Ramgarh: हाथियों का तांडव जारी, सोनडीहा में धान और शकरकंद की फसलें खाकर किया बर्बाद, दहशत में ग्रामीण

चार दिन के भीतर दोबारा हाथियों के झुंड ने मचाई तबाही, ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा और पीड़ित किसानों ने मुआवजे की मांग की

Ramgarh: रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कई दिनों से हाथियों का झुंड ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। ताजा मामला सोनडीहा पंचायत के गरवाटांड़ गांव का है, जहां बीती रात करीब दो बजे हाथियों के झुंड ने धान और शकरकंद की फसलों को खाकर और रौंदकर बर्बाद कर दिया। घटना के बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

चार दिन पहले भी किसानों की फसलें की थीं बर्बाद

ग्रामीणों के अनुसार, करीब चार दिन पहले हाथियों के झुंड ने भुतही के पास डाली महतो, सुरेश पटेल और तापेश्वर महतो के खेतों में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया था। अभी किसान इस नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि हाथियों का झुंड दोबारा सोनडीहा पंचायत के गरवाटांड़ पहुंच गया और किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।

धान और शकरकंद की फसल खाकर किया बर्बाद

प्रभावित ग्रामीण झारी महतो, छोटन महतो, हीरालाल महतो और दीनू महतो का कहना है कि रात के अंधेरे में हाथियों के झुंड ने उनके खेतों में लगी धान और शकरकंद की फसल को खाकर तथा रौंदकर नष्ट कर दिया। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन और वन विभाग से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

जंगल में अब भी मौजूद है हाथियों का झुंड

ग्रामीणों का दावा है कि हाथियों के झुंड के कुछ सदस्य अभी भी पैलपत्थर के जंगल में मौजूद हैं, जबकि बाकी हाथी करमा-सुरंगिया पहाड़ की ओर स्थित जंगलों की तरफ चले गए हैं। हाथियों की मौजूदगी की आशंका के कारण लोग रात में घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्र से दूर सुरक्षित जंगलों की ओर ले जाने की मांग की है।

वन विभाग की व्यवस्था पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीण हीरालाल महतो और दीपन महतो ने वन विभाग तथा राज्य सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि हाथियों के लगातार गांवों में प्रवेश करने से लोगों की जान और फसलों पर खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था कराने की अपील की है।

जंगलों में कटाई और ब्लास्टिंग को भी बताया वजह

ग्रामीणों ने वन विभाग और स्थानीय व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हाथियों से बचाव के लिए उन्हें किसी तरह की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में जंगलों के पेड़-पौधों की कटाई और ब्लास्टिंग जैसी गतिविधियां जारी हैं, जिससे जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ रहा है और वे भोजन तथा सुरक्षित ठिकाने की तलाश में गांवों की ओर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस और वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

घटनास्थल पर अधिकारियों के नहीं पहुंचने से नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद अब तक कोई उच्च अधिकारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा था। इससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल वन विभाग की टीम गांव पहुंचकर हाथियों की निगरानी करे, ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं और फसल नुकसान का सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को मुआवजा दिया जाए।

Other Latest News

Leave a Comment