आज के समय में मोबाइल फोन, टैबलेट और टीवी बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं। छोटे बच्चे भी घंटों तक मोबाइल पर वीडियो देखते हैं या गेम खेलते रहते हैं। यह आदत धीरे-धीरे उनकी सेहत और मानसिक विकास पर असर डाल रही है। इसी मुद्दे पर एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम कई तरह की समस्याओं से जुड़ा हो सकता है, जिनमें ऑटिज्म (Autism) जैसे विकास संबंधी विकारों का जोखिम भी शामिल बताया जा रहा है।
एम्स डॉक्टरों की स्टडी क्या कहती है?
एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन उपयोग और उनके न्यूरो-डेवलपमेंट (मस्तिष्क विकास) के बीच एक संबंध देखा गया है। हालांकि यह बात पूरी तरह साबित नहीं हुई है कि मोबाइल या स्क्रीन सीधे ऑटिज्म का कारण बनते हैं, लेकिन रिसर्च में यह जरूर सामने आया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के बोलने, समझने और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती उम्र में बच्चे का दिमाग तेजी से विकसित होता है। इस समय अगर बच्चा असली लोगों के साथ बातचीत करने की बजाय सिर्फ स्क्रीन पर निर्भर रहता है, तो उसके सीखने और समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
स्क्रीन टाइम से जुड़े संभावित खतरे
विशेषज्ञों ने बच्चों में ज्यादा स्क्रीन देखने की आदत से जुड़े कुछ प्रमुख खतरों को बताया है:
- बोलने में देरी (Speech Delay):
जो बच्चे ज्यादा समय मोबाइल या टीवी पर बिताते हैं, उनमें भाषा सीखने और बोलने में देरी देखी जा सकती है। - सामाजिक दूरी (Social Isolation):
ऐसे बच्चे दूसरों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं और अकेले रहना पसंद करने लगते हैं। - ध्यान की कमी (Attention Problems):
ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों का ध्यान लंबे समय तक किसी एक चीज पर टिक नहीं पाता। - नींद की समस्या:
रात में मोबाइल या टीवी देखने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है, जिससे बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है। - व्यवहार में बदलाव:
कुछ बच्चों में गुस्सा, जिद और भावनात्मक अस्थिरता बढ़ सकती है।
क्या स्क्रीन टाइम और ऑटिज्म का सीधा संबंध है?
डॉक्टरों ने यह साफ किया है कि अभी तक कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि मोबाइल या स्क्रीन सीधे ऑटिज्म का कारण बनते हैं। ऑटिज्म एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसके पीछे कई जैविक और आनुवंशिक कारण हो सकते हैं। लेकिन शोध यह जरूर बताता है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में ऐसे लक्षणों को बढ़ा सकता है जो ऑटिज्म जैसे लग सकते हैं या उनके विकास को धीमा कर सकते हैं। इसलिए इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।
माता-पिता के लिए डॉक्टरों की सलाह
एम्स के डॉक्टरों ने माता-पिता को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं ताकि बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके:
- स्क्रीन टाइम सीमित करें:
2 से 5 साल के बच्चों के लिए रोजाना बहुत कम समय (या डॉक्टरों की सलाह अनुसार) स्क्रीन उपयोग होना चाहिए। - बच्चों को खेलों में लगाएं:
आउटडोर खेल, ड्राइंग, किताबें और अन्य रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों के विकास के लिए जरूरी हैं। - साथ में समय बिताएं:
माता-पिता को बच्चों के साथ बातचीत करनी चाहिए, कहानियां सुनानी चाहिए और उन्हें वास्तविक दुनिया से जोड़ना चाहिए। - मोबाइल को “इनाम” न बनाएं:
कई बार माता-पिता बच्चों को शांत करने के लिए मोबाइल दे देते हैं, जो बाद में आदत बन जाती है। - सोने से पहले स्क्रीन बंद करें:
रात में सोने से कम से कम 1-2 घंटे पहले स्क्रीन का उपयोग बंद कर देना चाहिए।
तकनीक का सही उपयोग जरूरी
डॉक्टर यह भी मानते हैं कि तकनीक पूरी तरह गलत नहीं है। आज की दुनिया में मोबाइल और इंटरनेट शिक्षा और सीखने के लिए बहुत जरूरी हैं। लेकिन इसका उपयोग संतुलित होना चाहिए। बच्चों को तकनीक से दूर रखना समाधान नहीं है, बल्कि उसे सीमित और नियंत्रित तरीके से उपयोग करना जरूरी है।
निष्कर्ष
एम्स के डॉक्टरों की यह चेतावनी माता-पिता के लिए एक जरूरी संकेत है कि बच्चों के स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। मोबाइल और टीवी का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।










