Dhar Bhojshala Controversy 2026 : धार भोजशाला विवाद गरमाया, SC बोला – नमाज का टाइम फिक्स रखो, पूजा को पूरा सम्मान दो

Dhar Bhojshala Controversy 2026 : भोजशाला में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज टकराव, सुप्रीम कोर्ट ने दिया सामंजस्य का सुझाव

Dhar Bhojshala Controversy 2026 : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है बसंत पंचमी और जुमे की नमाज का एक साथ पड़ना। 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन है, जिससे पूजा और नमाज को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की और एक अहम सुझाव दिया है। आइए इस पूरी खबर को आसान भाषा में समझते हैं।

भोजशाला क्या है और विवाद क्यों?

भोजशाला मध्य प्रदेश के धार शहर में एक ऐतिहासिक जगह है। हिंदू इसे माता सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानते हैं, जहां राजा भोज ने 11वीं सदी में बनवाया था। वहीं मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है और यहां सदियों से नमाज पढ़ी जाती है।

2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक आदेश जारी किया था। इसके मुताबिक:

  • हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा करने की इजाजत है।
  • मुस्लिमों को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति है।

लेकिन इस आदेश में एक समस्या है – जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, तो क्या होगा? इस बारे में ASI के आदेश में कुछ साफ नहीं कहा गया है। इसी वजह से हर बार जब ऐसा होता है, तो विवाद बढ़ जाता है।

इस बार क्या हुआ?

2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को शुक्रवार को पड़ रही है। हिंदू संगठनों ने मांग की कि पूरे दिन सरस्वती पूजा हो और उस दिन नमाज पर रोक लगाई जाए। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूरे दिन पूजा की इजाजत मिलनी चाहिए और मुस्लिमों को नमाज नहीं पढ़ने दी जाए। साथ ही ASI और राज्य सरकार से कड़ी सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की गई।

दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन को ज्ञापन दिया कि शुक्रवार होने के कारण दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज पढ़ी जाएगी। वे कहते हैं कि नमाज उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे रोका नहीं जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?

सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और मामले को गंभीरता से लिया। हालांकि कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया, लेकिन एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया।

कोर्ट ने कहा कि दोनों समुदायों के बीच सामंजस्य बनाना चाहिए। जुमे की नमाज का समय फिक्स रखा जाए, ताकि पूजा और नमाज में टकराव न हो। कोर्ट ने ASI और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि वे दोनों पक्षों से बातचीत करें और एक ऐसा समय तय करें जहां दोनों की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ASI के 2003 के आदेश में जहां शुक्रवार और बसंत पंचमी का टकराव हो, वहां स्पष्ट दिशानिर्देश होने चाहिए। मुख्य मामले की सुनवाई बाद में होगी, लेकिन इस मौके पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया गया।

प्रशासन ने क्या इंतजाम किए?

धार जिले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हजारों पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है। भोजशाला परिसर के आसपास भारी बल है। प्रशासन दोनों पक्षों से लगातार बात कर रहा है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। पहले भी ऐसे मौकों पर तनाव हुआ है, इसलिए इस बार अलर्ट मोड पर है।

दोनों पक्षों की बात

  • हिंदू पक्ष का कहना है कि बसंत पंचमी सरस्वती माता का विशेष दिन है। पूरे दिन पूजा-अर्चना होनी चाहिए। नमाज से पूजा में बाधा पड़ती है।
  • मुस्लिम पक्ष कहता है कि जुमे की नमाज हर शुक्रवार जरूरी है। यह उनका धार्मिक अधिकार है और सीमित समय में नमाज पढ़ी जाती है, जो पूजा में ज्यादा असर नहीं डालती।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का सुझाव है कि जुमे की नमाज का समय तय रहे, लेकिन पूजा को भी पूरा सम्मान मिले। हो सकता है कि प्रशासन दोनों के लिए अलग-अलग समय स्लॉट तय करे, जैसे पहले पूजा ज्यादा समय और फिर नमाज। मुख्य विवाद – भोजशाला किसकी है – अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ASI ने सर्वे किया था, जिसमें हिंदू प्रतीक मिले हैं, लेकिन फैसला होना बाकी है।

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