Trump Greenland Denmark Warning: अब समय आ गया है’ – ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क को ललकारा, क्या है प्लान?

Trump Greenland Denmark Warning: ट्रंप ने डेनमार्क को दी चेतावनी, जानिए क्या है पूरा मामला।

Trump Greenland Denmark Warning: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर हंगामा मचा दिया है। उन्होंने डेनमार्क को सीधे चेतावनी दी है कि “डेनमार्क, अब समय आ गया है” (Denmark, the time has come)। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है और इसे खरीदना या कंट्रोल करना चाहिए। अगर डेनमार्क नहीं माना, तो ट्रंप ने NATO के कई सहयोगी देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। यह धमकी रूस और चीन के खतरे से जुड़ी है, और इससे NATO में दरार पड़ सकती है। 2026 में ट्रंप की दूसरी टर्म शुरू होने के बाद यह उनका बड़ा कदम है, जो दुनिया की राजनीति को हिला सकता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि ग्रीनलैंड पर रूस और चीन की नजर है। अगर अमेरिका ने इसे नहीं लिया, तो ये देश आर्कटिक इलाके में अपना प्रभाव बढ़ा लेंगे। ट्रंप का दावा है कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में मिनरल्स और स्ट्रैटेजिक लोकेशन की वजह से इसे अमेरिका के पास होना चाहिए। ट्रंप ने इसे “गोल्डन डोम” बनाने की बात की, जो नॉर्थ अमेरिका को मिसाइलों से बचाएगा।

क्या रूस और चीन का खतरा है ट्रंप की धमकी की वजह?/Trump Greenland Denmark Warning

ट्रंप की इस धमकी के पीछे मुख्य वजह रूस और चीन का बढ़ता प्रभाव है। ग्रीनलैंड आर्कटिक सर्कल में है, जहां ग्लोबल वॉर्मिंग से नए रूट्स खुल रहे हैं। रूस पहले से ही आर्कटिक में मिलिट्री बेस बना रहा है, और चीन भी निवेश कर रहा है। ट्रंप का कहना है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के पास नहीं आया, तो रूस और चीन इसे कंट्रोल कर लेंगे, जो अमेरिका की सिक्योरिटी के लिए खतरा है।

ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड को प्रोटेक्ट नहीं कर सकता, क्योंकि उसकी मिलिट्री छोटी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि NATO के सहयोगी देश ग्रीनलैंड में ट्रूप्स भेजकर अमेरिका के प्लान में रुकावट डाल रहे हैं। ट्रंप की पहली टर्म में भी 2019 में उन्होंने ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन डेनमार्क ने मना कर दिया था। अब ट्रंप और आक्रामक हो गए हैं – उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो फोर्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

NATO पर टैरिफ की तलवार, 8 देशों पर निशाना

ट्रंप ने अपनी धमकी को अमल में लाने के लिए बड़ा कदम उठाया। उन्होंने 8 यूरोपीय देशों – डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन – पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। यह टैरिफ 1 फरवरी से शुरू होगा और 1 जून से 25% हो जाएगा। ट्रंप का कहना है कि ये देश ग्रीनलैंड में ट्रूप्स भेजकर “खतरनाक खेल” खेल रहे हैं। ये ट्रूप्स मिलिट्री एक्सरसाइज के लिए भेजे गए हैं, लेकिन ट्रंप इसे अमेरिका विरोधी मानते हैं।

ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, “ये देश जो खतरनाक खेल खेल रहे हैं, उन्होंने ऐसा रिस्क लिया है जो सहन नहीं किया जा सकता।” उनका कहना है कि टैरिफ तब तक रहेंगे जब तक ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं बेचा जाता। इससे अमेरिका-यूरोप व्यापार पर असर पड़ेगा। पिछले साल US-EU ट्रेड डील हुई थी, लेकिन अब वह डिबेट में है। ट्रंप की यह नीति NATO को कमजोर कर सकती है, क्योंकि ये देश NATO के सदस्य हैं।

यूरोप की तीखी प्रतिक्रिया, ‘ब्लैकमेल नहीं सहेंगे’

ट्रंप की इस धमकी से यूरोप में हड़कंप मच गया है। डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा, “यूरोप ब्लैकमेल नहीं सहेंगे।” उन्होंने ट्रंप के प्लान को NATO के लिए खतरा बताया। 8 देशों ने संयुक्त बयान जारी किया कि “टैरिफ की धमकियां ट्रांसअटलांटिक रिलेशन को कमजोर करेंगी और खतरनाक सर्पिल में डाल देंगी।” वे कहते हैं कि आर्कटिक सिक्योरिटी NATO की साझा जिम्मेदारी है, और अमेरिका अकेला फैसला नहीं कर सकता।

स्पेन के पीएम पेड्रो सांचेज ने कहा कि अगर अमेरिका फोर्स यूज करेगा, तो NATO का अंत हो जाएगा और रूस के पुतिन खुश होंगे। EU फॉरेन पॉलिसी चीफ काजा कलास ने कहा कि ग्रीनलैंड का मुद्दा NATO में सुलझाया जा सकता है, टैरिफ से यूरोप और अमेरिका दोनों गरीब होंगे। ब्रिटिश पीएम केइर स्टार्मर ने ट्रंप से बात की और कहा कि सहयोगियों पर टैरिफ गलत है। यहां तक कि ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी में आलोचना हो रही है। सीनेटर लीजा मुर्कोवस्की और टॉम टिलिस ने कहा कि यह अमेरिका के लिए बुरा है और पुतिन-शी को फायदा देगा।

ग्रीनलैंड का क्या होगा? स्थानीय लोगों की राय

ग्रीनलैंड डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस टेरिटरी है, जहां 56,000 लोग रहते हैं। वहां के लोग ट्रंप के प्लान से नाराज हैं। हजारों ने मार्च निकाला और कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। ग्रीनलैंड में दुर्लभ मिनरल्स हैं, जो टेक्नोलॉजी और एनर्जी के लिए जरूरी हैं। ट्रंप इसे सिक्योरिटी से जोड़ रहे हैं, लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह रूस के हाथों में खेलना है।

रूस ने कहा कि वह “असाधारण” स्थिति पर नजर रख रहा है। क्रेमलिन स्पोक्सपर्सन ने कहा कि यह अनोखी स्थिति है। यूरोपीय ऑफिशियल्स का मानना है कि ट्रंप की धमकियां NATO को तोड़ रही हैं, जो पुतिन चाहते हैं।

NATO में दरार की आशंका?

ट्रंप की यह धमकी 2026 में दुनिया की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है। अगर टैरिफ लगे, तो ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है। NATO की मीटिंग में यह टॉपिक होगा। ट्रंप की पहली टर्म में भी उन्होंने NATO पर सवाल उठाए थे, अब यह और गंभीर है। देखना होगा कि डेनमार्क क्या करता है – क्या वह बातचीत करेगा या NATO के साथ खड़ा रहेगा? ग्रीनलैंड का भविष्य अनिश्चित है, लेकिन ट्रंप की जिद से दुनिया में नया तनाव बढ़ गया है। अगर फोर्स यूज हुआ, तो NATO टूट सकता है। फिलहाल, यूरोप एकजुट है और कह रहा है कि वे धमकियों से नहीं डरेंगे।

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