Indore Cyber ​​Fraud: इंदौर में KYC अपडेट के नाम पर 15 लाख की साइबर ठगी, समय पर शिकायत से पूरी रकम हुई फ्रीज

फर्जी ICICI Bank प्रोफाइल और APK फाइल के जरिए 64 वर्षीय रिटायर्ड महिला को बनाया निशाना, 1930 पर समय रहते सूचना देने से बची रकम

Indore Cyber ​​Fraud: इंदौर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने बैंक की KYC अपडेट कराने के बहाने 64 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला को निशाना बनाया। ठगों ने महिला से बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने के बाद खाते से करीब 15 लाख रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, पीड़िता की सतर्कता और समय पर शिकायत के चलते राज्य साइबर सेल ने पूरी रकम को फ्रीज करा दिया। इससे महिला को करीब 15 लाख रुपये की आर्थिक क्षति से बचा लिया गया।

बैंक अधिकारी बनकर किया फोन

विजय नगर निवासी और BSNL से सेवानिवृत्त 64 वर्षीय अधिकारी वंदना शर्मा के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम प्रदीप धुर्वे बताते हुए खुद को बैंक से जुड़ा व्यक्ति बताया। उसने महिला को ICICI बैंक खाते की KYC प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर बातों में उलझाया और आगे की कार्रवाई मोबाइल के जरिए कराने को कहा।

WhatsApp पर भेजी बैंक की फर्जी फाइल

ठगों ने इसके बाद WhatsApp का सहारा लिया। एक अन्य मोबाइल नंबर से बने WhatsApp प्रोफाइल पर “ICICI BANK” नाम और बैंक से मिलता-जुलता विवरण दिखाया गया। इसी के जरिए महिला को “ICICI BANK PAN UPDATE.apk” नाम की फाइल भेजी गई। जालसाजों ने इसे बैंक की जरूरी फाइल बताकर मोबाइल में खोलने के लिए कहा।

APK इंस्टॉल होते ही बढ़ा खतरा

फाइल खोलने के बाद महिला से उसमें मांगी गई जानकारी भरवाई गई। इसी दौरान उनसे डेबिट कार्ड से संबंधित विवरण और CVV जैसी संवेदनशील जानकारी भी दर्ज कराई गई। इसके बाद ठगों ने महिला को iMobile ऐप में लॉगिन करने के निर्देश दिए। उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों में मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग से छेड़छाड़ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

FD की रकम भी खाते में पहुंची

जांच में सामने आया कि महिला के खाते से जुड़ी FD की रकम भी खाते में क्रेडिट होने लगी। खाते में उपलब्ध राशि और FD से आई रकम को जालसाजों ने अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। इस तरह कुल ₹15,00,027 की रकम पर ठगों ने हाथ साफ करने की कोशिश की।

समय पर शिकायत से बच गए 15 लाख

खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने देरी नहीं की। उन्होंने तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क किया और राज्य साइबर सेल, इंदौर को भी सूचना दी। साइबर अपराध में शुरुआती समय को बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि जल्द सूचना मिलने पर बैंकिंग लेनदेन को ट्रैक कर संबंधित खातों में मौजूद रकम को रोका जा सकता है।

साइबर सेल ने बैंक खातों में रकम रुकवाई

शिकायत मिलते ही राज्य साइबर पुलिस के जोनल कार्यालय इंदौर ने संबंधित बैंकों से संपर्क किया। पुलिस टीम ने पैसों के ट्रांजेक्शन की कड़ी यानी transaction trail की जांच की और रकम जिन-जिन खातों में पहुंची, वहां उपलब्ध धनराशि को तत्काल फ्रीज कराया। कार्रवाई समय पर होने के कारण ठग रकम निकालने में सफल नहीं हो सके।

डिजिटल साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू

पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, WhatsApp अकाउंट, फर्जी APK, मोबाइल डिवाइस, बैंक खातों और लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को जांच के दायरे में लिया है। मामले में 1 सितंबर 2026 को संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी गई है।

साइबर पुलिस ने लोगों को किया सावधान

राज्य साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि KYC, PAN अपडेट या बैंक खाता बंद होने जैसे किसी भी बहाने से भेजी गई APK फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल न करें। बैंक कर्मचारी बनकर फोन करने वाले किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, CVV, UPI PIN या कार्ड की जानकारी बिल्कुल न दें।

ध्यान रखने वाली दो जरूरी बातें:

  • खाते से अनधिकृत रकम निकलते ही तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
  • साथ ही संबंधित बैंक और नजदीकी पुलिस या साइबर थाना को तत्काल सूचना दें।

समय पर की गई शिकायत इस मामले में पीड़िता के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुई। साइबर पुलिस के अनुसार, ठगी के तुरंत बाद सूचना मिलने से रकम को फ्रीज कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

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