Iran Economic Crisis Protests: ईरान इन दिनों एक बड़े संकट से गुजर रहा है। दिसंबर 2025 के आखिर से शुरू हुई विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं, और सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की गिरावट ने लोगों का गुस्सा फूटने का कारण बना दिया है। अब ये सिर्फ आर्थिक शिकायत नहीं रही, बल्कि पूरी सरकार और सुप्रीम लीडर के खिलाफ आवाज बन गई है।
प्रदर्शन कैसे और क्यों शुरू हुए?/Iran Economic Crisis Protests
ये सब 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ, जब तेहरान के बाजारों में दुकानदारों ने महंगाई और ईरानी रियाल की भारी गिरावट के खिलाफ हड़ताल की। रियाल की वैल्यू इतनी गिर गई कि एक डॉलर के लिए 14 लाख से ज्यादा रियाल लगने लगे। दिसंबर में महंगाई 42% से ऊपर पहुंच गई थी। लोग रोजमर्रा की चीजें भी मुश्किल से खरीद पा रहे थे। पहले तो ये छोटे-मोटे प्रदर्शन थे, लेकिन जल्दी ही ये पूरे देश में फैल गए।

अब तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं और करीब 180 शहरों में लोग सड़कों पर हैं। ये 2022 में महसा अमीनी के मामले के बाद सबसे बड़ा विरोध है, और कुछ लोग तो इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़ा आंदोलन मान रहे हैं। छात्र, दुकानदार, मजदूर, महिलाएं और युवा सब शामिल हैं।
सड़कों पर क्या नारे लग रहे हैं?
लोग खुलकर बोल रहे हैं। सबसे ज्यादा सुनाई देने वाले नारे हैं:
- “मौत हो तानाशाह को!” (Death to the dictator)
- “आजादी, आजादी!”
- “खामेनेई हत्यारा है, उसकी हुकूमत खत्म!”
- कुछ जगहों पर पुराने शाह के समर्थन में भी नारे लग रहे हैं।
ये नारे सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि पूरी सिस्टम के खिलाफ हैं। लोग रिजा पहलवी (पुराने शाह के बेटे) के समर्थन में भी दिख रहे हैं।
सरकार की सख्त कार्रवाई और मौतें
सरकार ने विरोध को कुचलने के लिए भारी बल प्रयोग किया है। सुरक्षा बलों ने लाइव फायरिंग की, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए। विभिन्न ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स (जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और ईरान ह्यूमन राइट्स) की रिपोर्ट्स के अनुसार:
- अब तक कम से कम 45 से 51 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।
- सैकड़ों घायल हुए हैं।
- 2000 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
कुछ शहरों में पुलिस स्टेशन और सरकारी इमारतों पर हमले हुए, गाड़ियां जलाई गईं। सरकार का कहना है कि ये “विदेशी ताकतों” की साजिश है और प्रदर्शनकारी “उपद्रवी” हैं।
इंटरनेट बंद करके जानकारी छिपाने की कोशिश
8 जनवरी 2026 को सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया। ये ब्लैकआउट अब भी जारी है। लोग मैसेज नहीं भेज पा रहे, वीडियो अपलोड नहीं कर पा रहे। इसका मकसद है कि दुनिया को सच्चाई पता न चले और विरोध को ऑर्गनाइज करना मुश्किल हो जाए।
ये तरीका ईरान पहले भी इस्तेमाल कर चुका है, जैसे 2019 और 2022 में। कुछ लोग स्टारलिंक (सैटेलाइट इंटरनेट) से कनेक्ट हो रहे हैं, लेकिन ये बहुत कम लोगों के पास है। इंटरनेट बंद होने से बैंकिंग, एटीएम और ऑनलाइन पेमेंट भी प्रभावित हुए हैं। लोग कैश के लिए दौड़ पड़े हैं।
फ्लाइट्स कैंसिल, अंतरराष्ट्रीय असर
इंटरनेट और फोन लाइन बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित हुईं। दुबई से ईरान जाने वाली कम से कम 17 फ्लाइट्स कैंसिल हो गईं। कई एयरलाइंस ने ईरान जाने वाली उड़ानें रोक दीं। फोन कॉल्स भी नहीं लग रहे, जिससे बाहर के लोग अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाएगा तो अमेरिका उनकी मदद करेगा। उन्होंने ईरान को “बड़ी मुसीबत” में बताया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने ट्रंप पर हमला बोला और कहा कि प्रदर्शनकारी अमेरिका को खुश करने के लिए सड़कें बर्बाद कर रहे हैं।
यूरोपीय देशों ने भी ईरान की निंदा की है और हिंसा रोकने की मांग की है।
अभी क्या स्थिति है?
10 जनवरी 2026 तक प्रदर्शन जारी हैं। लोग रात में भी 8 बजे सड़कों पर निकलकर नारे लगा रहे हैं। सरकार सख्ती बढ़ा रही है, लेकिन विरोध कम नहीं हो रहा। ये आंदोलन अब सिर्फ महंगाई का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था बदलने का बन चुका है।
ईरान के लोग बहुत मुश्किल वक्त से गुजर रहे हैं। इंटरनेट बंद, मौतें, गिरफ्तारियां और अनिश्चितता ने सबको डरा दिया है। लेकिन उनकी आवाज दब नहीं रही। दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि ये विरोध कहां तक जाता है और सरकार क्या करती है।










