China Banned Japan Seafood: चीन ने जापान को दिया तगड़ा झटका, लेकिन भारत की कंपनियों को मिला बड़ा फायदा

China Banned Japan Seafood: चीन में जापानी सीफूड बैन से बढ़ी तनातनी, भारतीय शेयरों ने पकड़ी रफ्तार

China Banned Japan Seafood: चीन (China) और जापान (Japan) के बीच बढ़ते तनाव ने एशिया के मार्केट में हलचल मचा दी है। जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) के ताइवान पर दिए बयान के बाद चीन ने जापानी सीफूड पर दोबारा पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव बढ़ गया है। इस फैसले से जापान को करोड़ों डॉलर के नुकसान की आशंका है, वहीं भारत के लिए यह अप्रत्याशित तौर पर एक बड़ा अवसर बनकर उभरा है। अवंती फीड्स और कोस्टल कॉर्पोरेशन जैसी भारतीय सीफूड कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल आया, क्योंकि चीन वैकल्पिक सप्लायरों की तलाश में अब भारत की ओर देख रहा है। हालांकि बाजार में तेजी के बाद थोड़ी गिरावट भी दर्ज की गई।

फुकुशिमा जल विवाद से ताइवान बयान तक बढ़ा तनाव/China Banned Japan Seafood

चीन और जापान (China And Japan) के बीच सीफूड आयात को लेकर विवाद नया नहीं है। 2023 में फुकुशिमा (Fukushima) परमाणु संयंत्र से उपचारित अपशिष्ट जल समुद्र में छोड़े जाने के बाद चीन ने इसे “परमाणु दूषित जल” बताते हुए सभी जापानी समुद्री उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे जापान के 500 मिलियन डॉलर से अधिक के वार्षिक निर्यात को बड़ा झटका लगा। सितंबर 2025 में IAEA की मंजूरी के बाद चीन ने इस प्रतिबंध में आंशिक ढील दी और कड़े परीक्षण के साथ कुछ उत्पादों की एंट्री फिर से शुरू कर दी। लेकिन स्थिति तब बदली जब 12 नवंबर 2025 को जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची (PM Sanae Takaichi) ने संसद में ताइवान से जुड़े बयान में कहा कि ताइवान पर हमला जापान की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है और जापान सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। इस राजनीतिक टिप्पणी ने बीजिंग को भड़काया और मुद्दा फिर से वैश्विक विवाद बन गया।

सीफूड बैन से फिल्मों तक, लगातार ताबड़तोड़ कदम

साने ताकाइची के बयान के तुरंत बाद चीन ने जापानी सीफूड के आयात पर दोबारा पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। बीजिंग (Beijing) ने आधिकारिक बयान में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जापानी समुद्री उत्पादों के लिए कोई बाजार नहीं है। इसके साथ ही चीन ने दो जापानी फिल्मों की रिलीज पर रोक लगा दी और जापान यात्रा पर सौम्य स्तर की चेतावनी भी जारी कर दी। इसका असर पर्यटन पर भारी पड़ा, क्योंकि इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक जापान जाने वाले चीनी पर्यटक 75 लाख से अधिक थे। 18 नवंबर को बीजिंग में जापान के मसाकी कनाई (Masaki Kanai) और चीन के लियू जिनसोंग (Liu Jinsong) के बीच हुई बैठक भी बेनतीजा रही। चीन ने ताकाइची से माफी की मांग की, जबकि जापान ने इस प्रतिबंध को अनुचित बताया। यह पूरी स्थिति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को और तेज कर रही है।

भारतीय सीफूड कंपनियों के शेयरों में तेज दौड़

चीन के इस प्रतिबंध का सीधे-सीधे फायदा भारत जैसे देशों को हुआ है। जापान से आयात बंद होने के बाद चीन ने वैकल्पिक सप्लायर्स की ओर रुख किया, जिसमें भारत शीर्ष विकल्प के रूप में उभरा। भारतीय सीफूड कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। अवंती फीड्स (Avanti Feeds) के शेयर बुधवार को 10% तक उछलकर दो महीनों के उच्च स्तर पर बंद हुए। कंपनी पहले ही चीन के लिए शिपमेंट बढ़ाने की योजना बना चुकी है। कोस्टल कॉर्पोरेशन (Coastal Corporation) के शेयर भी 5% तक चढ़े, जबकि अन्य सीफूड कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। अमेरिका में 50% टैरिफ झेल रही भारतीय कंपनियों के लिए चीन का यह नया बाजार बड़ा अवसर साबित हो सकता है। हालांकि गुरुवार को मुनाफावसूली के चलते इन शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार लंबी अवधि में भारत को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है।

कौन हारा, कौन जीता?

चीन-जापान टकराव का आर्थिक प्रभाव कई क्षेत्रों पर पड़ा है। जापान के सीफूड उद्योग को 100–150 मिलियन डॉलर तक के नुकसान का अनुमान है। जापानी कंपनियों जैसे क्योकोयो कंपनी (Kyokuyo Co.) और निस्सुई कंपनी (Nissui Co.) के शेयर क्रमशः 2.7% और 3.1% तक गिर गए। पर्यटन सेक्टर भी भारी नुकसान की आशंका में है, क्योंकि बड़ी संख्या में चीनी पर्यटकों की यात्रा रद्द हो सकती है। चीन में समुद्री उत्पादों की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है, हालांकि बीजिंग इसे स्वास्थ्य सुरक्षा का कदम बता रहा है। दूसरी ओर चीनी कंपनियों, जैसे झानजियांग गुओलियन (Zhanjiang Guolian), के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। भारत के लिए यह स्थिति एक लाभदायक अवसर बनकर उभरी है, लेकिन वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता इसे आगे कितना टिकाऊ रखेगी, यह आने वाले महीनों में तय होगा।

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