Ghazipur News: गाजीपुर की बेटी डॉ. अपराजिता सिंह का रूस में चयन, गगारिन कॉस्मोनॉट सेंटर में लेंगी अंतरिक्ष प्रशिक्षण

Ghazipur: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली अपराजिता सिंह को रूस के मॉस्को स्थित यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट प्रशिक्षण केंद्र (GCTC) में विशेष अंतरिक्ष प्रशिक्षण के लिए चुना गया है। मिली जानकारी के अनुसार, यह अवसर उन्हें एयरोस्पेस क्षेत्र में शोध और तकनीकी नवाचारों से जुड़े कार्यों के आधार पर मिला है। उनकी इस उपलब्धि को क्षेत्र के युवाओं और खासकर विज्ञान एवं तकनीक में रुचि रखने वाली छात्राओं के लिए प्रेरणादायक बताया जा रहा है।

रूस के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण केंद्र में मिलेगा प्रशिक्षण

अपराजिता सिंह के अनुसार, उन्हें रूस में अंतरिक्ष प्रशिक्षण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इसमें जीरो ग्रेविटी से संबंधित अभ्यास, स्पेस मिशन प्रोटोकॉल और अंतरिक्ष के अनुकूल तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी शामिल होने की बात कही गई है।

एयरोस्पेस तकनीक और रोबोटिक्स में रुचि

मिली जानकारी के अनुसार, अपराजिता ने इको नोवा स्पेस सूट और रोबोटिक्स जैसे नवाचारों पर काम किया है। इन तकनीकों का उद्देश्य अंतरिक्ष अनुसंधान को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने से जुड़ा बताया गया है। इसके अलावा, ऑपरेशन सिंदूर से प्रेरित एआई आधारित स्मार्ट कॉम्बैट यूनिफॉर्म विकसित करने का दावा भी किया गया है। इस तकनीक के संभावित उपयोग सैनिकों की सुरक्षा और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने से जुड़े बताए गए हैं।

गाजीपुर में हुई शुरुआती पढ़ाई

अपराजिता सिंह का संबंध गाजीपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार से बताया गया है। जानकारी के अनुसार, उनके पिता स्वतंत्र पत्रकार हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार में उनका एक छोटा भाई भी है। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गाजीपुर से पूरी की। वह वर्तमान में भुवनेश्वर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) में फैशन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रही हैं।

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मोव्स्ता इंडिया के सहयोग से रूस यात्रा

रूस में प्रशिक्षण के लिए चयन मोव्स्ता इंडिया के माध्यम से हुआ है। अपराजिता ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में बताया कि उनकी रूस यात्रा का खर्च संबंधित संस्था की ओर से वहन किया गया है। इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी प्रशिक्षण और सहयोग से जोड़कर देखा जा रहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणा की कहानी

गाजीपुर की बेटी के रूप में अपराजिता सिंह की यह कहानी शिक्षा, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय अवसरों की दिशा में आगे बढ़ने की आकांक्षा रखने वाले युवाओं का ध्यान आकर्षित कर रही है।

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