India LPG Tanker Nanda Devi : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकल गया है। इससे पहले इसी मार्ग से भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ भी सफलतापूर्वक गुजर चुका है। दोनों जहाजों का सुरक्षित पार होना भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल मार्गों में गिना जाता है।
46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहा है जहाज

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ‘नंदा देवी’ जहाज 46,000 मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। यह गैस घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है और देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े टैंकरों का सुरक्षित रूप से गुजरना ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।
भारतीय नौसेना की निगरानी में हो रहा ट्रांजिट
सूत्रों से पता चला है कि इन जहाजों को भारतीय नौसेना के नेवल एसेट्स द्वारा करीब से गाइड किया जा रहा है। संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से गुजरते समय सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, ‘शिवालिक’ जहाज अब खुले समुद्र में पहुंच चुका है और अगले दो दिनों के भीतर भारत के किसी बंदरगाह पर पहुंच सकता है।
भारत-ईरान बातचीत का दिखा असर
इस घटनाक्रम के पीछे भारत और ईरान के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत को भी अहम माना जा रहा है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया गया।
ईरान के राजदूत ने दिया भरोसा
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतली ने भी संकेत दिया था कि भारतीय जहाजों को जल्द सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के क्षेत्रीय हित कई मामलों में समान हैं और दोनों देश सहयोग के जरिए स्थिरता बनाए रखना चाहते हैं। राजदूत ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में सहयोग किया है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाला मार्ग भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में भारतीय टैंकरों का सुरक्षित ट्रांजिट यह संकेत देता है कि संकट के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।










