रायबरेली जिले के निजी स्कूलों में फीस के साथ-साथ किताबों, ड्रेस और स्टेशनरी की खरीद को लेकर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले जाने का मामला सामने आया है। शहर स्थित शुभम बुक डिपो सहित अन्य जगहों के बुक डिपो पर समय करीब 9:00 बजे अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा तय दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जहां बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत वसूली जा रही है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के निवासी विनय सिंह, आकाश कुमार, मनोज कुमार, संजय सिंह सहित अन्य अभिभावकों ने बताया कि जिन किताबों की कीमत सामान्यतः ₹1000 से ₹1500 होनी चाहिए, उन्हें ₹10,000 से ₹12,000 तक में उपलब्ध कराया जा रहा है। उनका कहना है कि यह अंतर स्कूल प्रबंधन और संबंधित दुकानदारों के बीच कमीशन के कारण है।

अभिभावकों के अनुसार, हर वर्ष पुस्तकों में बदलाव कर दिया जाता है, जिससे पुराने सत्र की किताबें अनुपयोगी हो जाती हैं और अभिभावकों को नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा स्कूल ड्रेस और स्टेशनरी भी निर्धारित दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जहां कीमतें अधिक हैं।
यह भी आरोप है कि कई स्कूलों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें लागू की जा रही हैं, जो शासन की मंशा के विपरीत है। अभिभावकों का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्कूल प्रबंधन के हौसले बुलंद हैं।
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच कर दोषी स्कूलों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा किताबों और ड्रेस की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।










