हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी की लेटलतीफी से यात्री परेशान, 580 दिनों से रेल मंत्री को लगातार भेज रहे शिकायत

बड़बिल-हावड़ा जनशताब्दी की लगातार देरी से परेशान यात्रियों की आवाज बना स्थानीय समाजसेवी, सोशल मीडिया के जरिए 580 दिनों से लगातार उठा रहे मुद्दा

बड़बिल: ओडिशा और झारखंड के लौहांचल क्षेत्र के हजारों यात्रियों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस पिछले करीब चार वर्षों से समयपालन की चुनौती से जूझ रही है। ट्रेन की लगातार देरी से रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पाने के कारण उनके दैनिक कार्यों पर सीधा असर पड़ता है।

580 दिनों से लगातार उठा रहे हैं आवाज

इस समस्या को लेकर बड़बिल के एक समाजसेवी ने अनोखी पहल शुरू की है। वह पिछले 580 दिनों से लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर रेल मंत्री, रेल मंत्रालय, दक्षिण पूर्व रेलवे जोन और संबंधित रेल मंडल के अधिकारियों को टैग कर जनशताब्दी के समय पर संचालन की मांग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल शिकायत करना नहीं, बल्कि इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान कराना है।

कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन पूरी राहत नहीं

समाजसेवी के लगातार प्रयासों के बाद ट्रेन के संचालन में पहले की तुलना में कुछ सुधार जरूर देखने को मिला है। कई दिनों में ट्रेन पहले से कम देरी से चल रही है, लेकिन यात्रियों का कहना है कि यह सुधार पर्याप्त नहीं है। खासकर सप्ताह के बुधवार और रविवार को जनशताब्दी अब भी काफी देर से अपने अंतिम स्टेशन बड़बिल पहुंचती है, जिससे लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बनी हुई है।

स्टेशनों पर लंबा ठहराव बना देरी की बड़ी वजह

स्थानीय यात्रियों के अनुसार, हावड़ा से रवाना होने के बाद जनशताब्दी एक्सप्रेस को कई प्रमुख स्टेशनों पर जरूरत से ज्यादा देर तक रोका जाता है। यही वजह है कि ट्रेन अपनी निर्धारित गति और समय सारिणी को बनाए नहीं रख पाती। रेलवे यदि परिचालन व्यवस्था और सिग्नल प्रबंधन में सुधार करे तो ट्रेन को समय पर चलाना संभव हो सकता है।

यात्रियों की प्रमुख मांगें

यात्रियों और स्थानीय लोगों की ओर से रेलवे से दो प्रमुख मांगें लगातार उठाई जा रही हैं—

  • हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी के परिचालन की नियमित समीक्षा कर समयपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • जिन स्टेशनों पर अनावश्यक ठहराव हो रहा है, वहां परिचालन व्यवस्था में सुधार कर ट्रेन को प्राथमिकता दी जाए।

रेलवे से स्थायी समाधान की उम्मीद

लौहांचल क्षेत्र के लोगों का मानना है कि जनशताब्दी केवल एक ट्रेन नहीं बल्कि हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी सेवा है। ऐसे में रेलवे प्रशासन को इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान निकालना चाहिए। यात्रियों को उम्मीद है कि लगातार उठ रही आवाज और जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, ताकि वर्षों से चली आ रही लेटलतीफी की समस्या समाप्त हो सके।

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