Modi Netanyahu phone call: साल 2026 की शुरुआत में ही भारत और इजरायल के बीच गर्मजोशी भरी बातचीत हुई। 7 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर लंबी बात की। यह कॉल कोई अचानक की घटना नहीं थी, बल्कि दोनों देशों की मजबूत दोस्ती का एक और उदाहरण था। पीएम मोदी ने खुद अपने दोस्त नेतन्याहू को नए साल की शुभकामनाएं दीं और दोनों ने कई अहम मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
क्यों हुई यह बातचीत?/Modi Netanyahu phone call
यह फोन कॉल नए साल के मौके पर हुआ, लेकिन इसके पीछे सिर्फ बधाई ही नहीं थी। दोनों नेता पिछले कुछ महीनों से लगातार संपर्क में हैं। दिसंबर 2025 में भी नेतन्याहू ने मोदी को फोन किया था, जहां गाजा शांति योजना और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर बात हुई थी। इस बार भी मुख्य फोकस भारत-इजरायल की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर था। पीएम मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “अपने मित्र प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करके खुशी हुई। उन्हें और इजरायल की जनता को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। हमने भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।”

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचार साझा किए। खासकर मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और गाजा की स्थिति पर। नेतन्याहू ने मोदी को गाजा शांति योजना की ताजा अपडेट दी। यह योजना अमेरिका की मदद से चल रही है और इसका दूसरा चरण जल्द शुरू होने की उम्मीद है। पीएम मोदी ने भारत की तरफ से इस योजना का पूरा समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता
बातचीत का एक बड़ा हिस्सा आतंकवाद पर था। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को फिर से दोहराया। मोदी और नेतन्याहू ने कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ और मजबूती से लड़ना होगा। यह कोई नई बात नहीं है। भारत और इजरायल दोनों ही आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित देश हैं। भारत कश्मीर और पाकिस्तान प्रायोजित आतंक से जूझ रहा है, तो इजरायल हमास और अन्य ग्रुप्स से। इसलिए दोनों देशों की सोच एक जैसी है। इस कॉल में दोनों ने आतंकवाद से लड़ने के लिए और ज्यादा दृढ़ता दिखाने का संकल्प लिया।
भारत-इजरायल दोस्ती की मजबूती
भारत और इजरायल की दोस्ती पिछले कुछ सालों में बहुत गहरी हो गई है। रक्षा, तकनीक, कृषि, पानी की बचत और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। 2025 में कई बड़े समझौते हुए, जैसे द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) और रक्षा सहयोग का एमओयू। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत भी आगे बढ़ रही है। जनवरी 2026 में ही दोनों देशों की टीमें FTA पर प्री-नेगोशिएशन राउंड के लिए मिलने वाली हैं।
इस फोन कॉल में दोनों नेताओं ने 2026 में साझेदारी को और आगे ले जाने की प्राथमिकताएं तय कीं। लोकतंत्र के साझा मूल्यों, गहरे विश्वास और भविष्य की सोच पर आधारित यह रिश्ता दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। नेतन्याहू की भारत यात्रा भी दिसंबर में टल गई थी, लेकिन अब नई तारीख तय करने की कोशिश चल रही है। दोनों देशों के अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं।
क्षेत्रीय शांति में भारत की भूमिका
मध्य पूर्व में शांति के लिए भारत की भूमिका भी अहम है। भारत इजरायल का करीबी दोस्त है, लेकिन फिलिस्तीन और अन्य अरब देशों से भी अच्छे रिश्ते रखता है। गाजा शांति योजना में भारत का समर्थन दिखाता है कि वह क्षेत्र में स्थिरता चाहता है। पीएम मोदी ने हमेशा कहा है कि आतंकवाद का कोई जगह नहीं और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। इस कॉल से साफ है कि भारत मध्य पूर्व की राजनीति में संतुलित भूमिका निभा रहा है।
निष्कर्ष
यह फोन कॉल सिर्फ औपचारिक नहीं था। यह भारत-इजरायल की गहरी दोस्ती का प्रमाण है। नए साल की शुरुआत में दोनों नेताओं ने न सिर्फ बधाई दी, बल्कि भविष्य की योजनाएं भी बनाईं। आतंकवाद से लड़ाई, रक्षा सहयोग, व्यापार बढ़ाना और क्षेत्रीय शांति – ये सभी मुद्दे 2026 में और मजबूत होंगे। दोनों देशों के लोग भी इस दोस्ती से फायदा उठा रहे हैं, चाहे वह इजरायली तकनीक से भारतीय किसानों को मदद हो या रक्षा उपकरणों से भारत की सुरक्षा मजबूत होना।










