Blinkit Drops 10 Minute Delivery: आजकल जो चीजें हम घर बैठे मंगवाते हैं, वो बहुत तेजी से आती हैं। खासकर ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और जोमैटो जैसी कंपनियां यह दावा कर रही थी कि 10 मिनट में डिलीवरी हो जाएगी, यानी आपके ऑर्डर करते ही 10 मिनट में आपका ऑर्डर दरवाजे पर पहुंच जाएगा, लेकिन अब ये दौर खत्म हो रहा है। केंद्र सरकार ने बीच में कदम रखा है और इन कंपनियों को सख्ती से कहा है कि 10 मिनट वाली ये समय सीमा हटा दो। वजह? डिलीवरी करने वाले लड़कों (गिग वर्कर्स) की सुरक्षा।
क्यों उठा ये मुद्दा? डिलीवरी बॉयज की परेशानी/Blinkit Drops 10 Minute Delivery
पिछले कुछ महीनों से डिलीवरी पार्टनर्स बहुत परेशान थे। वे कहते थे कि 10 मिनट में डिलीवरी का दबाव इतना ज्यादा है कि उन्हें ट्रैफिक नियम तोड़ने पड़ते हैं, तेज रफ्तार से बाइक चलानी पड़ती है, और कई बार जान का खतरा भी हो जाता है। बारिश हो, धूप हो, स्मॉग हो या रात के अंधेरे में – बस समय पूरा करना है। अगर देर हुई तो ऐप पर पेनल्टी लगती है, कमाई घटती है, या आईडी ब्लॉक भी हो सकती है।

दिसंबर 2025 के आखिर में ये गुस्सा फूट पड़ा। क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या पर देशभर में गिग वर्कर्स ने हड़ताल कर दी। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स के लाखों वर्कर्स सड़कों पर उतर आए। उनकी मुख्य मांग थी – “10 मिनट डिलीवरी” बंद करो, पुरानी पेमेंट सिस्टम वापस लाओ, अच्छा वेतन दो, इंश्योरेंस और सोशल सिक्योरिटी दो। हड़ताल से नए साल की पार्टी में लोगों को खाना-पीना लेट मिला या कैंसल हो गया।
सरकार ने सुनी बात, मंत्री ने बुलाई बैठक
केंद्र सरकार ने इस हड़ताल को गंभीरता से लिया। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने खुद बड़ी कंपनियों के अधिकारियों से मीटिंग की। ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के बड़े अफसरों को बुलाया गया। मंत्री ने साफ कहा – “स्पीड से ज्यादा जरूरी है डिलीवरी पार्टनर्स की जान-माल की सुरक्षा। इतना सख्त टाइम लिमिट मत रखो कि वर्कर्स को खतरा हो।”
मीटिंग में कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिया कि वे अब “10 मिनट डिलीवरी” का दावा अपनी ऐड, सोशल मीडिया, ऐप और ब्रांडिंग से हटा देंगे। ब्लिंकिट ने तो तुरंत ऐक्शन लिया। पहले उनका टैगलाइन था – “10,000+ प्रोडक्ट्स 10 मिनट में डिलीवर”। अब इसे बदलकर “30,000+ प्रोडक्ट्स आपके दरवाजे पर” कर दिया गया है। बाकी कंपनियां भी जल्द ही ऐसा ही करेंगी।
क्या बदलेगा? डिलीवरी अब भी तेज रहेगी, लेकिन दबाव कम
सवाल ये है कि क्या अब डिलीवरी धीमी हो जाएगी? नहीं बिल्कुल नहीं। कंपनियां कहती हैं कि उनका सिस्टम इतना मजबूत है कि छोटे-छोटे डार्क स्टोर्स (मिनी वेयरहाउस) शहरों में फैले हुए हैं। ऑर्डर मिलते ही सामान 2-3 मिनट में पैक हो जाता है और डिलीवरी पार्टनर को ज्यादातर 1-2 किलोमीटर ही जाना पड़ता है। तो कई बार 10-15 मिनट में तो सामान पहुंच ही जाता है।
फर्क बस इतना होगा कि अब कंपनियां “10 मिनट” को फिक्स्ड प्रॉमिस नहीं बनाएंगी। मार्केटिंग में स्पीड की बात करेंगी, लेकिन सख्त समय सीमा नहीं बताएंगी। इससे वर्कर्स पर वो अनावश्यक दबाव कम होगा जो “10 मिनट” के नाम पर लगता था।
गिग वर्कर्स के लिए बड़ी राहत
ये फैसला डिलीवरी बॉयज के लिए बहुत बड़ी जीत है। वे सालों से कह रहे थे कि तेज डिलीवरी अच्छी है, लेकिन उसकी कीमत उनकी सुरक्षा से नहीं चुकानी चाहिए। हड़ताल और सरकार का दखल दोनों ने मिलकर कंपनियों को झुकने पर मजबूर किया। अब उम्मीद है कि वर्कर्स को बेहतर कामकाजी हालात मिलेंगे – जैसे अच्छी कमाई, इंश्योरेंस, कम घंटे काम, और कोई पेनल्टी का डर नहीं।
ग्राहकों पर क्या असर?
हम ग्राहकों के लिए ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। सामान अभी भी काफी तेज आएगा, क्योंकि क्विक कॉमर्स का पूरा मॉडल ही इसी पर टिका है। बस अब ऐप पर “10 मिनट में” लिखा नहीं दिखेगा। कई लोग तो खुश भी होंगे क्योंकि इससे कंपनियां ज्यादा रियलिस्टिक टाइम दिखाएंगी और निराशा कम होगी।
निष्कर्ष
ये बदलाव 13 जनवरी 2026 से लागू हो गया है। सरकार और कंपनियां मिलकर गिग वर्कर्स के मुद्दों पर और बात कर रही हैं। भविष्य में नए लेबर कोड्स से गिग इकॉनमी में और सुधार आ सकते हैं। फिलहाल, ये फैसला दिखाता है कि जब वर्कर्स एकजुट होते हैं और सरकार सुनती है, तो बड़े बदलाव मुमकिन हैं।










