रायबरेली में प्रेम की मिसाल: मुस्लिम युवती फलकनाज़ ने हिन्दू प्रेमी कुशाग्र से मंदिर में रचाई शादी, बनीं पलक बाजपेयी

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के लालगंज थाना इलाके में साकेतनगर निवासी एक मुस्लिम युवती फलकनाज़ ने अपने हिन्दू प्रेमी कुशाग्र बाजपेयी से प्रेम को परिणति देते हुए वैदिक रीति-रिवाजों के साथ मंदिर में विवाह कर लिया। शादी के बाद युवती ने अपना नाम बदलकर पलक बाजपेयी रख लिया, जो प्रेम और धार्मिक सद्भाव की एक अनोखी मिसाल बन गई है। यह घटना 24 सितंबर को शुरू हुई घर से गायब होने की शिकायत से जुड़ी है, जिसके बाद पुलिस ने दोनों प्रेमियों को सुरक्षित बरामद किया और उनकी सहमति पर विवाह संपन्न कराया।

प्रेम कहानी की शुरुआत: तीन साल पुराना रिश्ता

लालगंज थाना क्षेत्र के साकेतनगर में रहने वाली 20 वर्षीय फलकनाज़ और 22 वर्षीय कुशाग्र बाजपेयी की प्रेम कहानी करीब तीन साल पुरानी है। दोनों का परिचय स्थानीय इलाके में हुआ था, जहां से उनका रिश्ता दोस्ती से प्यार में बदल गया। कुशाग्र, जो एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं, ने बताया कि दोनों ने एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हुए चुपके से मिलना-जुलना जारी रखा। हालांकि, परिवार वालों को इस रिश्ते की भनक लगने पर दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया। फलकनाज़ के परिवार ने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया, जिसके चलते युवती ने 24 सितंबर को घर छोड़ दिया।

परिवार वालों ने तुरंत लालगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कुशाग्र ने फलकनाज़ को भगा लिया है। पुलिस ने मामले को संवेदनशील मानते हुए तत्काल छापेमारी शुरू कर दी। खोजबीन के दौरान दोनों प्रेमियों को रायबरेली जिले के एक सुरक्षित स्थान पर बरामद कर लिया गया। पूछताछ में फलकनाज़ ने साफ-साफ बयान दिया कि वह कुशाग्र के साथ स्वेच्छा से रहना चाहती है और दोनों शादी करने के इच्छुक हैं।

पुलिस की भूमिका: प्रेम को मिली कानूनी और सामाजिक स्वीकृति

पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनी और मामले को सुलझाने के लिए विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के स्थानीय पदाधिकारियों को भी शामिल किया। विहिप पदाधिकारियों ने इस प्रेम को सामाजिक रूप से स्वीकार्य बनाने का फैसला किया। 28 सितंबर को लालगंज थाना इलाके के एक स्थानीय मंदिर में पुलिस की सख्त सुरक्षा में विवाह संपन्न कराया गया। विवाह वैदिक मंत्रों और हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ, जिसमें पंडित दुर्गा शंकर त्रिपाठी ने मुख्य भूमिका निभाई।

विवाह समारोह में कुशाग्र के परिवार के सदस्य मौजूद थे, जबकि फलकनाज़ की ओर से केवल वह खुद ही उपस्थित रहीं। पंडित त्रिपाठी ने बताया कि यह एक पूर्ण मांगलिक विवाह था, जिसमें फेरे लिए गए और आशीर्वाद दिया गया। शादी के बाद फलकनाज़ ने अपना नाम बदलकर पलक बाजपेयी रख लिया, जो उनके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। विहिप के पदाधिकारियों ने नए दंपति को आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रेम की कोई सीमा नहीं होती और समाज को ऐसे रिश्तों को स्वीकार करना चाहिए।

परिवारों की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजनाएं

फलकनाज़ के परिवार ने अभी भी इस विवाह का विरोध जताया है, लेकिन पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दंपति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। कुशाग्र के परिवार ने पलक का हार्दिक स्वागत किया और कहा कि वे उन्हें अपनी बेटी की तरह रखेंगे। दंपति ने बताया कि वे अब साकेतनगर में ही रहेंगे और कुशाग्र अपनी नौकरी जारी रखेंगे, जबकि पलक घर संभालेंगी। दोनों ने कहा कि उनका प्रेम धर्म की दीवारों से परे था और अब वे खुशी से नई जिंदगी शुरू करने को तैयार हैं।

यह घटना रायबरेली में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां प्रेम और सद्भाव की यह मिसाल अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकती है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में युवाओं की सहमति को प्राथमिकता दी जाती है और जबरदस्ती का कोई सवाल ही नहीं उठता।

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