Raebareli: रायबरेली जिले के सरेनी क्षेत्र में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से सरेनी बाजार होते हुए शहीद स्मारक तक पदयात्रा निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सात फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री और यूनियन पदाधिकारियों के बीच हुए समझौते के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। मानदेय बढ़ाने, मातृत्व अवकाश देने, जीवन बीमा की राशि दो लाख रुपये से बढ़ाकर दस लाख रुपये करने, स्वास्थ्य बीमा और कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर सहमति बनी थी। इसके लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित की गई, लेकिन रिपोर्ट आने के बावजूद अंतिम बैठक नहीं बुलाई गई। इससे आशा कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

दो महीने से प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने का आरोप
आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले दो महीने से उन्हें प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया है। आयुष्मान कार्ड बनाने के कार्य का वर्ष 2018 से बकाया भुगतान, कोविड काल में घोषित एक हजार रुपये प्रतिमाह की राशि तथा आभा आईडी, सी-बैक, टीबी स्क्रीनिंग, फाइलेरिया, कुष्ठ रोग, पोलियो, दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण अभियानों से जुड़ी प्रोत्साहन राशि भी लंबित है। उनका कहना है कि आभा आईडी के लिए वर्ष 2023 का भुगतान अब तक नहीं हुआ, जबकि वर्ष 2024 की राशि का भी पूरा भुगतान नहीं किया गया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल, टीकाकरण तथा विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य अभियानों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें अपने काम के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
25 हजार रुपये मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने वर्तमान में मिलने वाली दो हजार रुपये की राशि के बजाय 25 हजार रुपये मासिक मानदेय देने, राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करने और सभी लंबित भुगतानों को तत्काल जारी करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में कम मानदेय पर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही उन्हें सामाजिक सुरक्षा, बीमा और बेहतर कार्य परिस्थितियों का लाभ भी मिलना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के ई-रिक्शा संबंधी बयान को लेकर भी आशा कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि ई-रिक्शा की जरूरत है तो आशा बहुएं मिलकर उन्हें ई-रिक्शा दिलाने में मदद कर देंगी। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और मानदेय से जुड़ी समस्याओं को सामने रखा।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो चुनाव में विरोध का ऐलान
आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और बकाया भुगतान नहीं हुआ, तो वे आगामी चुनाव में भाजपा सरकार के खिलाफ अभियान चलाएंगी। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की लड़ाई को और तेज किया जाएगा तथा मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
अब देखना यह है कि आशा कार्यकर्ताओं की मांगों और लंबित भुगतान को लेकर सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। प्रदर्शन में गीता सिंह, रेखा देवी और सुनीता सिंह सहित अन्य आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी समस्याएं रखीं।










