चौकीदारी व्यवस्था बचाने और अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर झारखंड राज्य दफादार चौकीदार पंचायत द्वारा विधानसभा के समक्ष दिया एक दिवसीय धरना

दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन की सूचना मिलते ही दफादार चौकीदार पंचायत द्वारा धरना प्रदर्शन को शोक सभा में किया तब्दील, एक मिनट का मौन रख, गुरुजी को दी श्रद्धांजलि

पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार भारत की सबसे पुरानी प्रशासनिक चौकीदारी व्यवस्था बचाने हेतु 9 सूत्री मांगों को लेकर। झारखंड राज्य दफादार चौकीदार पंचायत द्वारा झारखंड विधानसभा के सामने कुटे मैदान में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने की और इसका संचालन लोहरदगा जिलाध्यक्ष शमशुल अंसारी ने किया। धरना स्थल पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित 9 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया। जिन मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया उनमें सेवा विमुक्त चौकीदारों को पुनः सेवा में योगदान कराना, 01 जनवरी, 1990 के पूर्व और बाद में सेवा निवृत चौकीदार और दफादारों के आश्रितों की नियुक्ति पूर्व नियुक्ति प्रक्रिया के अनुसार करना, सेवा विमुक्त और एवजी चौकीदारों को न्याय दिलाने हेतु झारखंड ग्राम चौकीदार ( संशोधन) विधेयक _ 2025 पारित कराना ,झारखंड चौकीदार संवर्ग नियमावली_ 2015 में उल्लेखित प्रावधानों केखिलाफ में जिलों में चौकीदारों के रिक्त पदों पर की गई अवैध नियुक्ति को जनहित और राज्यहित में तत्काल रद्द करना, चौकीदारी मैनुअल में किए गए प्रावधानों और राज्य सरकार द्वारा समय समय पर निर्गत आदेशों के आलोक में ही ड्यूटी करना, हर माह के प्रथम सप्ताह में वेतन भुगतान कराना, सभी बकाया जोड़कर वर्दी भत्ता का भुगतान करना और चौकीदार दफादारों का जिला और प्रदेश स्तर पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन कराना प्रमुख है ।

धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन से मांग करते हुए कहा कि सेवा विमुक्त चौकीदारों को पुनः सेवा में योगदान कराने और 1जनवरी, 1990 के पूर्व और बाद में सेवा निवृत चौकीदार दफादार दिग्वार घटवार और सरदारों के आश्रितों की नियुक्ति पूर्व नियुक्ति प्रक्रिया के अनुसार करने हेतु भारतीय संविधान के अनुच्छेद _ 16( 4) की भावना के आलोक में तत्काल अध्यादेश जारी किया जाए या झारखंड ग्राम चौकीदार ( संशोधन) विधेयक _ 2025 पारित किया जाए। प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने कहा कि झारखण्ड चौकीदार संवर्ग नियमावली 2015 की कंडिका 2( 9) में प्रावधान है कि ” बीट” से अभिप्रेत है एक चौकीदार का कार्यक्षेत्र जिसमें 100 से120 आवासीय घरों का समूह होगा । कंडिका 4 में प्रावधान है कि नियुक्ति एवं प्रोन्नति हेतु राज्य सरकार द्वारा समय समय पर निर्धारित जिला स्तरीय आरक्षण लागू होगा और कंडिका 5 ( 5) में प्रावधान है कि अभ्यर्थी को संबंधित बीट का स्थायी निवासी होना अनिवार्य होगा । श्री सिंह ने बताया कि झारखंड चौकीदार संवर्ग नियमावली 2015 में उल्लेखित उक्त प्रावधानों का अनुपालन हजारीबाग जिला में चौकीदार पद पर नियुक्ति में नहीं हुआ है । चौकीदारों के रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु निकाला गया विज्ञापन से पहले या बाद में100 से 120 आवासीय घरों पर हजारीबाग जिला में बीट सृजित नहीं किया गया है। सफल अभ्यर्थियों को जिस बीट में चौकीदार के पद पर नियुक्त किया गया है अपवाद को छोड़कर उस बीट के स्थायी निवासी नहीं हैं । एक बीट में एक ही चौकीदार नियुक्त होंगे, लेकिन एक बीट में 01 से ज्यादा 3_ 4 चौकीदारों को नियुक्त किया गया है। एक बीट ( पुराना) के अलावे नया बीट हजारीबाग जिला में नहीं बना है और ना ही एक बीट से ज्यादा पद और बल झारखंड कैबिनेट से स्वीकृत है तो एक बीट में एक से ज्यादा 3- 4 चौकीदारों को कैसे नियुक्त कर दिया गया है ? बीट के बाहर से चौकीदार के पद पर नियुक्ति करने से भारत की सबसे पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था चौकीदारी व्यवस्था झारखंड से समाप्त हो जाएगी और इसका सीधा बूरा असर जनहित और राज्यहित पर पड़ेगा । उक्त उल्लेखित तथ्यों से स्पष्ट है कि जिलों में चौकीदारों की नियुक्ति में झारखण्ड चौकीदार संवर्ग नियमावली 2015 में उल्लेखित प्रावधानों का अनुपालन नहीं हुआ है । जिलों में चौकीदारों की नियुक्ति में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग का आरक्षण शून्य कर दिया गया है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15( 4) और 16( 4 ,5) का खुलम खुला उल्लंघन है। श्री सिंह ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग करते हुए कहा कि झारखंड में चौकीदारी व्यवस्था बचाने के लिए जिन जिन जिलों में चौकीदारों के रिक्त पदों पर विज्ञापन निकालकर अवैध नियुक्ति की गई है उसको तत्काल रद्द करे और इसकी जाँच झारखंड विधानसभा की समिति से करावे और झारखंड के सेवा विमुक्त चौकीदारों को पुनः सेवा में वापिस करे और एवजी चौकीदारों को एक बार पूर्व नियुक्ति प्रक्रिया के अनुसार नियुक्ति करने का आदेश जारी करे । चौकीदार दफादारों का पद सार्वजनिक नहीं है, यह पद परंपरागत है। सार्वजनिक पद हेतु नया बीट सृजित करना होगा माननीय झारखंड हाईकोर्ट और झारखंड सरकार ने झारखंड चौकीदार संवर्ग नियमावली 2015 के खिलाफ में बहाली करने का आदेश नहीं दिया है ।

धरना प्रदर्शन का संचालन करते हुए लोहरदगा जिलाध्यक्ष शमशुल अंसारी ने कहा कि चौकीदार दफादारों से चौकीदारी मैनुअल में दिए गए प्रावधानों और समय समय पर झारखंड सरकार के गृह विभाग द्वारा निर्गत आदेशों के आलोक में ड्यूटी नहीं कराई जाती है जिसके चलते जनहित और राज्यहित प्रभावित होना लीजिमी है । अन्य वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति में परीक्षा नहीं ली जाती है, लेकिन अनुकंपा के आधार पर चौकीदारों की नियुक्ति में परीक्षा ली जाती है, इस पर रोक लगाने की मांग की है । अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति हेतु शैक्षणिक योग्यता केवल साक्षर रखी जाय। वहीं धरना स्थल पर झारखंड निर्माता, गरीबों,दलितों ,पिछड़ों, अल्पसंख्यक आदिवासियों की आवाज दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन की सूचना के बाद धरना प्रदर्शन को शोक सभा में तब्दील कर दिया गया और एक मिनट का मौन रहकर दिवंगत आत्मा की शांति हेतु कामना की गई और श्रद्धांजलि अर्पित कर धरना प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया। धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से सर्वश्री उमेश पासवान एतवा उरांव, राम किशुन गोप, शिबू पहाड़िया, किशोर बड़ाइक, भैयाराम तुरी विनोद बड़ाइक, सिकंदर यादव, अभिषेक महतो, सत्तार अंसारी सरयू यादव निमाईचंद्र रजवार आदि शामिल थे।

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