Swami Prasad Maurya Political Journey: संघर्ष से सत्ता तक, फिर नए राजनीतिक मोर्चे की ओर बढ़ता रहा स्वामी प्रसाद मौर्य का सफर

पांच बार विधायक रहे, मंत्री से लेकर लोकसभा चुनाव तक आजमाया राजनीतिक मैदान; डलमऊ से शुरू हुई सियासी पारी पडरौना, फाजिलनगर और कुशीनगर तक पहुंची

Swami Prasad Maurya Political Journey: उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम उन नेताओं में शामिल रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। एक शिक्षक और अधिवक्ता के रूप में शुरुआत करने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और देखते ही देखते उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में अपनी पहचान बनाई। सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों की भागीदारी, समानता और वंचित तबकों के अधिकार उनके राजनीतिक विमर्श के प्रमुख मुद्दे रहे हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य की चुनावी यात्रा की शुरुआत 1996 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली की डलमऊ सीट से हुई। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने 52,477 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के गजाधर सिंह को 48,480 वोट मिले। मौर्य ने 3,997 मतों के अंतर से चुनाव जीता।

इसके बाद 2002 के विधानसभा चुनाव (Assembly By-Election) में भी डलमऊ से बसपा प्रत्याशी के रूप में उन्होंने जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्हें 42,723 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी अजई पाल सिंह (Ajai Pal Singh) को 42,552 वोट मिले। जीत का अंतर महज 171 वोट रहा। यह मुकाबला उनके राजनीतिक सफर के सबसे करीबी चुनावी मुकाबलों में गिना जाता है।

पडरौना ने बदली सियासी जमीन

डलमऊ के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) की राजनीति का प्रमुख केंद्र पूर्वांचल बना। 2009 के पडरौना विधानसभा उपचुनाव (Padrauna Assembly By-Election) में बसपा के टिकट पर उन्होंने जीत दर्ज की। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार इस चुनाव में उन्हें 81,039 वोट मिले और वे विधायक चुने गए।

इसी वर्ष उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा। 2009 के लोकसभा चुनाव में कुशीनगर सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में उन्होंने चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक पहुंच को विधानसभा से लोकसभा तक बढ़ाने का प्रयास किया। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड में उन्हें 51,658 वोट दर्ज हैं।

इसके बाद 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पडरौना सीट से बसपा के टिकट पर स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने दोबारा जीत दर्ज की। उन्हें 42,184 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के राजेश कुमार जायसवाल को 34,022 वोट मिले। जीत का अंतर 8,162 वोट रहा।

भाजपा में गए तो फिर पडरौना से ही जीत

राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने बसपा छोड़कर भाजपा का रुख किया। 2017 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में पडरौना (Padrauna) सीट से भाजपा (BJP) प्रत्याशी के रूप में उन्होंने फिर जीत दर्ज की। निर्वाचन आयोग (Election Commission) के आंकड़ों के अनुसार उन्हें 93,649 वोट मिले, जबकि बसपा के जावेद इकबाल को 53,097 वोट मिले। मौर्य ने 40,552 वोटों के अंतर से चुनाव जीता।

2017 के बाद वे उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। इस दौर में सरकार के भीतर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

2022 में फाजिलनगर से चुनाव, नहीं मिली जीत

2022 के विधानसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने अपनी परंपरागत पडरौना (Padrauna) सीट के बजाय फाजिलनगर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें 71,015 वोट मिले। भाजपा के सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने 1,16,029 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। मौर्य 45,014 वोटों के अंतर से दूसरे स्थान पर रहे।

2024 में लोकसभा की ओर वापसी

2024 के लोकसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने एक बार फिर लोकसभा की राजनीति में वापसी की कोशिश की। उन्होंने कुशीनगर लोकसभा सीट से राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (RSOSP) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।

कुशीनगर में भाजपा के विजय कुमार दुबे को 5,16,345 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अजय प्रताप सिंह दूसरे स्थान पर रहे, जबकि स्वामी प्रसाद मौर्य को 36,575 वोट मिले।

पांच चुनावी जीत, कई राजनीतिक पड़ाव

उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने विधानसभा चुनावों में पांच बार जीत दर्ज की—1996 और 2002 में डलमऊ, 2009 के उपचुनाव में पडरौना, 2012 में पडरौना और 2017 में पडरौना से। 2022 के फाजिलनगर विधानसभा चुनाव और 2024 के कुशीनगर लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

उनका राजनीतिक सफर केवल चुनाव जीतने और हारने तक सीमित नहीं रहा। अलग-अलग समय में उन्होंने बसपा, भाजपा (BJP) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) समेत विभिन्न राजनीतिक मंचों पर काम किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में रहते हुए उन्होंने अपनी राजनीति को सामाजिक न्याय और पिछड़े-वंचित वर्गों की भागीदारी के मुद्दों से जोड़े रखा।
महत्वपूर्ण तथ्य: उपलब्ध निर्वाचन रिकॉर्ड में 2007 के पडरौना विधानसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) प्रत्याशी नहीं थे। इसलिए उनके व्यक्तिगत चुनावी सफर में 2007 को अलग चुनाव के रूप में जोड़ना सही नहीं होगा। इसी वजह से आपके मूल मसौदे में दिए गए “कुल 9 चुनाव” के बजाय सत्यापित रिकॉर्ड के आधार पर ऊपर 8 चुनावी मुकाबले दर्ज किए गए हैं।

परिचय

नाम: स्वामी प्रसाद मौर्य
राजनीतिक पहचान: उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और लंबे समय तक विधायक रहे नेता
शैक्षिक पृष्ठभूमि: परास्नातक तथा एलएलबी; उपलब्ध चुनावी हलफनामे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए एवं एलएलबी की जानकारी दर्ज है।
विधानसभा चुनावों में जीत: पांच
प्रमुख विधानसभा क्षेत्र: डलमऊ और पडरौना
2022: फाजिलनगर से सपा प्रत्याशी
2024: कुशीनगर (Kushinagar) से लोकसभा प्रत्याशी, राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी

स्वामी प्रसाद मौर्य की राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश की बदलती सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के साथ आगे बढ़ती रही। डलमऊ से शुरू हुआ उनका चुनावी सफर पडरौना और फाजिलनगर होते हुए लोकसभा तक पहुंचा। दल बदले, चुनावी क्षेत्र बदले और राजनीतिक परिस्थितियां भी बदलीं, लेकिन सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों की राजनीतिक भागीदारी उनके सार्वजनिक राजनीतिक विमर्श का प्रमुख हिस्सा बनी रही।

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