Sambhal Electricity Theft Raid: संभल में बिजली चोरी के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन

Sambhal Electricity Theft Raid: सांसद के गढ़ में डीएम-एसपी खुद उतरे मैदान में, मुस्लिम बहुल इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी

Sambhal Electricity Theft Raid: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए प्रशासन ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाए हैं। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई खुद टीमों के साथ सड़कों पर उतर आए। यह कार्रवाई खास तौर पर समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क के प्रभाव वाले इलाकों में की गई, जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है। रात के अंधेरे में शुरू हुआ यह अभियान सुबह तक चला और कई जगहों पर बड़े पैमाने पर बिजली चोरी के सबूत मिले। इलाके में हड़कंप मच गया और चोरी करने वालों के होश उड़ गए।

अभियान की शुरुआत रायसत्ती से, दीपा सराय और सराय तरीन में घर-घर जांच/Sambhal Electricity Theft Raid

यह बड़ा ऑपरेशन 4-5 जनवरी 2026 की रात से शुरू हुआ। डीएम और एसपी ने सात टीमों का गठन किया, जिसमें बिजली विभाग के अधिकारी, पुलिस और पीएसी के जवान शामिल थे। अभियान की शुरुआत रायसत्ती थाना क्षेत्र से हुई, जो सांसद बर्क का गढ़ माना जाता है। यहां दीपा सराय, सराय तरीन, नखासा और अन्य मोहल्लों में टीमों ने घर-घर, दुकानों, डेयरियों और सार्वजनिक जगहों पर छानबीन की।

सुबह करीब 5 बजे से शुरू होकर यह कार्रवाई कई घंटों तक चली। टीमों ने गलियों में पैदल घूमकर हर कनेक्शन की जांच की। कई जगहों पर अवैध तार, कटिया कनेक्शन, ओवरलोडिंग और सीधे मेन लाइन से बिजली लेने के सबूत मिले। एक जगह तो जमीन के अंदर छिपाकर मिनी पावर स्टेशन बना रखा था, जिससे 50-60 घरों में बिजली सप्लाई की जा रही थी। यह देखकर खुद डीएम और एसपी हैरान रह गए।

मस्जिद, डेयरी और ई-रिक्शा चार्जिंग में भी पकड़ी चोरी

छापेमारी में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए। एक मस्जिद परिसर में बिजली चोरी का पता चला। वहां अवैध कनेक्शन से बिजली इस्तेमाल हो रही थी। इसी तरह एक घर में डेयरी चलाने के लिए सीधे लाइन से बिजली चुराई जा रही थी। कई जगहों पर ई-रिक्शा चार्जिंग के नाम पर अवैध स्टेशन चल रहे थे, जहां बिना मीटर के बिजली ली जा रही थी।

एक तीन मंजिला इमारत में तो खुलेआम चोरी हो रही थी। टीमों ने मौके पर ही अवैध तार काटे और कनेक्शन तोड़े। ड्रोन से भी निगरानी की गई ताकि कोई छिपी जगह न बच जाए। अधिकारियों ने साफ कहा कि बिजली चोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जहां-जहां चोरी पकड़ी गई, वहां लोगों को चिह्नित किया गया है। जल्द ही एफआईआर दर्ज होगी और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

डीएम ने बताया, पिछले साल 150 करोड़ की बचत, अभियान जारी रहेगा

डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बिजली चोरी सिर्फ सरकार को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि ईमानदार ग्राहकों पर भी बोझ डालती है। उन्होंने बताया कि पिछले साल इसी तरह के अभियानों से करीब 150 करोड़ रुपये की बचत हुई थी। यह पैसा लाइन लॉस कम करने और बिजली सप्लाई बेहतर बनाने में लगा।

डीएम ने साफ किया कि यह कार्रवाई किसी एक इलाके या समुदाय के खिलाफ नहीं है। कानून सबके लिए बराबर है। कोई राजनीतिक प्रभाव या पहचान काम नहीं आएगी। बिजली चोरी जहां भी होगी, वहां सख्त एक्शन लिया जाएगा। यह अभियान एक दिन का नहीं, बल्कि लगातार चलेगा। आने वाले दिनों में और इलाकों में छापे पड़ेंगे।

इलाके में मचा हड़कंप, चोरों में दहशत

अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग हैरान थे कि डीएम और एसपी खुद इतनी ठंड में रात को सड़कों पर उतर आए। बिजली चोरी करने वाले डर गए कि अब उनका क्या होगा। कई लोग तो भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे सब बेबस हो गए।

संभल में पहले भी बिजली चोरी के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। पिछले सालों में यहां सैकड़ों एफआईआर दर्ज हुईं और करोड़ों का जुर्माना वसूला गया। लेकिन अब प्रशासन और सख्त हो गया है। बिजली विभाग के अधिकारी कहते हैं कि लाइन लॉस बहुत ज्यादा था, जिसे कम करने के लिए यह कदम जरूरी था।

क्यों जरूरी है ऐसा अभियान?

बिजली चोरी से सरकार को हर साल करोड़ों का घाटा होता है। इससे बिजली की सप्लाई प्रभावित होती है और ईमानदार उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल देना पड़ता है। संभल जैसे इलाकों में यह समस्या पुरानी है। यहां कई जगहों पर अवैध कनेक्शन और कुंडीबाजी आम थी। अब प्रशासन की सख्ती से उम्मीद है कि लोग सुधरेंगे और बिजली का सही इस्तेमाल करेंगे।

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