UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का एक बयान सुर्खियों में है। बांदा जिले के बबेरू में आयोजित जन अधिकार महारैली के दौरान राजभर ने मंच से खुद को देश का सबसे बड़ा गुंडा बता दिया। उनके इस बयान ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। खास बात यह है कि यह बयान उस सरकार के मंत्री की ओर से आया है, जो लगातार अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती रही है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भागीदारी पार्टी की ओर से आयोजित जन अधिकार महारैली को संबोधित करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह, धनंजय सिंह और अभय सिंह जैसे चर्चित नामों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिनके यहां ऐसे लोग दरबार करते हों, उनसे बड़ा गुंडा भला कौन होगा? पूरे देश में उनसे बड़ा गुंडा कोई नहीं है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

राजभर यहीं नहीं रुके, उन्होंने बांदा में किसी प्रभावशाली दबंग व्यक्ति का जिक्र करते हुए चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि किसी ने उन्हें आंख दिखाने की कोशिश की तो उसकी दूसरी आंख निकालने की भी हैसियत उनके पास है। एक कैबिनेट मंत्री के इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल ने राजनीतिक मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार भाषा को लेकर बहस छेड़ दी है।
सबसे बड़ा सवाल प्रदेश की कानून व्यवस्था और सरकार की अपराधियों के खिलाफ घोषित जीरो टॉलरेंस नीति को लेकर उठ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात करते रहे हैं। उनका स्पष्ट संदेश रहा है कि महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए जेल या जहन्नुम का रास्ता है। ऐसे में उन्हीं की सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का खुद को सबसे बड़ा गुंडा बताना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, बयान पर विवाद बढ़ने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में दबंग और गुंडे गरीबों तथा कमजोरों को डराकर रखते हैं, वहां जाकर वह उन्हें चुनौती देते हैं और लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना था कि उन्होंने कोई गलत बात नहीं कही।
राजनीतिक जानकारों की नजर में यह बयान केवल शब्दों का विवाद नहीं, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बुंदेलखंड में राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सवाल यह है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देने वाली सरकार के मंत्री के इस बयान पर राजनीतिक नेतृत्व और विपक्ष की प्रतिक्रिया क्या होती है। फिलहाल राजभर का यह बयान प्रदेश की राजनीति में चर्चा और बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।










