Raebareli: रायबरेली के हरचंदपुर विधानसभा में श्रीरामचरितमानस कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अनंत श्री विभूषित श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर जगतगुरु रामस्वरूप आचार्य जी की अध्यक्षता में कथा का शुभारंभ हुआ। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों, संतों की महिमा और भक्ति के महत्व को सुनकर भावविभोर हो उठे। धार्मिक वातावरण के बीच देर रात तक कथा का आयोजन चलता रहा और श्रोता भक्ति रस में गोते लगाते रहे।
कथा के दौरान पूज्य जगतगुरु रामस्वरूप आचार्य जी ने संत चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए संतों की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत वही होता है, जिसके मन में किसी प्रकार की कामना, लोभ या सांसारिक स्वार्थ न हो। संत का जीवन त्याग, तपस्या, परोपकार और प्रभु भक्ति को समर्पित होता है। उन्होंने संत के आदर्शों की व्याख्या करते हुए बताया कि सच्चा संत सदैव भगवान के चरणों में अनुराग रखता है और अपने आचरण से समाज को धर्म, सदाचार तथा मानवता का मार्ग दिखाता है। जगतगुरु जी के ओजस्वी और भावपूर्ण उद्बोधन ने श्रद्धालुओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा।

कथा के दौरान रामू संजय सिंह ने राम नाम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीराम को ब्रह्म के स्वरूप के रूप में प्रतिष्ठित करते हुए राम नाम के आध्यात्मिक महत्व और उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उनके प्रवचन में भक्ति, श्रद्धा और प्रभु के प्रति समर्पण का भाव प्रमुख रूप से दिखाई दिया।
वहीं, पंडित गौरी शंकर शुक्ला जी ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का भव्य एवं संगीतमय प्रवचन प्रस्तुत किया। उनके मधुर भजनों और भावपूर्ण वर्णन ने कथा स्थल को भक्तिमय बना दिया। राम जन्मोत्सव के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को आनंद और उल्लास से भर दिया। उपस्थित भक्तों ने प्रभु श्रीराम के जयकारों के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
अवध से पधारे डॉ. अंबिकेश त्रिपाठी ने मंच संचालन की जिम्मेदारी निभाते हुए दिव्य हनुमत चरित्र का आकर्षक संगीतमय प्रवचन प्रस्तुत किया। उन्होंने भगवान हनुमान के अद्भुत पराक्रम, प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति, समर्पण और सेवाभाव का वर्णन किया। उनके प्रवचन ने श्रद्धालुओं को भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
जबलपुर से पधारीं पूज्य दीदी शिरोमणि दुबे ने माता अनसूया के पवित्र उपदेशों का वर्णन करते हुए नारी धर्म, संस्कार, संयम और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में नारी को त्याग, ममता, शक्ति और संस्कारों का प्रतीक माना गया है। उनके प्रवचन में पारिवारिक जीवन में धर्म, योग और आध्यात्मिक साधना की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
इसी क्रम में चित्रकूट धाम से पधारे पंडित यज्ञेश मिश्रा ने माता सीता के चरित्र का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता सीता के त्याग, धैर्य, पतिव्रता धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया।
श्याम सेवा समिति ने जगतगुरु का किया अभिनंदन
श्रीरामचरितमानस कथा के द्वितीय दिवस पर श्याम सेवा समिति की ओर से पूज्य जगतगुरु रामस्वरूप आचार्य जी का विशिष्ट अभिनंदन किया गया। इस दौरान जगतगुरु जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
पूरे शिव परिवार सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ श्रीरामचरितमानस कथा का श्रवण किया। कथा स्थल पर पूरे समय धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल बना रहा। भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी के जयकारों से वातावरण गुंजायमान होता रहा।
कथा के दूसरे दिन संत चरित्र, राम नाम की महिमा, श्रीराम जन्मोत्सव, हनुमत चरित्र, माता अनसूया के उपदेश और माता सीता के आदर्श जीवन से जुड़े प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। मध्य रात्रि तक बड़ी संख्या में श्रोता कथा पंडाल में मौजूद रहे और भक्ति रस में सराबोर होकर प्रभु श्रीराम की महिमा का गुणगान करते रहे।










