Stray Dogs Menace In India: आवारा कुत्तों का खतरा,सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज भी कुत्तों का शिकार हुए’

Stray Dogs Menace In India: 'जज साहब भी नहीं बचे', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से हड़कंप – आवारा कुत्तों की बढ़ती दहशत

Stray Dogs Menace In India: भारत में आवारा कुत्तों की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। सड़कों पर घूमते ये कुत्ते लोगों को काटते हैं, दुर्घटनाएं कराते हैं और कई बार जान तक ले लेते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों को सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से सुनवाई कर रहा है। हाल ही में एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के दो जज भी पिछले 20 दिनों में सड़क पर आवारा पशुओं (खासकर कुत्तों) की वजह से दुर्घटना का शिकार हो गए। कोर्ट की यह टिप्पणी आवारा कुत्तों के खतरे को कितना गंभीर मान रही है, यह दिखाती है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?/Stray Dogs Menace In India

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े कई मामले चल रहे हैं। कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए (सुओ मोटो) इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू की थी। हाल की सुनवाई में बेंच ने देखा कि इस मामले में इतनी ज्यादा अंतरिम याचिकाएं (अर्जियां) आ रही हैं कि इंसानों से जुड़े मामलों में भी इतनी नहीं आतीं। कोर्ट ने हैरानी जताई और कहा कि यह समस्या कितनी बड़ी है।

इस दौरान कोर्ट ने राजस्थान का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा, “सड़क पर आवारा पशुओं की मौजूदगी से पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज दुर्घटना का शिकार हुए हैं।” मतलब, कुत्ते या आवारा पशु सड़क पर आ गए और जजों की गाड़ी से एक्सीडेंट हो गया। यह बात कोर्ट ने समस्या की गंभीरता बताने के लिए कही। इससे साफ है कि यह खतरा आम आदमी से लेकर जज जैसे बड़े लोगों तक पहुंच गया है। कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा कि वे इस समस्या को गंभीरता से लें और जल्दी से जल्दी कदम उठाएं।

आवारा कुत्तों से क्यों इतना खतरा?

आवारा कुत्ते सिर्फ काटते ही नहीं, बल्कि सड़कों पर अचानक आ जाने से गाड़ियां रुकती हैं या टकराती हैं, जिससे बड़े एक्सीडेंट हो जाते हैं। खासकर रात में या हाईवे पर यह ज्यादा खतरनाक होता है। देश में हर साल हजारों लोग कुत्तों के काटने से रेबीज जैसी बीमारी का शिकार होते हैं और कई की मौत हो जाती है। बच्चे स्कूल जाते समय या खेलते हुए सबसे आसान शिकार बनते हैं। शहरों में तो पार्क, स्कूल, अस्पताल और बाजारों तक में ये कुत्ते घुस आते हैं।

राजस्थान में तो यह समस्या बहुत बड़ी है। वहां सड़कों पर कुत्तों के अलावा गाय, ऊंट जैसे पशु भी घूमते हैं, जो एक्सीडेंट का कारण बनते हैं। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के जजों का उदाहरण देकर सभी को जगाने की कोशिश की कि अगर जज भी सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी का क्या हाल होगा?

कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिए?

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कई बार सख्त आदेश दिए हैं। जैसे, स्कूल, अस्पताल, स्टेडियम, बस स्टैंड और ट्रेन स्टेशन जैसे सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का हुक्म दिया। कुत्तों को पकड़कर नसबंदी (स्टेरलाइजेशन) कराने और फिर शेल्टर में रखने को कहा। कुछ राज्यों को दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों से कुत्तों को हटाने के लिए समयसीमा दी। राजस्थान सरकार ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 58 हजार से ज्यादा कुत्ते पकड़े और 52 हजार की नसबंदी की। लेकिन फिर भी समस्या कम नहीं हो रही।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्तों को खिलाने-पिलाने वाले लोग उन्हें अपनी कॉलोनी या घर में ही रखें, सड़क पर नहीं। क्योंकि सड़क सबकी है, कुत्तों की नहीं। पशु प्रेमी और आम लोग दोनों के हितों का बैलेंस बनाना जरूरी है।

दोनों पक्षों की बात

इस मामले में दो पक्ष हैं। एक तरफ पशु प्रेमी कहते हैं कि कुत्ते बेजुबान हैं, उन्हें मारना नहीं चाहिए। नसबंदी और वैक्सीनेशन से समस्या कंट्रोल हो सकती है। जानवरों के अधिकारों की बात करते हैं। दूसरी तरफ आम लोग और पीड़ित कहते हैं कि इंसानों की जान पहले आनी चाहिए। कुत्ते अगर आक्रामक हैं तो उन्हें हटाना जरूरी है। कोर्ट इन दोनों के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि इंसानी जिंदगी और सुरक्षा सबसे ऊपर है, लेकिन क्रूरता नहीं होनी चाहिए।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में और सुनवाई होगी। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लान बनाएं और अमल करें। राजस्थान जैसे राज्यों में जहां समस्या ज्यादा है, वहां तेजी से काम करने को कहा। उम्मीद है कि कोर्ट के इस रुख से सक्रिय होंगी और सड़कें सुरक्षित होंगी।

अंत में, यह समस्या सिर्फ कोर्ट की नहीं, हम सबकी है। हमें भी जागरूक होना होगा। कुत्तों को सड़क पर खिलाने की बजाय शेल्टर में मदद करें। मांग करें कि नसबंदी अभियान चलाया जाए । तभी यह खतरा कम होगा। राजस्थान हाईकोर्ट के जजों वाला उदाहरण एक चेतावनी है कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। समय रहते कदम उठाने की जरूरत है।

Other Latest News

Leave a Comment