Iran Protests Khamenei 2026: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब इतने बड़े हो गए हैं कि इन्हें 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन कहा जा रहा है। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ ये प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए हैं। शुरुआत आर्थिक संकट से हुई थी, लेकिन अब लोग खामेनेई और पूरी इस्लामिक रिपब्लिक को हटाने की मांग कर रहे हैं। हजारों लोग मारे जा चुके हैं, इंटरनेट बंद है, और दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं।
प्रदर्शन कैसे शुरू हुए और कितने बड़े हैं?/Iran Protests Khamenei 2026
ये सब 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानदारों की हड़ताल से शुरू हुआ। ईरानी रियाल (करेंसी) की कीमत बहुत गिर गई थी, डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो पर पहुंच गई। इससे बेसिक सामान जैसे खाना, तेल, चिकन आदि की कीमतें आसमान छूने लगीं। दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं और सड़कों पर उतर आए। जल्द ही ये प्रदर्शन पूरे ईरान में फैल गए – सभी 31 प्रांतों में, 180 से ज्यादा शहरों में।

शुरुआत में सिर्फ महंगाई और आर्थिक संकट की बात थी, लेकिन अब नारे बदल गए हैं – “डेथ टू खामेनेई”, “डेथ टू डिक्टेटर”, “लॉन्ग लिव द शाह” (पुराने राजा का बेटा रेजा पहलवी का नाम), “नो लेबनान, नो गाजा” (ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स पर खर्च बंद करो)। लोग सरकार को पूरी तरह हटाने की मांग कर रहे हैं। ये प्रदर्शन 2022 के महिला-जीवन-आजादी आंदोलन से भी बड़े हैं, क्योंकि अब व्यापारी, छात्र, किसान, मजदूर – हर वर्ग शामिल है।
सरकार का क्रैकडाउन: हजारों मौतें
खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “ट्रबलमेकर्स” और “विदेशी साजिश” कहा है। उन्होंने सिक्योरिटी फोर्सेस को लाइव फायरिंग का ऑर्डर दिया। ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स के अनुसार, दो हफ्तों में 2,000 से 12,000 तक लोग मारे जा चुके हैं (विभिन्न रिपोर्ट्स में अलग-अलग आंकड़े)। हजारों गिरफ्तार, इंटरनेट ब्लैकआउट, फास्ट ट्रायल और एक्जीक्यूशन की बात हो रही है। सरकार ने प्रो-गवर्नमेंट रैलियां भी निकालीं, लेकिन विरोधी प्रदर्शन ज्यादा बड़े और लगातार हैं।
ट्रंप ने कहा है कि अगर क्रैकडाउन जारी रहा तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत का बड़ा तेल सप्लायर ईरान है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 10-15% तेल ईरान से लेता है। ईरान के तेल एक्सपोर्ट में भारत, चीन और यूएई बड़े खरीदार हैं।
अगर प्रदर्शन बढ़े और ईरान में अस्थिरता रही, तो:
- तेल उत्पादन और एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है।
- होर्मुज स्ट्रेट में खतरा बढ़ सकता है, अगर ईरान ब्लॉक कर दे। (यहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है)
- इससे ग्लोबल ऑयल प्राइसेज में तेज उछाल आएगा। जनवरी 2026 में ही प्रोटेस्ट्स की वजह से ब्रेंट क्रूड $64/बैरल के ऊपर पहुंच गया है, और रिस्क प्रीमियम $3-4/बैरल जुड़ गया है।
भारत में 70-80% तेल आयात होता है। अगर क्रूड $80-90 तक पहुंचा, तो: - पेट्रोल-डीजल की कीमतें 10-20 रुपये/लीटर बढ़ सकती हैं।
- ट्रांसपोर्ट, खेती, इंडस्ट्री का खर्च बढ़ेगा।
- महंगाई भी लगभग 1-2% तक बढ़ सकती है, फूड और ईंधन से जुड़ी चीजों में।
- रुपया और कमजोर हो सकता है, क्योंकि डॉलर मजबूत होगा।
पहले से ही भारत में महंगाई 5-6% के आसपास है। ईरान संकट से ये 7-8% तक पहुंच सकती है। सरकार सब्सिडी बढ़ा सकती है, लेकिन बजट पर बोझ पड़ेगा।
निष्कर्ष
ये प्रदर्शन कितने दिन चलेंगे, यह कहना मुश्किल है। सरकार क्रैकडाउन से दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोग थक नहीं रहे। अगर रेजा पहलवी या कोई विपक्षी ग्रुप मजबूत हुआ, तो बड़ा बदलाव हो सकता है। लेकिन फिलहाल खामेनेई की पकड़ मजबूत है, क्योंकि आर्मी और IRGC उनके साथ हैं।










