रायबरेली हाईवे बना खतरे का रास्ता: सिविल लाइन से सारस तक धंसे नाले, रोज़ हादसे का डर

टूटे ढक्कन, बाहर निकली सरिया और जलभराव ने बढ़ाई परेशानी; प्रशासन की अनदेखी पर स्थानीय लोगों में नाराज़गी

रायबरेली का लखनऊ-प्रयागराज हाईवे इन दिनों लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि जोखिम का रास्ता बन गया है। सिविल लाइन चौराहे से लेकर सारस चौराहे तक सड़क किनारे बने नाले पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। बुधवार सुबह करीब 10 बजे एक चार पहिया वाहन नाले में धंस गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

टूटे पत्थर और बाहर निकली सरिया बन रहे जानलेवा

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि नालों के ऊपर रखे पत्थर अब अपनी जगह पर नहीं हैं। कई पत्थर टूटकर अंदर गिर चुके हैं, जबकि कुछ असंतुलित हालत में पड़े हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इन पत्थरों के टूटने से लोहे की सरिया बाहर निकल आई है, जो राहगीरों और खासकर दोपहिया चालकों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। कई लोग इनसे टकराकर घायल भी हो चुके हैं।

जल निकासी ठप, सड़क बनी फिसलन भरी

नालों के ध्वस्त होने का असर सिर्फ संरचना तक सीमित नहीं है। जल निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे पानी सड़क पर ही बहने लगा है। नतीजा यह है कि सड़क पर फिसलन बढ़ गई है और वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं। बारिश या नमी के समय यह स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

आसपास के दुकानदारों और राहगीरों ने प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और विभाग को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे आम जनता की जान जोखिम में पड़ रही है।

लोगों की प्रमुख मांगें

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कुछ जरूरी कदम सुझाए हैं:

  • नालों की तुरंत सफाई और मरम्मत कराई जाए
  • टूटे हुए पत्थरों को हटाकर मजबूत ढक्कन लगाए जाएं
  • बाहर निकली लोहे की सरिया को हटाया जाए
  • जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए

अनदेखी पड़ सकती है भारी

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह इलाका किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। फिलहाल स्थिति यह है कि लोग जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। प्रशासन की लापरवाही अब सवालों के घेरे में है और लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही।

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