Khamenei Speech Iran Protests: ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई का कड़ा संबोधन, अमेरिका को कहा- ‘हम कभी झुकेंगे नहीं’

Khamenei Speech Iran Protests: अमेरिका को खामेनेई की कड़ी चुनौती,हम दबाव में नहीं आएंगे

Khamenei Speech Iran Protests: ईरान में पिछले कई दिनों से चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश को संबोधित किया। उन्होंने साफ कहा कि ईरान न तो आंतरिक अशांति के आगे झुकेगा और न ही अमेरिका के दबाव में आएगा। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” करार देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध अलग है, लेकिन हिंसा करने वालों से बात नहीं की जाएगी, उन्हें उनकी जगह पर लाया जाएगा। यह संबोधन ऐसे समय में आया जब देश के कई शहरों में आर्थिक संकट, महंगाई और सरकार की नीतियों के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं।

प्रदर्शनों की शुरुआत और फैलाव/Khamenei Speech Iran Protests

ईरान में ये प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए। सबसे पहले तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं क्योंकि ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत गिर गई थी। एक डॉलर के मुकाबले रियाल 14 लाख तक पहुंच गया। महंगाई, बेरोजगारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और सरकार की विदेश नीतियों से लोग परेशान हैं। लोग नारे लगा रहे हैं – “न गाजा, न लेबनान, मेरी जान ईरान के लिए”। इसका मतलब है कि सरकार विदेश में पैसा खर्च कर रही है, लेकिन घरेलू समस्याओं की अनदेखी कर रही है।

प्रदर्शन जल्दी ही पूरे देश में फैल गए। तेहरान, मशहद, इस्फहान, शिराज समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। कुछ जगहों पर हिंसा हुई, आगजनी हुई और सुरक्षाबलों से झड़पें हुईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए। सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया ताकि लोग संगठित न हो सकें। कई जगह स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए – “खामेनेई मुर्दाबाद” और “तानाशाह को मौत”। कुछ ने ईरान के झंडे को फाड़ दिया।

विदेशी साजिश का आरोप

खामेनेई ने अपने संबोधन में कहा कि ये प्रदर्शन विदेशी ताकतों की साजिश हैं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे ईरान को अस्थिर करना चाहते हैं। ईरानी अधिकारी भी यही कह रहे हैं कि प्रदर्शन के पीछे बाहरी हाथ है। निर्वासित शाह के बेटे रेजा पहलवी ने भी प्रदर्शनों की अपील की थी, जिसे सरकार विदेशी समर्थन बता रही है। खामेनेई ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों से बात की जा सकती है, लेकिन “दंगाई” जो दुश्मनों के इशारे पर काम कर रहे हैं, उन्हें सख्ती से रोका जाएगा।

अमेरिका की चेतावनी और ट्रंप का रुख

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाएगी या उन्हें मारेगी, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा और प्रदर्शनकारियों की मदद करेगा। ट्रंप ने खामेनेई शासन को साफ कहा कि आवाज दबाने की कोशिश मत करो। इजरायल ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। इन बयानों से ईरान में तनाव और बढ़ गया है। खामेनेई ने जवाब में कहा कि अमेरिका को क्षेत्र छोड़ना होगा और ईरान किसी के दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने अमेरिका को “दुश्मन” करार दिया।

आर्थिक संकट की जड़ें

ईरान की ये मुश्किलें नई नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, खासकर अमेरिकी सैंक्शंस ने अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। 2025 में इजरायल के साथ 12 दिन की जंग के बाद हालात और बिगड़े। मुद्रा गिर रही है, महंगाई आसमान छू रही है और युवा बेरोजगार हैं। महिलाओं के अधिकारों और हिजाब कानून पर भी पुराना गुस्सा है। 2022 के महसा अमीनी प्रदर्शनों की याद ताजा हो गई है, लेकिन इस बार प्रदर्शन ज्यादा राजनीतिक हैं – लोग शासन बदलने की मांग कर रहे हैं।

सरकार का रुख और आगे क्या?

खामेनेई के संबोधन के बाद सरकार ने दमन और तेज कर दिया है। सुरक्षाबलों को सख्त आदेश हैं। कुछ अधिकारियों ने माना कि हिंसा हुई है, लेकिन इसे विदेशी साजिश बताया। दूसरी तरफ प्रदर्शन रुकने के आसार नहीं दिख रहे। लोग “आजादी, आजादी” के नारे लगा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और इजरायल प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं, जबकि ईरान इसे अपनी आंतरिक मामला बता रहा है।

यह संकट ईरान के लिए बड़ा चुनौती है। खामेनेई ने देशवासियों से धैर्य और एकता की अपील की, लेकिन सड़कों पर गुस्सा कम नहीं हो रहा। दुनिया की नजरें ईरान पर टिकी हैं कि ये प्रदर्शन कहां तक जाते हैं। क्या ये सिर्फ आर्थिक मांगों तक रहेंगे या बड़ा बदलाव लाएंगे? फिलहाल हालात तनावपूर्ण हैं और आगे कुछ भी हो सकता है।

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