातर सिरसा डेरे या बागपत (उत्तर प्रदेश) के आश्रम में रहते हैं। वहां अनुयायियों से मिलते हैं, सत्संग करते हैं।

विवाद क्यों? लोग क्यों नाराज हैं

यह पैरोल हर बार विवाद पैदा करती है। कई लोग और संगठन कहते हैं कि इतने गंभीर जुर्म करने वाले को बार-बार बाहर क्यों आने दिया जाता है? सिख संगठन जैसे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने कई बार विरोध किया है। वे कहते हैं कि राम रहीम को विशेष सुविधा दी जा रही है।

पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने भी कहा कि राम रहीम कोई साधारण कैदी नहीं, बल्कि कट्टर अपराधी हैं। फिर भी बार-बार रिहा करना गलत है। विपक्षी पार्टियां भी आरोप लगाती हैं कि चुनाव के समय पैरोल देकर डेरे के वोट बैंक का फायदा लिया जाता है। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी बड़े संख्या में वोट डालते हैं, जो हरियाणा और पंजाब की राजनीति में असर डालता है।

हालांकि सरकार और जेल प्रशासन कहते हैं कि सब कानून के मुताबिक हो रहा है। कोई राजनीतिक दबाव नहीं है।

अनुयायियों की खुशी और डेरे की गतिविधियां

राम रहीम के अनुयायियों के लिए यह खुशी की खबर है। पैरोल मिलते ही डेरे में तैयारी शुरू हो जाती है। सिरसा में अनुयायी इकट्ठा होते हैं, सत्संग होते हैं। राम रहीम बाहर आने पर सेवा कार्य, जैसे ब्लड डोनेशन कैंप या सफाई अभियान चलवाते हैं। उनके फॉलोअर्स उन्हें ‘पिता जी’ या ‘मेसेंजर ऑफ गॉड’ कहते हैं और मानते हैं कि वे निर्दोष हैं।

इस बार भी पैरोल के दौरान सिरसा डेरे में कई कार्यक्रम हो सकते हैं। जनवरी में शाह सतनाम जी की जयंती भी आती है, जो डेरे के लिए खास दिन है।

निष्कर्ष

गुरमीत राम रहीम की यह पैरोल फिर से सवाल उठा रही है कि कानून सबके लिए बराबर है या नहीं? एक तरफ सरकार कहती है कि नियमों के तहत सब ठीक है, दूसरी तरफ पीड़ितों के परिवार और समाज का एक हिस्सा नाराज है। राम रहीम की सजा अभी कई साल बाकी है, लेकिन पैरोल का यह सिलसिला जारी है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह मामला कितना आगे बढ़ता है।

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