Bhopal News : मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का NDTV पत्रकार से “क्या घंटा हो गया?” कहना विवादों में है। बयान पर मीडिया संगठनों की नाराज़गी, लोकतंत्र और जवाबदेही पर उठे सवाल।
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान NDTV के पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर उन्होंने जवाब में कहा—

“क्या घंटा हो गया?”
यह टिप्पणी कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और मीडिया जगत तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
सवाल पूछना अपराध?
बताया जा रहा है कि पत्रकार का सवाल किसी निजी विषय पर नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा था। इसके बावजूद एक संवैधानिक पद पर आसीन मंत्री द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग कई सवाल खड़े कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह बयान—
- मीडिया की गरिमा पर आघात करता है
- सत्ता की असहिष्णुता को दर्शाता है
- और यह संकेत देता है कि सवाल पूछना अब नेताओं को असहज कर रहा है
पत्रकार संगठनों में नाराज़गी
इस बयान के सामने आने के बाद कई पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि—
“अगर मंत्री सवालों से बचेंगे और पत्रकारों का अपमान करेंगे, तो लोकतंत्र की जवाबदेही कैसे बचेगी?”
लोकतंत्र में भाषा की जिम्मेदारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्री का पद केवल सत्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। ऐसे में—
- सवालों का जवाब देना लोकतांत्रिक कर्तव्य है
- असहमति और प्रश्न लोकतंत्र की बुनियाद हैं
- सार्वजनिक मंचों पर संयमित भाषा अपेक्षित होती है
उठते अहम सवाल
- क्या मंत्री सवालों से बच रहे हैं?
- क्या मीडिया से इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र के अनुकूल है?
- क्या भाजपा नेतृत्व इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया या कार्रवाई करेगा?
फिलहाल इस पूरे मामले पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।










