Ramgarh: रामगढ़ में CBI की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते CCL के ऑफिस सुपरिटेंडेंट को किया गिरफ्तार

Ramgarh के बरका-सयाल क्षेत्र में CBI ने CCL ऑफिस सुपरिटेंडेंट अजय बख्शी को कथित तौर पर रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। सौंदा ‘डी’ परियोजना कार्यालय में हुई कार्रवाई।

Ramgarh: झारखंड के रामगढ़ जिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के एक ऑफिस सुपरिटेंडेंट को कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अजय बख्शी के रूप में हुई है। यह कार्रवाई बरका-सयाल प्रक्षेत्र की सौंदा ‘डी’ परियोजना के कार्यालय में की गई। घटना के बाद संबंधित क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।

शिकायत के बाद CBI ने बिछाया जाल

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी ऑफिस सुपरिटेंडेंट अजय बख्शी पर एक आधिकारिक कार्य को पूरा करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। बताया गया है कि मृत महिला CCL कर्मी रीना देवी के पति गंगा प्रधान से कथित तौर पर रकम की मांग की गई थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी CBI को दी। शिकायत के आधार पर जांच एजेंसी ने कथित रिश्वतखोरी की पुष्टि के लिए ट्रैप की कार्रवाई की।

दो इनोवा कारों से पहुंची जांच टीम

कार्रवाई के दौरान CBI की टीम दो इनोवा कारों से सौंदा ‘डी’ परियोजना कार्यालय पहुंची। टीम ने निर्धारित योजना के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी को कथित रूप से रिश्वत लेते पकड़ लिया। इस कार्रवाई से बरका-सयाल क्षेत्र में हलचल मच गई। हालांकि, रिश्वत की कथित रकम और मामले से जुड़े अन्य तकनीकी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच एजेंसी के बयान के आधार पर ही की जा सकेगी।

कोयलांचल में पहले भी हो चुकी हैं छापेमारी

रामगढ़ के कोयलांचल क्षेत्र में इससे पहले भी भ्रष्टाचार और कोयले से जुड़े मामलों को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। अरगड्डा क्षेत्र के गिद्दी ए और गिद्दी सी सहित बरका-सयाल प्रक्षेत्र में भी पूर्व में छापेमारी किए जाने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में CCL अधिकारी की गिरफ्तारी को कोयला क्षेत्र में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जांच के बाद सामने आएंगे अन्य तथ्य

फिलहाल इस मामले में CBI की कार्रवाई और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच एजेंसी की आधिकारिक जानकारी के बाद ही रिश्वत मांगने के पूरे घटनाक्रम तथा अन्य संभावित पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी।

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