सीएचसी में डॉक्टरों की मनमानी! प्राइवेट लोगों के साथ मिलकर मरीजों को लूटने का आरोप

रायबरेली : उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रहे हैं। फिर भी व्यवस्थाएं बेपटरी पर है।लालगंज तहसील क्षेत्र में आम जनता को मूलभूत सुविधा मुहैया करने का जो दवा स्वास्थ्य विभाग करता है। वह सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। यहां डॉक्टरों के द्वारा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है और प्राइवेट की तरफ धकेला जा रहा है। इंसान के रूप में भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर चंद रुपए के लिए अपने ईमान को बेचने वाले इस हद तक गिर गए है कि यह एक सोचनीय है। आखिरकार फर्जी डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप लेकर मरीज का शोषण खुलेआम कर रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ रख कर अपनी जेब गर्म करने में लगा हुआ है। मजबूर और लाचार विभाग के अधिकारी रायबरेली की जनता का जरा सा भी फिक्र नहीं है और पीड़ित गरीब मरीजों की जेब ढीली करने में लगे हुए हैं। हम बात करते हैं रायबरेली के उस सीएचसी कि जहां पर सीएचसी अधीक्षक द्वारा गैर जिम्मेदाराना रवैया देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि इन दिनों सीएचसी लालगंज में डॉक्टर गौरव पांडे की अध्यक्षता में प्राइवेट लोगों का एक पैनल मरीजों को देख रहा है। यह प्राइवेट लोग किसकी अनुमति से मरीजों को देख रहे हैं। इनको देखने की अनुमति किसने दिया ? अब सवाल यह उठता है कि प्राइवेट लोग डॉक्टर के बगल में कुर्सी डाल कर मरीजों को कैसे देख सकता है? इस सब में कही न कहीं सीएचसी अधीक्षक की भूमिका संदिग्ध लग रही है। कैसे डॉक्टर गौरव पांडे यह सब कर रहे है। कही सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर अमल पटेल और डॉक्टर गौरव पांडे के रहमों करम पर तो नहीं यह धंधा फल फूल रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि गरीब मरीज फ्री इलाज की सुविधा के चक्कर में लालगंज सीएचसी पहुंचता है और उसके बाद भी उसे यह डॉक्टर प्राइवेट की तरह ट्रीटमेंट करते हैं। उसको वहां भी डॉक्टरों द्वारा लूटा जा रहा है। यह मैं नहीं कह रहा हूं, एक वीडियो में डॉक्टर गौरव पांडे अपने दाएं और बाएं दो लोगों को बैठा रखे हैं और उनसे बाहर की दवाओं के साथ-साथ बाहर की जांच लिखने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। क्योंकि बाहर की जांच में डॉक्टर साहब का मोटा कमीशन मिलता है। आखिरकार परेशान पीड़ित मरीजों को लालगंज की सीएचसी में डॉक्टरों द्वारा लूटा जा रहा है। यह मैं नहीं कह रहा हूं यह डॉक्टर गौरव पांडे के अगल-बगल बैठे प्राइवेट लोग खुद ही वीडियो में देखे जा सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि डॉक्टर गौरव पांडे की अनुपस्थिति में भी बाहर की जांच और दवाएं लिखते हैं और डॉक्टर साहब के हस्ताक्षर स्वयं कर देते हैं। खबर लिखे जाने तक इस संबंध में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नवीन चंद्रा से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नोट रीचेबल आ रहा था।

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