NIPUN Bharat Mission : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ब्लॉक संसाधन केंद्र घुरवारा, डलमऊ में 21 फरवरी 2026 को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं नोडल अध्यापकों के लिए दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य फोकस केंद्र सरकार के निपुण भारत मिशन के अंतर्गत ‘वंडर बॉक्स’ का प्रभावी उपयोग सिखाना था। यह प्रयास 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए प्री-प्राइमरी शिक्षा को पूरी तरह खेल-आधारित बनाने का हिस्सा है, जिससे बच्चों में भाषा विकास, साक्षरता और संज्ञानात्मक क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।
निपुण भारत मिशन: प्रारंभिक शिक्षा का मजबूत आधार

निपुण भारत मिशन (National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy) शिक्षा मंत्रालय द्वारा जुलाई 2021 में शुरू किया गया एक राष्ट्रीय अभियान है। इसका लक्ष्य 2026-27 तक कक्षा 3 के अंत तक प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता (Foundational Literacy) और संख्यात्मकता (Foundational Numeracy) प्रदान करना है। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप यह मिशन 3 से 9 वर्ष के बच्चों पर केंद्रित है, जिसमें आंगनवाड़ी से लेकर प्राथमिक स्कूल तक के बच्चे शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में इस मिशन को तेजी से लागू किया जा रहा है। राज्य सरकार बालवाटिका (Balvatika) को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है, जहां खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चे सीखते हैं। वंडर बॉक्स इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शिक्षण सामग्री (TLM – Teaching Learning Material) है, जो FLN (Foundational Literacy and Numeracy) लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक साबित हो रहा है। यह बॉक्स विभिन्न खेल सामग्रियों, पजल्स, कार्ड्स, आकृतियों और गतिविधि-आधारित टूल्स से भरा होता है, जो बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ना, लिखना और गिनती सिखाता है।
कार्यशाला में क्या हुआ? व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर
खंड शिक्षा अधिकारी डलमऊ नंदलाल रजक ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए प्री-प्राइमरी शिक्षा को खेल-आधारित बनाने हेतु यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “वंडर बॉक्स के माध्यम से बच्चों में भाषा विकास, साक्षरता तथा संज्ञानात्मक क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह न केवल सीखने की प्रक्रिया को मजेदार बनाता है, बल्कि बच्चों की रुचि को स्वाभाविक रूप से बढ़ाता है।”
कार्यशाला में संदर्भ दाता एआरपी राजेश कुमार और पूर्व एआरपी मोहम्मद इरफान खान ने वंडर बॉक्स की विभिन्न सामग्रियों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को हाथों-हाथ गतिविधियां कराई गईं, जैसे जोड़े बनाना (Matching Pairs), आकृतियों से खेल, रंगों की पहचान, कहानी सुनाना और सरल गणितीय गतिविधियां। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को आकर्षक बनाने पर फोकस किया गया।
प्रशिक्षण में शामिल आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और नोडल अध्यापकों ने बताया कि वंडर बॉक्स का उपयोग करके वे अब कक्षा में बच्चों को बोरियत से दूर रख सकेंगे। एक कार्यकर्ता ने कहा कि पहले बच्चे रट्टा मार लेते थे, लेकिन अब खेल-खेल में सीख जाएंगे। इससे उनकी एकाग्रता और रचनात्मकता बढ़ेगी।
प्रारंभिक शिक्षा में सुधार की क्या उम्मीद है
यह दो दिवसीय कार्यशाला आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और नोडल अध्यापकों को बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार कर रही है। निपुण भारत मिशन के तहत ऐसे प्रशिक्षण पूरे प्रदेश में चल रहे हैं, जिससे प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की मजबूत उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वंडर बॉक्स जैसी सामग्रियों का सही उपयोग किया जाए, तो ग्रामीण इलाकों में भी बच्चों का ड्रॉपआउट रेट कम होगा और वे आगे की कक्षाओं के लिए बेहतर तैयार होंगे। रायबरेली जैसे जिलों में ऐसे प्रयास स्थानीय स्तर पर शिक्षा क्रांति ला सकते हैं।










