Pakistan External Debt: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन दिनों बहुत मुश्किल हाल में है। देश पर इतना ज्यादा कर्ज चढ़ गया है कि वो बार-बार आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) के दरवाजे खटखटा रहा है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान का बाहरी कर्ज (external debt) तेजी से बढ़ा है। 2011 में ये करीब 66 अरब डॉलर था, जो 2023-2024 तक बढ़कर 130-135 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया। 2025 में ये और बढ़कर 134-135 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। ये कर्ज इतना बड़ा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है – ब्याज चुकाने में ही सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा चला जाता है।
सवाल ये है कि पाकिस्तान पर सबसे ज्यादा किस-किस का कर्ज है? कौन से देश और संस्थाएं सबसे बड़े कर्जदाता हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरी कहानी, ताजा आंकड़ों के साथ।

पाकिस्तान का कुल बाहरी कर्ज कितना है?/Pakistan External Debt
2025 के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान का कुल बाहरी कर्ज (external debt and liabilities) करीब 134-135 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 113-115 लाख करोड़ रुपये) है। ये कर्ज कई हिस्सों में बंटा है:
- बहुपक्षीय संस्थाएं: कुल कर्ज का करीब 30-35%।
- द्विपक्षीय कर्ज (सीधे देशों से): करीब 19-22%।
- आईएमएफ से कर्ज: कुल का 5-7%।
- बाकी निजी बैंक, बॉन्ड्स आदि से।
पिछले 12-15 सालों में ये कर्ज दोगुना हो गया है, जिसकी वजह विकास परियोजनाएं, आर्थिक संकट, बाढ़ जैसी आपदाएं और खराब नीतियां हैं।
सबसे बड़ा कर्जदाता: चीन – नंबर 1 पर!
पाकिस्तान पर सबसे ज्यादा कर्ज चीन का है। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा द्विपक्षीय (bilateral) कर्जदाता है। ताजा रिपोर्ट्स (वर्ल्ड बैंक 2024-2025) के अनुसार:
- चीन का बकाया: करीब 28-30 अरब डॉलर (लगभग 25-28 लाख करोड़ रुपये)।
- कुल बाहरी कर्ज में पाकिस्तान के पास चीन का हिस्सा: 22%।
- CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) के तहत सड़कें, बंदरगाह, बिजली प्रोजेक्ट्स के लिए लिया गया कर्ज मुख्य वजह है।
कई विशेषज्ञ इसे “डेट ट्रैप” कहते हैं, क्योंकि चीन से लिया कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है। फिर भी, चीन ने कई बार कर्ज रोलओवर (मौजूदा कर्ज को नया करके बढ़ाना) किया है।
दूसरे नंबर पर: सऊदी अरब और अन्य दोस्त देश
- *सऊदी अरब: दूसरे बड़े द्विपक्षीय कर्जदाता। बकाया: करीब 9-10 अरब डॉलर (7% हिस्सा)।
सऊदी अरब ने तेल क्रेडिट और डिपॉजिट के जरिए मदद की है, खासकर संकट के समय। - यूएई (संयुक्त अरब अमीरात): भी बड़ा कर्जदाता, लेकिन आंकड़े कम हैं – अरबों डॉलर में।
- जापान: पुराना कर्जदाता, बकाया करीब 3-4 अरब डॉलर।
- फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका: छोटे-मोटे कर्ज, लेकिन कुल मिलाकर महत्वपूर्ण।
द्विपक्षीय कर्ज में चीन का 57-60% हिस्सा था पहले, लेकिन अब कुल में 22% रह गया है क्योंकि बहुपक्षीय कर्ज भी बढ़ा है।
बहुपक्षीय संस्थाएं: आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक का बड़ा रोल
- आईएमएफ (IMF): पाकिस्तान आईएमएफ का तीसरा सबसे बड़ा कर्जदार है। बकाया: करीब 7-8 अरब डॉलर। 2023 में 7 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज, 2024-2025 में और एक्सटेंशन। पाकिस्तान कई बार आईएमएफ प्रोग्राम में रहा है।
- वर्ल्ड बैंक: कुल कर्ज का 18% हिस्सा, करीब 23-24 अरब डॉलर। जलवायु परिवर्तन, विकास प्रोजेक्ट्स के लिए।
- एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB): 15% हिस्सा, करीब 19-20 अरब डॉलर।
ये संस्थाएं सस्ता कर्ज देती हैं, लेकिन शर्तें सख्त होती हैं – जैसे टैक्स बढ़ाना, सब्सिडी कम करना।
कर्ज बढ़ने की वजहें क्या हैं?
पाकिस्तान का कर्ज बढ़ने के पीछे कई कारण हैं:
- विकास परियोजनाएं (CPEC जैसे बड़े प्रोजेक्ट)।
- आर्थिक संकट, महंगाई, कम टैक्स कलेक्शन।
- प्राकृतिक आपदाएं (बाढ़ आदि)।
- राजनीतिक अस्थिरता और खराब नीतियां।
- विदेशी मुद्रा भंडार कम होना – कर्ज चुकाने में दिक्कत।
अब पाकिस्तान को अगले 5 सालों में 70 अरब डॉलर चुकाने हैं, जबकि रिजर्व सिर्फ 10-15 अरब डॉलर हैं।
निष्कर्ष
पाकिस्तान पर सबसे ज्यादा कर्ज चीन का है, उसके बाद सऊदी अरब, आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक। कुल मिलाकर, चीन और बहुपक्षीय संस्थाएं सबसे बड़े कर्जदाता हैं। ये स्थिति चिंताजनक है क्योंकि कर्ज चुकाने के लिए और कर्ज लेना पड़ रहा है – एक चक्र चल रहा है।










