President Droupadi Murmu Insult: ममता ने राष्ट्रपति को ‘छोटी बहन’ कहा, फिर भी अपमान? झारखंड में जलाया ममता बनर्जी का पुतला

President Droupadi Murmu Insult: राष्ट्रपति के सम्मान पर सवाल, भाजपा का तीखा विरोध

President Droupadi Murmu Insult: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बीच हाल ही में हुए विवाद ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। यह मामला तब और गरमा गया जब राष्ट्रपति मुर्मू ने उत्तर बंगाल में 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का स्थान आखिरी समय में बदल दिया गया, जिससे संथाल समुदाय के लोग ज्यादा संख्या में नहीं पहुंच पाए। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों के न आने पर भी दुख जताया। राष्ट्रपति ने ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन बताते हुए कहा कि शायद वे उनसे नाराज हैं, इसलिए ऐसा हुआ।

इस टिप्पणी के बाद भाजपा ने इसे राष्ट्रपति का अपमान और आदिवासी गौरव पर हमला बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “शर्मनाक और अभूतपूर्व” करार दिया और कहा कि टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी टीएमसी पर अनियंत्रित व्यवहार का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि राष्ट्रपति, जो खुद संथाल आदिवासी समुदाय से हैं, का इस तरह व्यवहार करना न सिर्फ संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के अपमान जैसा है।

झारखंड के रामगढ़ में पुतला दहन के साथ की नारेबाजी/President Droupadi Murmu Insult

इस विवाद का असर पड़ोसी राज्य झारखंड में भी दिखा। झारखंड के रामगढ़ जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुतला फूंका और जमकर नारे लगाए। यह प्रदर्शन सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं था, बल्कि राष्ट्रपति पद की गरिमा और आदिवासी सम्मान से जुड़ा मुद्दा बन गया।

रामगढ़ में हुए इस धरने-प्रदर्शन में भाजपा के महिला और पुरुष कार्यकर्ता साथ-साथ शामिल हुए। खास तौर पर भाजपा के एसटी (अनुसूचित जनजाति) मोर्चा के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे। उनका कहना था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं और उनका अपमान पूरे आदिवासी समाज का अपमान है।

भाजपा एसटी मोर्चा के रामगढ़ जिलाध्यक्ष शंकर करमाली ने कहा, ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति का जो अपमान किया है, वह आदिवासियों के गौरव पर चोट है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। राष्ट्रपति हमारे लिए सम्मान का प्रतीक हैं, उनका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी तरह भाजपा नेता रंजन सिंह फौजी ने नारेबाजी के बीच कहा, यह सिर्फ ममता बनर्जी का नहीं, बल्कि पूरे देश के राष्ट्रपति का अपमान है। भाजपा हर स्तर पर इसकी आवाज उठाएगी।

रामगढ़ भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिंह बावला ने बताया, यह प्रदर्शन रामगढ़ की सड़कों पर एक संदेश देने के लिए था। ममता बनर्जी को समझना होगा कि राष्ट्रपति जैसे उच्च पद का सम्मान करना हर नागरिक का फर्ज है। हम आने वाले समय में ऐसे और कार्यक्रम करेंगे ताकि यह मुद्दा दब न जाए।”

विवाद की पूरी कहानी क्या है?

दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में गई थीं। कार्यक्रम गोसाइपुर में होना था, लेकिन आखिरी समय में जगह बदल दी गई। राष्ट्रपति ने कहा कि नया स्थान दूर और छोटा था, जिससे संथाल लोग ज्यादा नहीं आ पाए। उन्होंने दुख जताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या कोई मंत्री स्वागत के लिए नहीं आईं, जो सामान्य प्रोटोकॉल है।

राष्ट्रपति ने कहा, मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता दीदी मेरी छोटी बहन हैं। नहीं पता वे मुझसे नाराज हैं या नहीं, लेकिन ऐसा होना दुखद है।

इस पर ममता बनर्जी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रपति का इस्तेमाल बंगाल को बदनाम करने के लिए कर रही है। ममता ने राष्ट्रपति से कहा कि चुनाव के समय राजनीति न करें और भाजपा के इशारे पर न बोलें। उन्होंने आदिवासियों के मुद्दे पर भाजपा शासित राज्यों में होने वाली घटनाओं का हवाला दिया।

भाजपा का क्या कहना है

रामगढ़ में पुतला दहन जैसे कार्यक्रमों से साफ है कि भाजपा इस मुद्दे को लंबे समय तक जिंदा रखना चाहती है। खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में यह भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा बन सकता है। रामगढ़ जैसे जिलों में आदिवासी वोटरों की अच्छी संख्या है, और भाजपा एसटी मोर्चा सक्रिय होकर इस मुद्दे को उठा रही है।

कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसे विरोध से ममता बनर्जी पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले समय में चुनावों में इसका असर दिखेगा। भाजपा का दावा है कि यह अपमान न सिर्फ राष्ट्रपति का है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की गरिमा का भी है।

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