Raebareli: रायबरेली जिले में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए दिशा की बैठक शुरू होने से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया। बैठक स्थल के बाहर समाजवादी पार्टी के विधायक प्लाकार्ड लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। विधायक राहुल लोधी और श्याम सुंदर भारती ने सरकार और प्रशासन पर जिले की जमीनी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया।
विधायकों के हाथों में मौजूद प्लाकार्ड के जरिए बंद स्कूलों, फर्जी मुकदमों और जमीनों पर कब्जे जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शन के दौरान सपा विधायकों ने सवाल खड़ा किया कि जब आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है और लोग अपनी मूलभूत शिकायतों को लेकर परेशान हैं, तो फिर दिशा की बैठक में विकास की समीक्षा का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

बंद स्कूलों को लेकर सरकार पर निशाना
सपा विधायकों ने जिले में बंद स्कूलों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था किसी भी जिले के विकास की बुनियाद होती है, लेकिन यदि विद्यालय ही बंद हैं तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा? विधायकों ने सरकार से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
फर्जी मुकदमों और जमीन कब्जे का भी मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान फर्जी मुकदमों का आरोप भी जोर-शोर से उठाया गया। विधायकों का आरोप है कि आम लोगों को मुकदमों और प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके साथ ही जमीनों पर कब्जे के मामलों को लेकर भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए।
सपा विधायकों ने संकेत दिया कि विकास की बड़ी-बड़ी तस्वीरों और सरकारी दावों के बीच आम जनता की जमीनी परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका सवाल सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा रहा।
राहुल गांधी की अध्यक्षता में होनी है बैठक
गौरतलब है कि रायबरेली के सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अध्यक्षता में दिशा की बैठक होनी है। बैठक में जिले में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की प्रगति और विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा प्रस्तावित है।
ऐसे में बैठक शुरू होने से पहले ही सपा विधायकों का विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया। अब बड़ा सवाल यह है कि बैठक के दौरान इन मुद्दों को किस स्तर तक उठाया जाता है और संबंधित अधिकारी बंद स्कूलों, कथित फर्जी मुकदमों तथा जमीनों पर कब्जे के आरोपों पर क्या जवाब देते हैं।
दिशा की बैठक विकास की समीक्षा का मंच है, लेकिन बैठक से पहले सड़क पर दिखाई दिया यह विरोध बताता है कि सरकारी योजनाओं की फाइलों और जनता की जमीनी हकीकत के बीच अभी भी सवालों की खाई मौजूद है।










