CWG 2026: गोल्ड से चूके जादूमणि, लेकिन सिल्वर जीतकर रच दिया इतिहास; ₹500 के इनाम से शुरू हुआ था सफर

CWG 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाज जादूमणि सिंह मंदेंगबाम ने 55 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा। जानिए ₹500 के इनाम से शुरू हुए उनके संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी।

CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम लगातार दमदार प्रदर्शन कर रही है। प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया के स्वर्ण पदकों के बाद अब जादूमणि सिंह मंदेंगबाम ने रजत पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में एक और अहम उपलब्धि जोड़ दी। भले ही फाइनल में उन्हें गोल्ड से चूकना पड़ा, लेकिन जिस आत्मविश्वास और जज्बे के साथ उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में मुकाबले खेले, उसने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

फाइनल तक का सफर रहा बेहद दमदार

55 किलोग्राम वर्ग में उतरे जादूमणि ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। शुरुआती मुकाबलों में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को एकतरफा अंदाज में हराते हुए यह संकेत दे दिया था कि वह खिताब के बड़े दावेदार हैं। सेमीफाइनल में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा और उन्होंने शानदार जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई।

हालांकि खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के खिलाफ उन्हें करीबी मुकाबले में हार झेलनी पड़ी। इसके बावजूद सिल्वर मेडल जीतना उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया।

ये फैसला बना करियर का सबसे बड़ा दांव

हर खिलाड़ी के करियर में कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो भविष्य तय करते हैं। जादूमणि के लिए 50 किलोग्राम से 55 किलोग्राम वर्ग में जाना ऐसा ही निर्णय था। कई लोगों ने इस बदलाव को जोखिम बताया, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर भरोसा बनाए रखा।

उन्होंने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर नए वर्ग में सफल नहीं हुए तो शायद बॉक्सिंग छोड़ देंगे। लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि बड़े फैसले अक्सर बड़े परिणाम भी लेकर आते हैं।

500 की छोटी-सी प्रेरणा ने बदल दी पूरी जिंदगी

आज जिस खिलाड़ी का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिया जा रहा है, उसकी शुरुआत बेहद साधारण रही थी। जादूमणि का पहला सपना फुटबॉल खेलना था, लेकिन परिवार की सलाह ने उन्हें बॉक्सिंग की ओर मोड़ दिया।

साल 2016 में इंफाल में आयोजित एक प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद भारत की दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम और एल. सरिता देवी ने उन्हें 500-500 रुपये देकर सम्मानित किया। रकम भले छोटी थी, लेकिन उस सम्मान ने उनके भीतर बड़ा सपना जगा दिया। वही पल उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

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