Raebareli: चौदह वर्षों का वनवास, तमाम संघर्षों और लंका विजय के बाद जब प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटे तो पूरी अयोध्या खुशियों से झूम उठी। भाई भरत की प्रतीक्षा समाप्त हुई और अयोध्यावासियों का वर्षों का इंतजार पूरा हुआ। प्रभु श्रीराम के राजतिलक के साथ ही रामराज्य की स्थापना का शुभारंभ हुआ। इसी भावपूर्ण और भक्तिमय प्रसंग की दिव्य झांकी के साथ नगर पंचायत परसदेपुर में 13 दिनों से चल रही ऐतिहासिक रामलीला का समापन हुआ। भगवान श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक का दृश्य देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम मिश्रा ने कहा कि परसदेपुर की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक परंपरा को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी नगरवासियों, कलाकारों, सहयोगियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।समापन समारोह में अयोध्या से आए आचार्य आकाश मिश्रा ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन और राज्याभिषेक की रस्म संपन्न कराई। यजमान के रूप में पूर्व प्रधान राधेश्याम मिश्र मौजूद रहे, जबकि वशिष्ठ की भूमिका भगवत प्रसाद पांडे ने निभाई।

रामलीला के दौरान भरत मिलाप के आयोजन में स्वर्णकार समाज, दीक्षित परिवार, गौड़ बिरादरी एवं पासी बिरादरी का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन मेला कमेटी के उपाध्यक्ष रिंकू मिश्रा ने किया।
मेले में साफ-सफाई, बिजली और पानी की समुचित व्यवस्था में नगर पंचायत अध्यक्ष विनोद कौशल एवं अधिशासी अधिकारी निमिषा भारद्वाज का सराहनीय सहयोग रहा। सुरक्षा व्यवस्था क्षेत्राधिकारी यदुवेन्द्र बहादुर पाल के निर्देशानुसार चौकी इंचार्ज मोहित भारद्वाज ने संभाली। वहीं मंच की भव्य सजावट का कार्य संजय उपाध्याय और आशीष सरोज ने किया। तेरह दिनों तक पूरा परसदेपुर राममय रहा। अंतिम दिन प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन तो हो गया, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में रामभक्ति, आदर्श और मर्यादा का संदेश छोड़ गया।










